देश की खबरें | शीर्ष अदालत ने बार काउंसिल का सदस्य बनने के लिए अलग-अलग शुल्क ढांचे का मुद्दा उल्लेखित किया

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नयी दिल्ली, 28 सितंबर उच्चतम न्यायालय ने बुधवार को बार काउंसिल का सदस्य बनने के लिए राज्य बार काउंसिल के अलग-अलग शुल्क ढांचे के मुद्दे का उल्लेख किया और सवाल किया कि क्या पंजीकरण प्रक्रिया में एकरूपता लाने के वास्ते विचार किया जा सकता है।

न्यायमूर्ति एस के कौल, न्यायमूर्ति संजीव खन्ना, न्यायमूर्ति ए एस ओका, न्यायमूर्ति विक्रम नाथ और न्यायमूर्ति जे के माहेश्वरी की पांच-न्यायाधीशों की संविधान पीठ इस सवाल पर विचार कर रही है कि क्या अधिवक्ता अधिनियम, 1961 के तहत बार काउंसिल ऑफ इंडिया (बीसीआई) द्वारा एक पंजीकरण पूर्व परीक्षा निर्धारित की जा सकती है।

शीर्ष अदालत ने कहा कि विभिन्न राज्य बार काउंसिल एकसमान प्रथा का पालन नहीं करते और उदाहरण के लिए, उनके इसको लेकर अपने मानदंड हैं कि कोई बार काउंसिल का सदस्य कैसे बनता है।

न्यायमूर्ति कौल ने कहा, ‘‘मुझे बताया गया है कि अलग-अलग शुल्क संरचनाएं और अलग-अलग मानदंड हैं। कुछ जगहों पर, बार काउंसिल का सदस्य बनने के लिए निर्धारित शुल्क संरचना 15,000 रुपये से 20,000 रुपये तक है। कानून के कुछ युवा स्नातक चिंता व्यक्त कर रहे हैं।’’

न्याय मित्र के रूप में अदालत की सहायता कर रहे वरिष्ठ अधिवक्ता के वी विश्वनाथन ने कहा कि यह एक महत्वपूर्ण पहलू है।

पीठ ने मामले में दलीलें सुनने के बाद अपना फैसला सुरक्षित रख लिया।

सुनवाई के दौरान पीठ ने कहा कि दिल्ली में पंजीकरण के लिए ग्रामीण पृष्ठभूमि से आने वाले किसी व्यक्ति को बार काउंसिल का सदस्य बनने के लिए 20,000 रुपये खर्च करने पड़ सकते हैं। पीठ ने पूछा कि क्या पंजीकरण की प्रक्रिया में कुछ एकरूपता हो सकती है।

उसने कहा, ‘‘क्या एक प्रक्रिया पर विचार किया जा सकता है? क्या इसमें कुछ एकरूपता हो सकती है?’’

वरिष्ठता के मुद्दे पर शीर्ष अदालत को बताया गया कि अलग-अलग बार काउंसिल के अलग-अलग नियम हैं लेकिन वरिष्ठता पंजीकरण की तारीख के अनुसार तय की जाती है।

शीर्ष अदालत को बताया गया कि यदि दो अधिवक्ताओं के पंजीकरण की तिथि समान है तो उनकी जन्म तिथि वरिष्ठता तय करती है।

मंगलवार को सुनवाई के दौरान शीर्ष अदालत ने सवाल किया था कि क्या देश में वकीलों की आवश्यक संख्या को लेकर कोई अध्ययन किया गया है।

मार्च 2016 में शीर्ष अदालत ने कहा था कि निर्धारण के लिए उठाए गए प्रश्नों में से एक यह है कि क्या बीसीआई बार में वकालत जारी रखने के लिए पात्रता की शर्त के रूप में किसी वकील के पंजीकरण के बाद एक परीक्षा निर्धारित करने के लिए सक्षम है।

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