देश की खबरें | ‘रोडरेज’ मामले में वकील की अग्रिम जमानत याचिका खारिज
Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. दिल्ली उच्च न्यायालय ने ‘रोड रेज’ के एक मामले में एक वकील को जमानत देने से इनकार करते हुए कहा कि सार्वजनिक स्थान पर ‘दिनदहाड़े हिंसा’ के लिए राहत देने से समाज में यह ‘गलत संकेत’ जाएगा कि हमलावर अपने पेशे के कारण आजाद घूम रहा है।
नयी दिल्ली, 16 मई दिल्ली उच्च न्यायालय ने ‘रोड रेज’ के एक मामले में एक वकील को जमानत देने से इनकार करते हुए कहा कि सार्वजनिक स्थान पर ‘दिनदहाड़े हिंसा’ के लिए राहत देने से समाज में यह ‘गलत संकेत’ जाएगा कि हमलावर अपने पेशे के कारण आजाद घूम रहा है।
न्यायमूर्ति गिरीश कठपालिया ने कहा कि कानून की नजर में सभी समान हैं और गिरफ्तारी से पहले जमानत देने से ‘वकालत के नेक पेशे की छवि खराब होगी’।
न्यायालय ने 15 मई को कहा, “सार्वजनिक स्थान पर दिनदहाड़े हिंसा के मामले में अग्रिम जमानत देने से समाज में गलत संकेत जाएगा कि हमलावर ने कानून को अपने हाथ में लिया और सिर्फ इसलिए आजाद घूम रहा है क्योंकि वह एक वकील है। कानून की नजर में सभी समान हैं और किसी को भी समान से अधिक नहीं माना जा सकता। अगर आरोपी/याचिकाकर्ता को ऐसी राहत दी जाती है तो इससे वकालत के नेक पेशे की भी बदनामी होगी।”
आरोपी और उसके भाई ने फरवरी में दोपहिया वाहन से देवली रोड जा रहे एक सॉफ्टवेयर इंजीनियर पर हमला किया था।
आरोपी के भाई के राजनीतिक संबंध हैं।
पीड़ित को चोटें आईं थीं, जिसे आरोपी ने मात्र ‘रोड रेज’ की घटना बताया था।
अदालत ने हालांकि इस बात से असहमति जताई कि यह मात्र ‘रोड रेज’ का मामला था और आरोपी व उसके भाई द्वारा ‘सार्वजनिक स्थान पर दिनदहाड़े की गई हिंसा की भयावहता को पूरी तरह से समझने के लिए’ सीसीटीवी फुटेज का हवाला दिया।
न्यायाधीश ने कहा कि पीड़ित को सिर में भी चोट लगी थी, जो घातक हो सकती थी।
अदालत ने कहा कि ‘रोड रेज’ सिर्फ रोड रेज नहीं है क्योंकि इसके कई व्यापक परिणाम होते हैं, जैसे पीड़ित को शारीरिक चोट और मानसिक आघात तथा कई बार मौत भी हो जाती है।
अदालत ने कहा कि वर्तमान मामले में आरोपी, वकील और राजनीतिक संगठन के अध्यक्ष थे, जिससे नुकसान बहुत अधिक हुआ क्योंकि ये दोनों ही समाज के जिम्मेदार सदस्य हैं और उन्हें कानून को अपने हाथ में नहीं लेने का ध्यान रखना होगा।
अदालत ने जांच अधिकारी द्वारा हमले में इस्तेमाल हथियार को बरामद करने और मामले की जांच के लिए आरोपियों को हिरासत में लेकर पूछताछ करने की आवश्यकता पर गौर करते हुए कहा कि यह अग्रिम जमानत देने के लिए उपयुक्त मामला नहीं है।
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