देश की खबरें | अधिकारी के खिलाफ आरोप गंभीर, सीबीआई ने जमानत याचिका का विरोध करते हुए उच्च न्यायालय में कहा

Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. सीबीआई ने बुधवार को दिल्ली उच्च न्यायालय में अपने अधिकारी अभिषेक तिवारी की जमानत याचिका का विरोध किया, जिन्होंने महाराष्ट्र के पूर्व गृह मंत्री अनिल देशमुख के खिलाफ भ्रष्टाचार मामले में एजेंसी की प्रारंभिक जांच रिपोर्ट कथित तौर पर लीक की थी। एजेंसी ने कहा कि आरोप गंभीर हैं और उनको रिहा किया जाना निष्पक्ष जांच के लिए नुकसानदायक होगा।

नयी दिल्ली, 29 सितंबर सीबीआई ने बुधवार को दिल्ली उच्च न्यायालय में अपने अधिकारी अभिषेक तिवारी की जमानत याचिका का विरोध किया, जिन्होंने महाराष्ट्र के पूर्व गृह मंत्री अनिल देशमुख के खिलाफ भ्रष्टाचार मामले में एजेंसी की प्रारंभिक जांच रिपोर्ट कथित तौर पर लीक की थी। एजेंसी ने कहा कि आरोप गंभीर हैं और उनको रिहा किया जाना निष्पक्ष जांच के लिए नुकसानदायक होगा।

तिवारी की जमानत याचिका के जवाब में सीबीआई ने कहा कि एजेंसी के अधिकारी के तौर पर उनका काम भ्रष्टाचार में संलिप्त लोगों का पता लगाना और उन्हें न्याय के कठघरे में लाना था, लेकिन वह खुद ही भ्रष्टाचार में संलिप्तता के आरोपी पाए गए।

इसने कहा, ‘‘अपराध काफी गंभीर है और याचिकाकर्ता (तिवारी) को जांच के तौर-तरीकों के बारे में पता है, इसलिए उनकी रिहाई से निष्पक्ष एवं उचित जांच को नुकसान होगा। अपराध भ्रष्टाचार का है और यह बाड़ के खेत खाने जैसा है।’’

न्यायमूर्ति योगेश खन्ना ने मामले की सुनवाई पांच अक्टूबर के लिए तय की।

सीबीआई ने अपने उपनिरीक्षक तिवारी, नागपुर के वकील आनंद डागा एवं अन्य के खिलाफ विभिन्न आरोपों में मामला दर्ज किया था। डागा, देशमुख के लिए वकील के तौर पर काम करते थे।

याचिका के मुताबिक, तिवारी को 30 अगस्त को हिरासत में लिया गया और एक सितंबर को गिरफ्तार किया गया और वह छह सितंबर तक न्यायिक हिरासत में रहे। उन्होंने सीबीआई की विशेष अदालत के आठ सितंबर के फैसले को चुनौती दी है जिसने उनकी जमानत याचिका खारिज कर दी थी।

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