देश की खबरें | प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के साथ पीटीआई के विशेष साक्षात्कार का मूल पाठ तीन

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प्रश्न: भारत की अध्यक्षता के दौरान आपने जिस तरह से जी-20 को चर्चा का विषय बनाया और देश भर में उच्च-स्तरीय बैठकों के एक साल के कैलेंडर की योजना बनाई, उसकी आपके आलोचकों ने भी प्रशंसा की है। यह अभूतपूर्व था। आपने पूरे भारत में जी-20 बैठकों के प्रसार की इस अवधारणा की परिकल्पना कैसे की? इस रणनीति के पीछे तर्क क्या था?

उत्तर: हमने अतीत में ऐसे कई उदाहरण देखे हैं, जहां कुछ देशों ने, भले ही आकार में छोटे हों, ओलंपिक जैसे उच्च-स्तरीय वैश्विक आयोजन की जिम्मेदारी ली। इन विशाल आयोजनों का सकारात्मक और परिवर्तनकारी प्रभाव पड़ा। इसने विकास को प्रेरित किया और खुद के प्रति अपने दृष्टिकोण को बदल दिया और जिस तरह से दुनिया ने उनकी क्षमताओं को पहचानना शुरू किया, वास्तव में यह उनकी विकास यात्रा में एक महत्वपूर्ण मोड़ बन गया।

भारत में अपने विभिन्न राज्यों, केंद्र शासित प्रदेशों और शहरों में दुनिया का स्वागत करने, मेजबानी करने और जुड़ने की बहुत क्षमता है। दुर्भाग्य से अतीत में दिल्ली में विज्ञान भवन और उसके आसपास चीजों को ठीक करने का रवैया हुआ करता था। शायद इसलिए कि यह एक आसान तरीका था। या शायद इसलिए कि सत्ता में बैठे लोगों को देश के विभिन्न हिस्सों के लोगों में इस तरह की योजनाओं को सफलतापूर्वक निष्पादित करने के लिए विश्वास की कमी थी।

मुझे अपने लोगों की क्षमताओं पर बहुत भरोसा है। मैं एक संगठनात्मक पृष्ठभूमि से आता हूं और जीवन के उस चरण के दौरान कई अनुभव हुए हैं, जिनसे मैंने बहुत कुछ सीखा है। मुझे उन चीजों को प्रत्यक्ष रूप से देखने का सौभाग्य प्राप्त हुआ कि मंच और अवसर मिलने पर आम नागरिक भी कुछ कर गुजरने की ताकत रखता है। इसलिए, हमने दृष्टिकोण में सुधार किए।

यदि आप ध्यान से देखें तो वर्षों से हमने हर क्षेत्र के लोगों पर भरोसा किया है। यहां कुछ उदाहरण हैं। आठवां ब्रिक्स शिखर सम्मेलन गोवा में हुआ। कई प्रशांत द्वीप देशों को शामिल करते हुए दूसरा एफआईपीआईसी (फोरम फॉर इंडिया-पैसिफिक आइलैंड्स कोऑपरेशन) शिखर सम्मेलन जयपुर में हुआ। वैश्विक उद्यमिता शिखर सम्मेलन हैदराबाद में हुआ।

इसी तरह, हमने यह सुनिश्चित किया कि हमारे देश का दौरा करने वाले कई विदेशी नेताओं की मेजबानी केवल दिल्ली के बजाय देश भर में विभिन्न स्थानों पर की जाए। यही दृष्टिकोण जी-20 में भी बड़े पैमाने पर जारी है।

जब तक हमारा जी-20 की अध्यक्षता का कार्यकाल समाप्त होगा, तब तक सभी 28 राज्यों और 8 केंद्र शासित प्रदेशों के 60 शहरों में 220 से अधिक बैठकें हो चुकी होंगी। लगभग 125 राष्ट्रों के एक लाख से अधिक प्रतिभागियों ने भारतीयों के कौशल को देख लिया होगा। हमारे देश में 1.5 करोड़ से अधिक लोग इन कार्यक्रमों में शामिल हुए हैं या इनके कुछ पहलुओं के संपर्क में आए हैं।

इस तरह के प्रत्येक वैश्विक स्तर के कार्यक्रमों ने लॉजिस्टिक्स, आतिथ्य, पर्यटन, सॉफ्ट स्किल्स और परियोजनाओं के निष्पादन जैसे कई क्षेत्रों में क्षमता निर्माण को बढ़ावा दिया है। यह प्रत्येक क्षेत्र के लोगों के आत्मविश्वास को बढ़ाने वाला है। अब, वे जानते हैं कि वे कुछ विश्व स्तरीय कर सकते हैं। इस क्षमता और आत्मविश्वास को विभिन्न अन्य रचनात्मक प्रयासों में भी लगाया जाएगा जो प्रगति और समृद्धि को आगे बढ़ाएंगे।

इसके अलावा, हम न केवल सभी राज्यों में बैठकें आयोजित कर रहे हैं, बल्कि प्रत्येक राज्य यह भी सुनिश्चित कर रहा है कि वे प्रतिनिधियों के दिमाग पर अपनी अनूठी सांस्कृतिक छाप छोड़ें। इससे दुनिया को भारत की अविश्वसनीय विविधता का अंदाजा भी हो रहा है। मैंने मुख्यमंत्रियों की बैठक के दौरान विभिन्न राज्यों से भी अपील की है कि वे यह सुनिश्चित करें कि प्रत्येक राज्य जी-20 के दौरान वहां की यात्रा करने वाले प्रतिनिधियों और उनके देशों के साथ अपने संबंधों को मजबूत करना जारी रखें। इससे भविष्य में लोगों के लिए बहुत सारे अवसर भी खुलेंगे। इसलिए, जी-20 से संबंधित गतिविधियों के विकेन्द्रीकरण के पीछे एक गहरी योजना है। हम अपने लोगों, अपने संस्थानों और अपने शहरों में क्षमता निर्माण में निवेश कर रहे हैं।

प्रश्न: 2023 के दौरान भारत में पर्यटन से लेकर सेहत, जलवायु परिवर्तन से लेकर स्वास्थ्य, महिला सशक्तिकरण से लेकर ऊर्जा पारगमन तक जैसे मुद्दों पर 200 से अधिक बैठकें हुईं। इनमें से कितनी ने आपकी संतुष्टि के अनुरूप ठोस परिणाम दिए हैं। क्या कुछ ऐसे क्षेत्र हैं जहां आप देखते हैं कि हम और अधिक कर सकते थे?

उत्तर: इस जवाब के दो पहलू हैं।

पहला यह है कि आपको हमारी अध्यक्षता समाप्त होने के बाद दिसंबर में परिणामों के बारे में मुझसे सवाल पूछना चाहिए। इसके अलावा, आगामी शिखर सम्मेलन की महत्ता को ध्यान में रखते हुए, अभी विवरण बताना मेरे लिए सही नहीं होगा।

लेकिन एक और पहलू है जिसके बारे में, मैं निश्चित रूप से बात करना चाहूंगा। पिछले एक वर्ष में कई महत्वपूर्ण मुद्दे उठाए गए हैं।

संपूर्ण पृथ्वी को एक परिवार के रूप में एक भविष्य की ओर ले जाने की भावना के अनुरूप काम किया गया जो टिकाऊ और न्यायसंगत हो। ऐसे कई मुद्दों पर चर्चा की गई है और उन्हें आगे बढ़ाया गया है।

जी-20 में विभिन्न स्तरों पर बैठकें हुई हैं। इनमें एक महत्वपूर्ण प्रकार की मंत्रिस्तरीय बैठक भी शामिल है। यह उच्च-स्तरीय है इसलिए इसमें तत्काल नीतिगत प्रभाव की एक बड़ी संभावना है। मैं आपको मंत्रिस्तरीय बैठकों के कुछ उदाहरण देता हूं।

13 से अधिक मंत्रिस्तरीय बैठकें आयोजित की गई हैं और इनमें कई सफल नतीजों को अंगीकार भी किया गया है।

हमारी अध्यक्षता की प्राथमिकताओं में से एक जलवायु कार्रवाई को लोकतांत्रिक बनाकर इसमें तेजी लाना था। मिशन लाइफ के माध्यम से जलवायु पर जीवन शैली के प्रभाव पर ध्यान केंद्रित करना, इस मुद्दे को वास्तव में लोकतांत्रिक बनाने का एक तरीका है, क्योंकि ग्रह पर सकारात्मक प्रभाव डालने की शक्ति हर व्यक्ति के पास है। विकास मंत्रियों की बैठक में, जी-20 ने सतत विकास के लक्ष्यों और जीवन शैली पर प्रगति में तेजी लाने के लिए कार्ययोजना को अपनाया।

इसी प्रकार, कृषि मंत्रियों ने खाद्य सुरक्षा और पोषण पर ‘डेक्कन’ के उच्च स्तरीय सिद्धांतों को सफलतापूर्वक अपनाया। ये वैश्विक भूख और कुपोषण को कम करने में मदद करेंगे। हमारे टिकाऊ सुपरफूड ‘श्री अन्न’ के लिए हमारे जुनून को देखते हुए, कृषि मंत्रियों ने कृषि के लिए जलवायु-स्मार्ट और डिजिटल दृष्टिकोण के महत्व पर ध्यान केंद्रित करते हुए मोटे और अन्य प्राचीन अनाजों पर अनुसंधान के लिए अंतरराष्ट्रीय पहल भी शुरू की।

महिला सशक्तिकरण पर मंत्रिस्तरीय सम्मेलन ने लिंग आधारित डिजिटल विभाजन को पाटने, श्रम बल की भागीदारी में खामियों को कम करने और नेतृत्व व निर्णय लेने वाले पदों पर महिलाओं के लिए एक बड़ी भूमिका सुनिश्चित करने पर आम सहमति बनाई।

ऊर्जा मंत्रियों ने हाइड्रोजन के लिए उच्च स्तरीय सिद्धांतों पर भी आम सहमति दी है और कई अन्य परिणामों के बीच वैश्विक जैव ईंधन गठबंधन की स्थापना के लिए नींव रखी है।

पर्यावरण और जलवायु मंत्रियों ने 2040 तक भूमि क्षरण में 50 प्रतिशत की कमी लाने का महत्वाकांक्षी लक्ष्य निर्धारित करते हुए उद्योग के नेतृत्व वाले संसाधन दक्षता और चक्रीय अर्थव्यवस्था उद्योग गठबंधन की शुरुआत की दिशा में प्रगति की है।

श्रम और रोजगार मंत्रियों ने सीमाओं के पार कौशल की पारस्परिक मान्यता देने को लेकर व्यवसायों के वर्गीकरण के लिए एक अंतरराष्ट्रीय संदर्भ विकसित करने पर आम सहमति भी बनाई। यह मांग व आपूर्ति को पूरा करने में मदद करेगा और उद्योगों को मानव पूंजी खोजने में मदद करेगा।

व्यापार और निवेश मंत्रियों ने व्यापार दस्तावेज के डिजिटलीकरण के लिए उच्च स्तरीय सिद्धांतों को भी अपनाया है, जिससे व्यापार को बढ़ावा मिलेगा और व्यापार करने में आसानी होगी।

ये केवल कुछ महत्वपूर्ण घटनाक्रम हैं। अन्य क्षेत्रों में भी ऐसी कई और भी उपलब्धियां हैं। आने वाले वर्षों में, ये उस दिशा के लिए निर्णायक साबित होंगे जिस ओर दुनिया जाएगी।

जारी पीटीआई टीम

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