देश की खबरें | मोदी सरकार के आठ वर्षो के कार्यकाल में आतंकवाद वैश्विक चर्चा के केंद्र में आया : जयशंकर

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नयी दिल्ली, 11 मई प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की विदेश नीति की सराहना करते हुए विदेश मंत्री एस जयशंकर ने बुधवार को कहा कि उनकी सरकार के आठ वर्षो के कार्यकाल में आतंकवाद वैश्विक चर्चा के केंद्र में आया, साथ ही देश ‘कठिन सुरक्षा चुनौतियों’ का सामना करने में सक्षम बना ।

‘‘मोदी@20 : ड्रीम्स मीट डिलीवरी’’ पुस्तक के विमोचन के अवसर पर जयशंकर ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी ने ऐसी कूटनीति पर अमल किया जो अधिक ‘विकासोन्मुखी और लोकोन्मुखी’ है।

जयशंकर ने कहा कि मोदी सरकार आतंकवाद के विषय को वैश्विक चर्चा के केंद्र में लायी, साथ ही सीमा पर आधारभूत ढांचे के विकास पर ध्यान दिया क्योंकि प्रधानमंत्री जानते हैं कि यह हमारी सुरक्षा चुनौतियों के लिये महत्वपूर्ण है।

उन्होंने कहा, ‘‘ इसलिये चाहे उरी हो या बालाकोट, डोकलाम हो या लद्दाख, आप देखेंगे कि यह ऐसा देश नहीं है जो कठिन सुरक्षा चुनौतियों से मुंह मोड़ता हो । ’’

विदेश मंत्री ने दुनिया के अन्य देशों से भारत में पूंजी एवं प्रौद्योगिकी लाने के प्रधानमंत्री मोदी के प्रयासों की प्रशंसा की ।

उन्होंने कहा, ‘‘ कारोबार को लेकर उनकी रूचि...400 अरब डालर के निर्यात लक्ष्य को हासिल करने के लिये वास्तव में उन्होंने प्रत्येक दूतावास को संबोधित किया । ’’

जयशंकर ने कहा कि कोष जुटाने के लिये उन्होंने प्रयास किये ताकि भारत में निवेश से रोजगार सृजित हो सकें ।

उन्होंने कहा, ‘‘ जब वे विदेश जाते हैं, वे रेलवे को देखते हैं, वे इलेक्ट्रिक वाहनों को देखते हैं, वे पर्यावरण को देखते हैं, हरित परियोजनाओं को देखते हैं और इस विचार से देखते हैं कि इसमें से भारत क्या लाया जा सकता है। वे जो कुछ भी करते हैं, इसकी तह में विकास के लिये इच्छा होती है। ’’

लोकोन्मुखी नीतियों पर जोर देते हुए जयशंकर ने कहा कि प्रधानमंत्री ने नौकरशाही के घेरे को कम करते हुए पासपोर्ट हासिल करना सरल बनाया ।

विदेश मंत्री ने कोविड के दौरान विदेशों में फंसे भारतीयों को लाने के लिये आपरेशन वंदे भारत, यूक्रेन में फंसे भारतीयों को लाने के लिये आपरेशन गंगा, अफगानिस्तान में फंसे भारतीयों को लाने के लिये आपरेशन देवी शक्ति जैसी लोकोन्मुखी पहल का उदाहरण दिया ।

उन्होंने 11 वर्ष पहले मोदी से अपने पहले संवाद को याद किया जब वे (जयशंकर) चीन में भारत के राजदूत थे और मोदी गुजरात के मुख्यमंत्री थे । उन्होंने कहा कि हम दूतावासों में मुख्यमंत्रियों के आगमन को लेकर अभ्यस्त थे, लेकिन यह अलग था क्योंकि मोदी मध्य रात्रि में आये थे और वे चाहते थे कि पहला संवाद सुबह सात बजे हो ।

जयशंकर ने कहा कि वे (मोदी) दिन में 12 घंटे चलते रहे और सिर्फ आधे घंटे का भोजनावकाश लिया । उन्होंने कहा कि आज हमारे लिये यह काम करने का मानक है लेकिन उस समय यह एक खोज के समान थी ।

विदेश मंत्री ने कहा कि मुख्यमंत्री के रूप में तब उन्होंने कुछ अलग किया और मुझसे चीन के संदर्भ में सुरक्षा स्थिति के बारे में जानकारी देने को कहा । उन्होंने कहा कि उस समय नत्थी वीजा, सीमा के नक्शे सहित कई समस्याएं थीं ।

तब गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में मोदी की कही बातों को उद्धृत करते हुए जयशंकर ने कहा कि उस समय उन्होंने (मोदी) कहा कि वे गुजरात के मुख्यमंत्री हो सकते हैं लेकिन वे भारत के नागरिक भी हैं और जब वे बाहर जाते हैं तब हमारे राष्ट्रीय रूख से एक मिलीमीटर भी अलग नहीं हो सकते ।

जयशंकर ने कहा कि मुख्यमंत्री आमतौर पर अपने राज्यों को बढ़ावा देने के लिये बाहर जाते हैं लेकिन मोदी भारत और चीन के बीच आर्थिक असंतुलन को लेकर चिंतित थे ।

उन्होंने कहा कि 11 वर्ष पहले कुछ भारतीय चीन की जेल में थे और उनके बारे में गुजरात के आभूषण कारोबारी होने की बात आई, तब वे (मोदी) इनकी रिहाई को लेकर काफी चिंतित थे ।

विदेश मंत्री ने कहा, ‘‘ आज मैं बदलाव देखता हूं जो उन्होंने किया है... उन्होंने हमारी विदेश नीति का नेतृत्व किया है जो अधिक सुरक्षा केंद्रित है। उन्होंने ऐसी कूटनीति पर अमल किया जो अधिक ‘विकासोन्मुखी और लोकोन्मुखी’ है।’’

दीपक

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