विदेश की खबरें | दो प्रमुख लक्ष्यों का पता लगाने में सक्षम दूरबीन ‘एफआरबी’ से जुड़े रहस्यों की गुत्थी सुलझा सकती है

Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on world at LatestLY हिन्दी. पर्थ, 28 मई (द कन्वरसेशन) खगोलविद ‘तीव्र रेडियो प्रस्फोट’ (एफआरबी) के आकाशगंगा संबंधी वातावरण को बेहतर ढंग से समझने का प्रयास कर रहे हैं।

श्रीलंका के प्रधानमंत्री दिनेश गुणवर्धने

पर्थ, 28 मई (द कन्वरसेशन) खगोलविद ‘तीव्र रेडियो प्रस्फोट’ (एफआरबी) के आकाशगंगा संबंधी वातावरण को बेहतर ढंग से समझने का प्रयास कर रहे हैं।

एफआरबी, अज्ञात कारणों से उत्पन्न एक बहुत अधिक ऊर्जावान खगोल भौतिकीय परिघटना होती है, जिसमें बहुत-ही क्षणिक समय के लिए एक रेडियो संकेत प्रकट होता है। यह औसतन कुछ मिलीसैकंड के लिए ही जारी रहते हैं।

अब, एक ही आकाशगंगा में धीमी गति से चलने वाली, तारा बनाने वाली गैस का एक एफआरबी संबंधी अध्ययन ‘द एस्ट्रोफिजिकल जर्नल’ में प्रकाशित हुआ है।

यह एक ही आकाशगंगा का वर्णन करने वाले खगोल विज्ञान के दो पूरी तरह से अलग क्षेत्रों पर अब तक का चौथा प्रकाशन है।

इससे भी अधिक उल्लेखनीय तथ्य यह है कि एक ही दूरबीन ने इस खोज को संभव बनाया। ब्रह्मांड को बनाने वाले पदार्थों की जांच के जरिये ब्रह्मांड का अध्ययन करने के लिए एफआरबी बेहद उपयोगी हैं। यहां तक कि ब्रह्मांड का कितना विस्तार हो रहा है इसे मापने के लिए भी एफआरबी उपयोगी हैं।

हालांकि, एफआरबी की उत्पत्ति खगोलविदों के लिए एक पहेली बनी हुई है। कुछ एफआरबी दोहराने के लिए जाने जाते हैं, कभी-कभी एक हजार बार से भी ज्यादा, जबकि कई एफआरबी का केवल एक बार पता चल पाता है।

क्या इन दोहराए जाने वाले या नहीं दोहराए जाने वाले संकेतों की उत्पत्ति अलग-अलग तरीके से हुई हैं, वर्तमान में कई शोध समूहों द्वारा इसकी पड़ताल की जा रही है।

यह एफआरबी का अध्ययन करने को लेकर रोमांचक समय है, जैसा कि एक गुरुत्वाकर्षण तरंग और एक एफआरबी के बीच संबंध को हाल के अध्ययन द्वारा दिखाया गया है। इसका मतलब है कि एक ‘ब्लैक होल’ बनाने के लिए विलय करने वाले दो न्यूट्रॉन सितारे कम से कम कुछ एफआरबी का निर्माण कर सकते हैं।

हालांकि, यह तय करना मुश्किल है कि वास्तव में एफआरबी की उत्पत्ति कहां से होती है। ये बेहद चमकीले और क्षणिक होते हैं इसलिए कई रेडियो दूरबीनों के लिए एक सटीक स्थिति का पता लगाना कठिन है।

यह जाने बिना कि ये विस्फोट कहां से उत्पन्न होते हैं, हम उन आकाशगंगाओं का अध्ययन नहीं कर सकते जिनमें वे पाए जाते हैं। साथ ही जिस वातावरण में एफआरबी बनते हैं, उसे जाने बिना हम उनके रहस्यों को पूरी तरह से सुलझा नहीं सकते।

हालांकि, ऑस्ट्रेलिया में एक दूरबीन अब इन रहस्यों की गुत्थी सुलझाने में हमारे लिए मददगार साबित हो रही है।

राष्ट्रमंडल वैज्ञानिक एवं औद्योगिक अनुसंधान संगठन (सीएसआईआरओ) की ‘एएसकेएपी’ (ऑस्ट्रेलियन स्क्वायर किलोमीटर एर्रे पाथफाइंडर) रेडियो दूरबीन पश्चिमी ऑस्ट्रेलिया के मरुस्थल क्षेत्र में स्थित है जो एक विशेष उपकरण है।

एएसकेएपी ‘तीव्र रेडियो प्रस्फोट’ का पता लगाने के साथ ही इनकी मेजबान आकाशगंगाओं का भी पता लगाने में सक्षम है।

असल में एएसकेएपी एफआरबी की खोज उस समय पर भी कर सकता है, जब अन्य विज्ञान सर्वेक्षणों के लिए अवलोकन किए जाते हैं।

इस विशेष दूरबीन के जरिये एफआरबी के साथ-साथ इसके इर्दगिर्द की गैसों के बारे में भी पता लगाया जा सकता है।

एएसकेएपी अशांत गैस का पता लगाने में सक्षम है, जिससे हमें यह संकेत मिल सकता है कि हाल ही में एक आकाशगंगा विलय हुआ है, जो हमें आकाशगंगा के तारे के निर्माण के इतिहास के बारे में बताता है। साथ ही यह हमें सुराग देता है कि एफआरबी किन कारणों से होता है।

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