देश की खबरें | धुआं-रहित तंबाकू पर कर लगाने से मिलेगा 40,000 करोड़ रुपये सालाना राजस्व: गैर सरकारी संगठन
Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. धुआं रहित तंबाकू क्षेत्र को नियमन के तहत लाने की केंद्र सरकार से अपील करते हुए एक गैर सरकारी संगठन ने सोमवार को कहा कि इन उत्पादों पर “उचित” कर लगाने से सालाना 40,000 करोड़ रुपये का अतिरिक्त राजस्व प्राप्त होगा।
गुवाहाटी, 24 अगस्त धुआं रहित तंबाकू क्षेत्र को नियमन के तहत लाने की केंद्र सरकार से अपील करते हुए एक गैर सरकारी संगठन ने सोमवार को कहा कि इन उत्पादों पर “उचित” कर लगाने से सालाना 40,000 करोड़ रुपये का अतिरिक्त राजस्व प्राप्त होगा।
गैर सरकारी संगठन ‘श्रम’ ने इससे पहले भी केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण और स्वास्थ्य मंत्री हर्ष वर्धन को इस क्षेत्र को नियमन के तहत लाने का आग्रह करते हुए पत्र लिखा था।
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संगठन ने एक वक्तव्य में कहा कि उसने दोनों केंद्रीय मंत्रियों से अनुरोध किया है कि “धुंआ रहित और अन्य गैर-वर्जीनिया तंबाकू के भारत में अंसगठित उत्पादन, वितरण और बिक्री को नियमन के तहत लाया जाए ताकि बड़े स्तर पर इसका उपभोग कम किया जा सके जिससे नागरिकों का स्वास्थ्य सुरक्षित रहे और इस क्षेत्र को कर प्रणाली के दायरे में लाया जा सके।”
धुआं रहित या गैर-वर्जीनिया तंबाकू का इस्तेमाल खैनी, हुक्का, गुटखा, किमाम, गुड़ाकू, जर्दा, पान मसाला, बीड़ी इत्यादि के उत्पादन में किया जाता है।
श्रम ने कहा कि चूँकि इन पदार्थों का सेवन करने के बाद इन्हें थूका जाता है इसलिए यह कोविड-19 के प्रसार में सहायक हैं।
संगठन की डॉ प्राणस्मिता कलिता ने कहा, “गैर वर्जीनिया तंबाकू पर उचित कर लगाने से सरकार को करीब 35,000 से 40,000 करोड़ रूपये का राजस्व प्राप्त हो सकता है।”
श्रम, डॉक्टरों और पेशेवरों का संगठन है।
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