जरुरी जानकारी | हर साल 12,000 फ्लैट पूरा कर आवंटित करने का लक्ष्यः रियल एस्टेट फंड
Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on Information at LatestLY हिन्दी. रियल्टी क्षेत्र के लिए 25,000 करोड़ रुपये के सरकार-समर्थित सहायता फंड का प्रबंधन करने वाली एसबीआईकैप वेंचर्स ने अगले तीन साल में स्थगित परियोजनाओं के सालाना 12,000 फ्लैट पूरा कर आवंटित करने का लक्ष्य बनाया है।
नयी दिल्ली, चार मार्च रियल्टी क्षेत्र के लिए 25,000 करोड़ रुपये के सरकार-समर्थित सहायता फंड का प्रबंधन करने वाली एसबीआईकैप वेंचर्स ने अगले तीन साल में स्थगित परियोजनाओं के सालाना 12,000 फ्लैट पूरा कर आवंटित करने का लक्ष्य बनाया है।
एसबीआईकैप वेंचर्स लिमिटेड के मुख्य निवेश अधिकारी (स्वामिह निवेश कोष) इरफान ए काजी ने शुक्रवार को उद्योग मंडल फिक्की के एक कार्यक्रम में यह घोषणा की। उन्होंने कहा कि इस निवेश कोष के तहत अगले तीन वर्षों में हर साल 12,000 फ्लैट का निर्माण पूरा कर खरीदारों को सौंपने का लक्ष्य रखा गया है।
सरकार ने नवंबर 2020 में रियल एस्टेट क्षेत्र में अटकी पड़ी आवासीय परियोजनाओं को पूरा करने में मदद देने के इरादे से 25,000 करोड़ रुपये के आकार का यह कोष गठित किया था। किफायती एवं मध्यम-आय वर्ग आवासीय परियोजनाओं की विशेष खिड़की (स्वामिह) नाम वाले इस निवेश कोष से देश भर में 1,500 से अधिक अटकी हुई आवासीय परियोजनाओं का काम पूरा करना है। इनमें 4.58 लाख आवासीय इकाइयों का निर्माण होना है।
काजी ने कहा कि इस कोष से 42 शहरों में अटकी हुई परियोजनाओं को मदद मुहैया कराई गई है। इनका काम पूरा होने से अगले तीन वर्षों में हर साल 12,000 आवासीय इकाइयों को सौंपने का लक्ष्य रखा गया है।
इन आवासीय परियोजनाओं का निर्माण बीच में ही रुक जाने से लाखों घर खरीदारों को बेहद मुश्किल हालात का सामना करना पड़ रहा है। इसकी वजह के बारे में पूछे जाने पर काजी ने कहा कि रियल एस्टेट कंपनियां, घर खरीदार और कर्ज देने वाली एजेंसियां इसके लिए समान रूप से जिम्मेदार हैं।
उन्होंने कहा, "पुराने दौर का आकलन करते समय कुछ कहना बहुत आसान है। गलतियां चारों तरफ रही हैं। इसका नतीजा यह हुआ कि रियल एस्टेट पूरी तरह धराशायी हो गया।"
काजी ने कहा कि स्वामिह फंड के तहत परियोजनाओें का काम पूरा करने के लिए वित्त मुहैया कराने के साथ ही यह पूरी रकम परियोजना में ही लगाने की बात सुनिश्चित की जा रही है। इसके अलावा परियोजना स्थलों पर खर्च हो जाने के बाद बिल भुगतान का ध्यान भी रखा जा रहा है।
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