देश की खबरें | तमिलनाडु: स्टालिन की विदेश यात्रा पर टिप्पणी को लेकर द्रमुक ने राज्यपाल आर एन रवि की आलोचना की

चेन्नई, सात जून तमिलनाडु में सत्तारूढ़ द्रमुक मुन्नेत्र कषगम (द्रमुक) ने बुधवार को राज्यपाल आर एन रवि की आलोचना करते हुए कहा कि दो जून को ओडिशा में रेल हादसा होने के बाद जब पूरा राष्ट्र स्तब्ध था, तब राज्यपाल आर एन रवि पर्यटन स्थल ऊटी में कुलपतियों की बैठक के जरिये राजनीति कर रहे थे।

द्रमुक के मुखपत्र ‘मुरासोली’ में कहा गया कि कुछ दिन पहले रेल हादसे में जान गंवाने वाले यात्रियों की संख्या बढ़ने से पूरा राष्ट्र चिंतित था।

द्रमुक के तमिल दैनिक में आरोप लगाया गया कि हालांकि, रवि को किसी चीज की चिंता नहीं थी और योजना के अनुसार वह तीन जून को ठंडे मौसम वाले (पर्यटन स्थल) ऊटी गए तथा कुलपतियों की बैठक कर राजनीति की।

इसमें कहा गया कि रवि ने यह घोषणा की थी कि कुलपतियों के साथ बैठक में वह केंद्र की नयी शिक्षा नीति पर चर्चा करेंगे। द्रमुक के मुखपत्र में कहा गया, ‘‘लेकिन रवि ने निवेश आकर्षित करने के बारे में बोलकर अपनी अपरिपवक्ता का परिचय दिया क्योंकि विश्वविद्यालयों का नेतृत्व करने वालों से इसका कोई लेना-देना नहीं था।’’

द्रमुक के मुखपत्र में रवि की टिप्पणी की निंदा करने के लिए ‘‘अपरिपक्व’’ शब्द का इस्तेमाल किया गया।

राज्यपाल ने कथित तौर पर यह टिप्पणी की थी कि निवेशक महज इसलिए नहीं आएंगे कि उन्हें ऐसा करने के लिए कहा गया है। इसे मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन पर एक परोक्ष हमले के तौर पर देखा गया, जो निवेशकों को आकर्षित करने के लिए हाल में सिंगापुर और जापान की यात्रा पर गए थे।

निवेश आकर्षित करने के लिए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा की जाने वाली विदेश यात्राओं का जिक्र करते हुए मुखपत्र में कहा गया कि उसका यह विचार है कि रवि को इस बारे में खबरें पढ़नी चाहिए थी।

मुरासोली में दावा किया गया कि रवि चेन्नई और ऊटी, दोनों स्थानों पर स्थित राजभवन में जीवन का आनंद ले रहे हैं। इसने तमिल के एक मुहावरे का इस्तेमाल करते हुए आरोप लगाया कि रवि केवल कुछ नहीं करने के लिए कुछ नहीं करते, बल्कि दूसरों--कुलपतियों--को भी अपना काम करने से रोकते हैं।

वहीं, भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की प्रदेश इकाई के प्रमुख नारायण तिरूपति ने रवि के खिलाफ ‘‘अशिष्ट’’ का इस्तेमाल करने को लेकर मुरासोली की निंदा की। उन्होंने कहा कि इस आलेख ने द्रमुक और पार्टी नीत शासन, दोनों का दर्जा घटाया है।

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