देश की खबरें | तमिलनाडु ने बिजली संकट के लिये केंद्र को जिम्मेदार बताया, अन्नाद्रमुक ने विधानसभा से किया बहिर्गमन

Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. तमिलनाडु में बिजली कटौती को लेकर शुक्रवार को विपक्षी अन्नाद्रमुक ने विधानसभा में सत्तारूढ़ द्रमुक पर निशाना साधा जबकि राज्य सरकार ने केंद्र द्वारा अपर्याप्त कोयले की आपूर्ति और केंद्रीय पूल से बिजली आपूर्ति में अचानक रुकावट को इसके लिये जिम्मेदार बताया। सत्तारूढ़ दल ने विपक्षी दल पर बिजली संकट के लिये गलतबयानी करने का आरोप लगाया।

चेन्नई, 22 अप्रैल तमिलनाडु में बिजली कटौती को लेकर शुक्रवार को विपक्षी अन्नाद्रमुक ने विधानसभा में सत्तारूढ़ द्रमुक पर निशाना साधा जबकि राज्य सरकार ने केंद्र द्वारा अपर्याप्त कोयले की आपूर्ति और केंद्रीय पूल से बिजली आपूर्ति में अचानक रुकावट को इसके लिये जिम्मेदार बताया। सत्तारूढ़ दल ने विपक्षी दल पर बिजली संकट के लिये गलतबयानी करने का आरोप लगाया।

इस बीच मुख्यमंत्री एम. के. स्टालिन ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से पारादीप और विशाखापत्तनम बंदरगाहों के साथ ईंधन आपूर्ति समझौते के अनुसार प्रति दिन 72,000 मीट्रिक टन कोयले की आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए केंद्रीय कोयला मंत्रालय को निर्देश देने का आग्रह किया।

स्टालिन ने मोदी को लिखे एक पत्र में कहा, ‘‘केवल यह कदम हमें राज्य में निर्बाध बिजली आपूर्ति बनाए रखने में सक्षम बना सकता है और इसलिए मैं इस संबंध में आपके व्यक्तिगत हस्तक्षेप की मांग करता हूं।’’

सदन में विशेष ध्यानाकर्षण प्रस्ताव के जरिए बिजली की कमी का मुद्दा उठाते हुए विपक्ष के नेता के. पलानीस्वामी ने कहा कि अन्नाद्रमुक के शासन के दौरान 17,120 मेगावाट बिजली उपलब्ध कराई गई थी ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि बिजली की कटौती नहीं हो। उन्हेांने कहा कि गर्मी के मौसम में बिजली की खपत में वृद्धि को ध्यान में रखते हुए, सरकार को इसी के अनुरूप बिजली उत्पादन में तेजी लानी चाहिए थी।

उन्होंने कहा कि हालांकि, सरकार ने चालू सीजन में बिजली संयंत्रों के लिए आवश्यक कोयले का भंडारण नहीं किया।

ऑल इंडिया अन्ना द्रविड़ मुनेत्र कषगम (अन्नाद्रमुक) नेता ने कहा कि बिजली मंत्री वी सेंथिलबालाजी ने पहले कहा था कि गर्मी के मौसम के लिए आवश्यक कोयला उपलब्ध है। हालांकि, बिजली कटौती हो रही है और खबरों में कहा गया है कि यह कोयले की कमी के कारण है।

उन्होंने कहा कि विल्लुपुरम, कुड्डलोर और तिरुवन्नामलाई सहित कई जिलों में बिजली कटौती के मद्देनजर कृषि गतिविधियां, उद्योग और छात्र प्रभावित हुए और लोग रात में ठीक से सो नहीं सके।

सेंथिलबालाजी ने विपक्षी अन्नाद्रमुक पर इस मामले में गलतबयानी करने का आरोप लगाया। उन्होंने बताया कि सिर्फ 41 जगहों पर 796 मेगावाट बिजली की कमी के कारण करीब आधे घंटे तक बिजली आपूर्ति बाधित हुयी। उन्होंने दावा किया कि विपक्षी अन्नाद्रमुक द्वारा ऐसा रूप देने की कोशिश की जा रही है जैसे उनके शासन के दौरान बिजली कटौती हुयी ही नहीं थी।

उन्होंने 2017 से 2021 तक अन्नाद्रमुक शासन के दौरान बिजली संकट के 68 उदाहरणों का हवाला दिया। हालांकि, मई 2021 में मुख्यमंत्री स्टालिन के पदभार ग्रहण करने के बाद केवल एक बार व्यवधान देखा गया क्योंकि केंद्रीय पूल से आपूर्ति अचानक बाधित हो गई थी ।

उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री द्वारा इस मुद्दे के समाधान के लिए युद्धस्तर पर कार्रवाई की गई। उन्होंने कहा कि तमिलनाडु को पांच साल के भीतर बिजली की अधिकता वाला राज्य बनाने के लिए उन्होंने सभी कदम उठाए हैं। उन्होंने कहा कि हालांकि राज्य को पर्याप्त कोयला उपलब्ध नहीं है, फिर भी कोई बिजली कटौती नहीं होगी।

पलानीस्वामी ने कहा कि सेंथिलबालाजी ने पहले कोयले की उपलब्धता का आश्वासन देते हुये कहा कि बिजली कटौती नहीं होगी। मंत्री के जवाब को संतोषजनक नहीं बताते हुए, विपक्ष के नेता ने अपनी पार्टी के विधायकों के साथ सदन से बहिर्गमन किया।

मंत्री ने कहा कि जब मुख्यमंत्री ने कार्यभार संभाला था तब राज्य संचालित बिजली निगम (तमिलनाडु जेनरेशन एंड डिस्ट्रीब्यूशन कॉरपोरेशन) पर कर्ज का बोझ 1,60,000 करोड़ रुपये था और सरकार द्वारा सुधार शुरू किए गए हैं तथा केंद्र से कोयले की पर्याप्त आपूर्ति सुनिश्चित करने का आग्रह किया जा रहा है। चेन्नई को छोड़कर बुधवार और बृहस्पतिवार को राज्य के कई स्थानों पर बिजली कटौती देखी गई।

स्टालिन ने मोदी से तत्काल सहायता की मांग करते हुए कहा कि ओडिशा में तालचर खदानों से पर्याप्त कोयले का प्रावधान तमिलनाडु में बिजली इकाइयों के लिए महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा, ‘‘इस संबंध में, तमिलनाडु की इकाइयों के लिए कोयले की वर्तमान दैनिक प्राप्ति केवल 50,000 मीट्रिक टन है, जबकि आवश्यकता 72,000 मीट्रिक टन है।’’

मुख्यमंत्री ने कहा कि भले ही गर्मी में बिजली की बढ़ती मांग को पूरा करने के लिए कोयले का उत्पादन पर्याप्त है, लेकिन रेलवे द्वारा रेक की कम आपूर्ति के कारण इसे बंदरगाहों तक नहीं पहुंचाया जा रहा है।

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