देश की खबरें | तालिबान को वैधता हासिल करने के लिये आतंकवाद और संबंधित मुद्दों से निपटना होगा: रूस
Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. रूस ने बुधवार को कहा कि अफगानिस्तान में तालिबान एक ''वर्तमान वास्तविकता'' है और उसे वैधता हासिल करने के लिए आतंकवाद और अन्य संबंधित मुद्दों की समस्या से निपटना होगा। रूस ने कहा कि अफगानिस्तान में जो स्थिति पैदा हो रही है, उसका कोई सैन्य समाधान नहीं है।
नयी दिल्ली, 14 जुलाई रूस ने बुधवार को कहा कि अफगानिस्तान में तालिबान एक ''वर्तमान वास्तविकता'' है और उसे वैधता हासिल करने के लिए आतंकवाद और अन्य संबंधित मुद्दों की समस्या से निपटना होगा। रूस ने कहा कि अफगानिस्तान में जो स्थिति पैदा हो रही है, उसका कोई सैन्य समाधान नहीं है।
रूसी मिशन के उप प्रमुख रोमन बाबुश्किन ने राजदूत निकोलाए कुदाशेव के साथ एक संयुक्त मीडिया ब्रीफिंग में यह भी कहा कि भारत की अफगानिस्तान में बहुत अधिक रुचि है और यह नयी दिल्ली को संघर्ष-ग्रस्त देश में अपनी भागीदारी की सीमा तय करनी है।
कुदाशेव ने कहा कि भारत और रूस दोनों ही संबंधित पक्षों की प्रतिबद्धताओं पर आधारित अंतर-अफगान वार्ता का समर्थन करते हैं ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि भविष्य की अफगान सरकार समावेशी हो।
उन्होंने कहा, ''अफगानिस्तान को स्वतंत्र, संप्रभु, एकजुट और लोकतांत्रिक बनाने में देश बनाने में अफगानियों का समर्थन करना बेहद महत्वपूर्ण है। पश्चिमी देशों के सैनिकों की तेजी से वापसी शुरू होने के बाद, क्षेत्रीय प्रयास और भी महत्वपूर्ण होते जा रहे हैं।''
बाबुश्किन ने कहा कि अफगानिस्तान एक महत्वपूर्ण दौर से गुजर रहा है और इसका कोई सैन्य समाधान नहीं हो सकता है।
उन्होंने कहा कि रूस और भारत दोनों अफगानिस्तान में वार्ता प्रक्रिया के लिए प्रतिबद्ध हैं और उस देश में पैदा हो रही स्थिति की सक्रियता से निगरानी कर रहे हैं।
उन्होंने कहा, ''तालिबान वर्तमान में अफगानिस्तान में एक वास्तविकता है। यह अंतर-अफगान वार्ता में एक पार्टी है । हमें लगता है कि उसे सामान्यीकरण और एक ऐसी समावेशी सरकार की स्थापना के लिए एक समाधान तलाशना चाहिये, जिसमें सभी प्रमुख जातीय समूह शामिल हों।''
तालिबान की आतंकवादी गतिविधियों के बारे में पूछे जाने पर बाबुश्किन ने कहा कि इस मुद्दे पर रूस की स्थिति कभी नहीं बदली है। उन्होंने संकेत दिया कि मॉस्को और नयी दिल्ली दोनों का इस पर स्पष्ट दृष्टिकोण है।
उन्होंने कहा, ''हम अफगानिस्तान में आतंकवाद के खतरे से निपटने के लिए पूरी तरह से प्रतिबद्ध हैं। हालांकि, तालिबान और अल-कायदा दोनों ऐसे संगठन हैं, जिन्हें अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आतंकवादी संगठन करार दिया गया है और वे रूस में भी प्रतिबंधित हैं। जब अंतरराष्ट्रीय आतंकवाद की बात आती है, तो रूसी स्थिति सुसंगत होती है।''
भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल द्वारा पाकिस्तान स्थित आतंकवादी समूहों के खिलाफ शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) में एक कार्य योजना तैयार किये जाने के बारे में पूछे जाने पर, बाबुश्किन ने कहा कि एससीओ आम सहमति के सिद्धांत के तहत कार्य करता है। हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि अंतरराष्ट्रीय आतंकवाद से निपटने में रूस और भारत दोनों की समान स्थिति है।
पिछले महीने एससीओ की बैठक में संबोधन के दौरान डोभाल ने पाकिस्तान स्थित आतंकवादी समूहों लश्कर-ए-तैयबा और जैश-ए-मोहम्मद से निपटने के लिए एससीओ द्वारा एक ''कार्य योजना'' तैयार करने का आह्वान किया था।
अफगानिस्तान में बढ़ती हिंसा का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि राजनीतिक प्रक्रिया के बिना सैन्य गतिविधियां चिंताजनक हैं।
यह पूछे जाने पर कि क्या भारत और रूस अफगानिस्तान में रूसी मूल के सैन्य हेलीकॉप्टरों की मरम्मत सहित अफगान सुरक्षा बलों को मजबूत करने के लिए संयुक्त रूप से सहायता प्रदान करने पर विचार करेंगे तो उन्होंने स्पष्ट जवाब तो नहीं दिया लेकिन इस तरह के समर्थन से इंकार भी नहीं किया।
रूसी राजनयिक ने कहा कि भारत अफगानिस्तान को लेकर सक्रिय क्षेत्रीय कूटनीति में शामिल रहा है और यह ''बहुत उत्साहजनक'' है।
(यह सिंडिकेटेड न्यूज़ फीड से अनएडिटेड और ऑटो-जेनरेटेड स्टोरी है, ऐसी संभावना है कि लेटेस्टली स्टाफ द्वारा इसमें कोई बदलाव या एडिट नहीं किया गया है)