नयी दिल्ली, 14 दिसंबर ऑस्ट्रेलिया के सिडनी में आईटी पेशे से छुट्टी लेकर अक्टूबर में कुछ निजी काम से भारत आए भावजीत सिंह की लंबे समय तक यहां रहने की कोई योजना नहीं थी, लेकिन दिसंबर में भी वह यहीं हैं और किसान आंदोलन के खिलाफ सोशल मीडिया पर चल रही फर्जी खबरों का ट्विटर पर मुकाबला कर रहे हैं।
सिंह मूल रूप से पंजाब के लुधियाना के निवासी हैं।
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वह ट्विटर हैंडल - ट्रैक्टर2ट्विटर- के जरिये अभियान चला रहे हैं और 28 नवंबर से अब तक पूरी दुनिया के 25 लाख लोग इसे देख चुके हैं।
उन्होंने कहा, ‘‘मैं निजी काम से अक्टूबर के आखिर में भारत आया था लेकिन यह (किसान आंदोलन) शुरू हो गया और मैं यहीं रूक गया।’’
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सिंह ने कहा कि उनका इरादा प्रदर्शन को लेकर सही सूचना प्रसारित करना है क्योंकि बहुत से लोग किसान आंदोलन को बदनाम करने के लिए अभियान चला रहे हैं।
सिंह के मित्र और स्वयंसेवक जसप्रीत सिंह ने कहा, ‘‘पैसे के बदले और किसी खास हित से प्रेरित यूजर्स ने ट्विटर के मंच का अतिक्रमण किया है। हमारा अभियान इसका मुकाबला करने के लिए है।’’
जसप्रीत ने कहा, ‘‘किसान ट्विटर का इस्तेमाल करना नहीं जानते हैं। हम उन्हें इससे जोड़ना चाहते हैं। हमारे पास आईटी सेल नहीं है और सभी ट्वीट ‘वास्तविक’ हैं।’’
भावजीत सिंह ने कहा कि जब अंतरराष्ट्रीय मीडिया यह जानना चाहती है कि भारत में क्या हो रहा है तो वह फेसबुक या व्हाट्सएप पर नहीं जाती बल्कि ट्विटर पर जाकर देखती है कि क्या ट्रेंड कर रहा है।
उन्होंने कहा, ‘‘जब किसान विरोधी अभियान चरम पर था, तब हमने सोचा कि यह किसानों के ट्रैक्टर से ट्विटर पर जाने का सही समय है और इस तरह ‘ट्रैक्टर2ट्विटर’ का विचार आया।’’
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