देश की खबरें | उच्चतम न्यायालय ने महाराष्ट्र कानून की वैधता को बरकरार रखा, कहा:फर्म के खिलाफ कुर्की वैध
Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. उच्चतम न्यायालय ने जमा के रूप में जनता से धन हड़पने वाले वित्तीय प्रतिष्ठानों के बढ़ते खतरे से जनता की रक्षा के लिए बनाए गए महाराष्ट्र जमाकर्ताओं के हितों का संरक्षण (वित्तीय प्रतिष्ठानों में) अधिनियम (एमपीआईडी), 1999 की संवैधानिक वैधता को शुक्रवार को बरकरार रखा।
नयी दिल्ली, 22 अप्रैल उच्चतम न्यायालय ने जमा के रूप में जनता से धन हड़पने वाले वित्तीय प्रतिष्ठानों के बढ़ते खतरे से जनता की रक्षा के लिए बनाए गए महाराष्ट्र जमाकर्ताओं के हितों का संरक्षण (वित्तीय प्रतिष्ठानों में) अधिनियम (एमपीआईडी), 1999 की संवैधानिक वैधता को शुक्रवार को बरकरार रखा।
न्यायमूर्ति डी. वाई. चंद्रचूड़, न्यायमूर्ति सूर्य कांत और न्यायमूर्ति बेला एम. त्रिवेदी की पीठ ने महाराष्ट्र सरकार द्वारा अधिनियम के तहत ‘63 मून्स टेक्नोलॉजीज लिमिटेड’ की संपत्तियों को कुर्क करने के लिए जारी अधिसूचना को भी बरकरार रखा। इस कंपनी में नेशनल स्पॉट एक्सचेंज लिमिटेड (एनएसईएल) की 99.99 प्रतिशत हिस्सेदारी है।
पीठ ने बम्बई उच्च न्यायालय के 22 अगस्त, 2019 के आदेश को रद्द कर दिया, जिसमें ‘63 मून्स टेक्नोलॉजीज लिमिटेड’ की संपत्तियों को कुर्क करने की अधिसूचना को रद्द कर दिया गया था।
उच्च न्यायालय के फैसले के खिलाफ महाराष्ट्र सरकार द्वारा दायर अपील पर शीर्ष अदालत ने फैसला सुनाया।
पीठ ने कहा, ‘‘इस फैसले में दर्ज कारणों के लिए, हम अपील की अनुमति देते हैं और 22 अगस्त, 2019 के बम्बई उच्च न्यायालय के फैसले को रद्द करते हैं। प्रतिवादी की संपत्तियों को कुर्क करने वाली अधिनियम की धारा चार के तहत जारी की गई अधिसूचनाएं वैध हैं।’’
पीठ ने कहा कि अधिनियम की वैधता को विशेष रूप से 2012 में इस न्यायालय के दो निर्णयों के जरिये देखा गया और इस न्यायालय ने के. के. भास्करन बनाम राज्य के अपने 2011 के फैसले में पहले के फैसले के मद्देनजर एमपीआईडी अधिनियम की संवैधानिक वैधता को बरकरार रखा था।
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