जरुरी जानकारी | चीनी कारखानों को बड़े जैव-ऊर्जा केन्द्रों में बदलने की जरूरत: खाद्य सचिव

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नयी दिल्ली, 24 अगस्त खाद्य सचिव सुधांशु पांडे ने सोमवार को इस बात पर जोर दिया कि आत्म निर्भर बनने के लिये चीनी कारखानों को जैव-ऊर्जा और मूल्य वर्धित उत्पादों का बड़ा केन्द्र बनाने की जरूरत है।

उन्होंने चीनी मिलों के कामकाज में लचीलापन लाये जाने की जरूरत पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि ऐसी चीनी मिलें होनी चाहिये जिनमें की बाजार और अर्थव्यवस्था की जरूरत के मुताबिक चीनी और एथनॉल का उत्पादन किया जा सके।

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सुधांशु पांडे कानपुर स्थित राष्ट्रीय चीनी संस्थान द्वारा आयोजित पांच दिन के आनलाइन कार्यकारी विकास कार्यक्रम के उद्घाटन समारोह में बोल रहे थे। चीनी उद्योग के देश- विदेश से करीब 100 वरिष्ठ कार्यकारी अधिकारी इस कार्यक्रम से जुड़े थे।

एक सरकारी विज्ञप्ति में सचिव के हवाले से कहा गया, ‘‘उन्होंने आत्मनिर्भर भारत बनने के लिये चीनी कारखानों को चीनी में विशिष्टता के साथ ही जैव- ऊर्जा और दूसरे मूल्य वर्धित उत्पादों को तैयार करने वाले बड़े केन्द्रों के रूप में परिवर्तित करने पर जोर दिया। ’’

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खाद्य मंत्रालय में संयुक्त सिचव सुबोध कुमार सिंह ने इस मौके पर कहा कि चीनी उद्योग को चीनी उत्पादन और मांग परिदृश्य के बीच संतुलन स्थापित करने के लिये एथनॉल उत्पादन पर ध्यान देना चाहिये और इसके लिये गन्ने के रस, सिरप और बी- भारी सीरे का इस्तेमाल करते हुये एथनॉल की उपलब्धता बढ़ानी चाहिये।

उन्होंने कहा, ‘‘10 प्रतिशत एथनॉल मिश्रण के लक्ष्य के समक्ष हम अभी भी पांच प्रतिशत एथनॉल ही पेट्रोल में मिला पा रहे हैं। जैसे जैसे एथनॉल के बाजार में सुनिश्चितता कायम होगी इसका उत्पादन बढ़ने से चीनी मिलों को अपनी वित्तीय स्थिति बेहतर करने में मदद मिलेगी।’’

राष्ट्रीय चीनी संस्थान के निदेशक नरेन्द्र मोहन ने सुझाव दिया कि देश में चीनी अधिशेष की स्थिति और कोविड- 19 के प्रभाव को देखते हुये चीनी क्षेत्र के कार्यकारियों को ‘‘फिर से गौर करो, और बेहतर करो और पुन: सृजन’’ के मंत्र पर गौर करने की जरूरत है ताकि मौजूदा परिवेश में सबसे बेहतर व्यवसाय नमूना तैयार किया जा सके।

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