देश की खबरें | कानून में बाद में बदलाव पूर्व के आदेश को वापस लेने का आधार नहीं हो सकते-न्यायालय

Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. उच्चतम न्यायालय ने प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के निदेशक के कार्यकाल पर आठ सितंबर 2021 को जारी उसके निर्देश को वापस लेने के लिए केंद्र की अर्जी पर सोमवार को सवाल करते हुए कहा, ‘‘कानून में बाद में बदलाव न्यायालय के पूर्व के आदेश को वापस लेने या उसमें संशोधन करने का आधार नहीं हो सकते।’’

नयी दिल्ली, 30 जनवरी उच्चतम न्यायालय ने प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के निदेशक के कार्यकाल पर आठ सितंबर 2021 को जारी उसके निर्देश को वापस लेने के लिए केंद्र की अर्जी पर सोमवार को सवाल करते हुए कहा, ‘‘कानून में बाद में बदलाव न्यायालय के पूर्व के आदेश को वापस लेने या उसमें संशोधन करने का आधार नहीं हो सकते।’’

न्यायमूर्ति बी आर गवई और न्यायमूर्ति विक्रम नाथ की पीठ को केंद्र की ओर से न्यायालय में पेश हुए सॉलिसीटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि उन्होंने आदेश में संशोधन के लिए एक अर्जी दी थी।

मेहता ने कहा, ‘‘मैं गुण-दोष पर बात नहीं कर रहा हूं। मैं सिर्फ यह कहना चाहता हूं कि अब तक याचिकाकर्ता ने इस न्यायालय के आठ सितंबर 2021 के आदेश पर भरोसा जताया है, हम उक्त आदेश में संशोधन के लिए एक अर्जी पहले ही दायर कर चुके हैं।’’

उन्होंने पीठ से अपनी अर्जी को उन याचिकाओं के साथ संलग्न करने का अनुरोध किया, जिनमें ईडी निदेशक संजय कुमार मिश्रा का कार्यकाल बढ़ाने को चुनौती दी गई है।

पीठ ने मेहता से कहा, ‘‘हमने पहले ही संकेत दे दिया है कि हम इस तरह की अर्जी पर विचार नहीं करेंगे।’’

सॉलिसीटर जनरल ने कहा कि कई परवर्ती विधायी बदलाव हुए हैं, इसलिए अर्जी दायर की गई।

पीठ ने कहा, ‘‘कानून में बाद में किये जाने वाले बदलाव इस न्यायालय के पूर्व के फैसले या आदेश को वापस लेने या उसमें संशोधन करने का आधार नहीं हो सकते।’’

सुनवाई की शुरूआत में मेहता ने कहा कि कांग्रेस नेता जया ठाकुर द्वारा दायर याचिका में, मिश्रा का कार्यकाल तीसरी बार बढ़ाये जाने के केंद्र के फैसले और केंद्रीय सतर्कता आयोग (सीवीसी) अधिनियम में किये गये उन संशोधनों पर सवाल उठाये गये हैं, जो ईडी निदेशक का कार्यकाल पांच साल तक बढ़ाने की अनुमति देते हैं।

मेहता ने कहा कि जवाब दाखिल करने के लिए उन्हें कुछ वक्त चाहिए।

इसपर, पीठ ने कहा कि याचिका पर सुनवाई केंद्र की अर्जी के साथ की जाएगी और विषय को तीन हफ्ते बाद के लिए सूचीबद्ध कर दिया।

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