देश की खबरें | चोरी हुईं भगवान राम, लक्ष्मण और सीता की प्रतिमाएं ब्रिटेन में मिलीं, तमिलनाडु को लौटाई गईं

Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. केंद्रीय संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री प्रहलाद पटेल ने बुधवार को 13वीं सदी में बनी भगवान राम, लक्ष्मण और सीता की कांस्य प्रतिमाएं यहां भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण मुख्यालय में तमिलनाडु को लौटाईं जो करीब 20 साल पहले चोरी हो गई थीं।

एनडीआरएफ/प्रतीकात्मक तस्वीर (Photo Credits: ANI)

नयी दिल्ली, 18 नवंबर केंद्रीय संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री प्रहलाद पटेल ने बुधवार को 13वीं सदी में बनी भगवान राम, लक्ष्मण और सीता की कांस्य प्रतिमाएं यहां भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण मुख्यालय में तमिलनाडु को लौटाईं जो करीब 20 साल पहले चोरी हो गई थीं।

उल्लेखनीय है कि लंदन मेट्रोपॉलिटन पुलिस ने इन प्रतिमाओं को बरामद करने के बाद गत 15 सितंबर को भारतीय उच्चायोग को लौटाया था। पटेल इस कार्यक्रम में बतौर मुख्य अतिथि वीडियो कॉन्फ्रेंस के जरिए मौजूद रहे थे।

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पटेल ने बुधवार को भारतीय उच्चायोग को बधाई दी और लंदन मेट्रोपॉलिटन पुलिस का भी आभार व्यक्त किया तथा साथ ही इन प्रतिमाओं को बरामद करने के लिए किए गए उत्कृष्ट कार्य के वास्ते तमिलनाडु सरकार के प्रतिमा प्रकोष्ठ की भी प्रशंसा की।

उन्होंने देश की सांस्कृतिक विरासत को वापस लाने में भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) द्वारा निभाई गई सकारात्मक भूमिका, खासतौर पर गत छह साल में निभाई गई भूमिका की प्रशंसा की।

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पिछले साल अगस्त में लंदन स्थित भारतीय उच्चायोग को कला प्रेमियों के समूह ‘इंडिया प्राइड प्रोजेक्ट’ ने सूचना दी थी कि तमिलनाडु के मंदिर से विजयनगरम काल की चार प्राचीन प्रतिमाओं (भगवान राम, देवी सीता, लक्ष्मण और हनुमान) की चोरी हुई थी और भारत से बाहर इनकी तस्करी की गई तथा ये संभवत: ब्रिटेन पहुंचाई गईं।

पटेल ने कहा, ‘‘वर्ष 1976 से अब तक हमने विभिन्न देशों से 53 कलाकृतियां बरामद की हैं जिनमें से 40 से अधिक वर्ष 2014 के बाद वापस लाई गईं। ये कलाकृतियां हमारी थीं, इसके बावजूद हमें लंबी कानूनी प्रक्रिया से गुजरना पड़ा। जिन राज्यों को ये कलाकृतियां लौटाई गई हैं, उनकी जिम्मेदारी है कि ऐसी घटनाएं दोबारा न हों। कलाकृतियों की सुरक्षा और संरक्षा जरूरी है।’’

उन्होंने कहा कि सौभाग्य से तमिलनाडु के नागपत्तनम जिले के आनंदमंगलन स्थित श्री राजगोपाल विष्णु मंदिर में स्थापित इन मूर्तियों की तस्वीर 1958 में ली गई थी और दस्तावेजीकरण किया गया था जिससे इनकी पहचान हुई।

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