देश की खबरें | लिट्टे को पुन: मजबूत करने के लिए पाक से हथियारों की तस्करी करने के मामले में श्रीलंकाई गिरफ्तार
Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. राष्ट्रीय अन्वेषण अभिकरण (एनआईए) ने पाकिस्तान से श्रीलंका में हथियारों की तस्करी करने और इससे होने वाली आय का इस्तेमाल द्वीप देश में लिबरेशन टाइगर्स ऑफ तमिल ईलम (लिट्टे) को फिर से मजबूत बनाने के लिए करने में कथित संलिप्तता को लेकर एक श्रीलंकाई नागरिक को गिरफ्तार किया है, जो तमिल अलगाववादी समूह की खुफिया शाखा का पूर्व सदस्य है।
तिरुवनंतपुरम, छह अक्टूबर राष्ट्रीय अन्वेषण अभिकरण (एनआईए) ने पाकिस्तान से श्रीलंका में हथियारों की तस्करी करने और इससे होने वाली आय का इस्तेमाल द्वीप देश में लिबरेशन टाइगर्स ऑफ तमिल ईलम (लिट्टे) को फिर से मजबूत बनाने के लिए करने में कथित संलिप्तता को लेकर एक श्रीलंकाई नागरिक को गिरफ्तार किया है, जो तमिल अलगाववादी समूह की खुफिया शाखा का पूर्व सदस्य है।
एनआईए के एक अधिकारी ने बुधवार को बताया कि एनआईए ने लिट्टे की खुफिया शाखा के एक पूर्व सदस्य एवं श्रीलंकाई नागरिक सतकुनम उर्फ साबेसन (47) को मंगलवार को गिरफ्तार किया।
अधिकारी ने बताया कि साबेसन इस समय तमिलनाडु में चेन्नई के वलसरवक्कम में रहता है। पाकिस्तान से श्रीलंका में हथियारों एवं नशीले पदार्थों की तस्करी करने में शामिल होने और इस तस्करी से होने वाली आमदनी का इस्तेमाल लिट्टे को पुन: मजबूत बनाने के लिए करने के आरोप में उसे गिरफ्तार किया गया है।
उन्होंने बताया कि स्वापक नियंत्रण ब्यूरो ने शिकायत दर्ज कराई थी कि मार्च में भारतीय तटरक्षक ने मछलियां पकड़ने की नौका रविहंसी को रोककर मिनिकॉय तट के पास 300 किलोग्राम हेरोइन, पांच एके 47 राइफल और गोला-बारूद बरामद किया था। इसी शिकायत के आधार पर एनआईए ने शस्त्र कानून की धाराओं के तहत मई में छह श्रीलंकाई नागरिकों को गिरफ्तार किया था।
एनआईए अधिकारी ने बताया कि साबेसन ने साजिश रचने के लिए भारत में लिट्टे के प्रति सहानुभूति रखने वालों की बैठकों की व्यवस्था की थी और लिट्टे को फिर से मजबूत करने के लिए मादक पदार्थों की तस्करी से होने वाली आय श्रीलंका में लिट्टे के पूर्व काडरों को भेजने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। इस मामले में आगे की जांच जारी है।
लिट्टे ने श्रीलंका के उत्तरी एवं पूर्वी प्रांतों में स्वतंत्र तमिल राष्ट्र की मांग को लेकर करीब 30 साल तक एक सैन्य मुहिम चलाई थी। श्रीलंकाई सेना ने इसके नेता वी प्रभाकरन को मार दिया था, जिसके बाद 2009 में यह मुहिम समाप्त हो गई थी।
(यह सिंडिकेटेड न्यूज़ फीड से अनएडिटेड और ऑटो-जेनरेटेड स्टोरी है, ऐसी संभावना है कि लेटेस्टली स्टाफ द्वारा इसमें कोई बदलाव या एडिट नहीं किया गया है)