जयपुर, सात मार्च नगरीय विकास एवं आवासन मंत्री झाबर सिंह खर्रा ने शुक्रवार को विधानसभा में कहा कि नए सहकारिता अधिनियम में गृह निर्माण सहकारी समितियों पर अंकुश के लिए विशेष प्रावधान किये जाएंगे।
मंत्री शुक्रवार को प्रश्नकाल में इस संबंध में सदस्य द्वारा पूछे गये पूरक प्रश्नों का जवाब दे रहे थे
उन्होंने कहा कि राज्य सरकार द्वारा नया सहकारिता अधिनियम बनाया जाना प्रक्रियाधीन है। इस अधिनियम में गृह निर्माण सहकारी समितियों पर अंकुश के लिए विशेष प्रावधान किये जाएंगे ताकि निजी 'कॉलोनाइजरों' द्वारा की जाने वाली अनियमितताओं को रोका जा सके।
खर्रा ने कहा कि निजी क्षेत्र में विकसित की जाने वाली कॉलोनियां स्थानीय निकाय से अनुमोदन के बिना ही बना कर दी जाती हैं। इनमें आवश्यक सुविधाएं भी नहीं होती, जिसका नुकसान आमजन को उठाना पड़ता है।
उन्होंने आश्वस्त किया कि नवीन सहकारिता अधिनियम में गृह निर्माण सहकारी समितियों द्वारा विकसित की जाने वाली कॉलोनियों में समस्त आवश्यक सुविधाएं विकसित किया जाना अनिवार्य होगा तथा नियमों का उल्लंघन करने पर कठोर कार्यवाही के प्रावधान होंगे।
उन्होंने कहा कि गृह निर्माण सहकारी समितियों का पंजीयन सहकारिता अधिनियम के अंतर्गत किया जाता है। वर्तमान में पंजीकृत गृह निर्माण सहकारी समितियों की अनियमितता पर कार्रवाई करने का विशेष प्रावधान नियमों में नहीं है।
विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी ने इस संबंध में हस्तक्षेप करते हुए कहा कि अवैध कॉलोनियों की समस्या पूरे राज्य की है। इनके लिए नियम और दिशा-निर्देश तय किये जाने चाहिये। साथ ही, आम जन को भी जागरूक किया जाना चाहिये।
इसके बाद खर्रा ने सदन को आश्वस्त करते हुए कहा कि राज्य सरकार द्वारा विकास प्राधिकरणों, नगरीय निकायों, नगर परिषदों, नगर पालिकाओं आदि के क्षेत्राधिकार में विकसित होने वाली कॉलोनियों में किसी भी प्रकार की अनियमितता न हो इसके लिए नए दिशा-निर्देश बनाए जाएंगे, ताकि जिम्मेदारों की जवाबदेही सुनिश्चित की जा सके।
साथ ही, कॉलोनाइजर द्वारा सुविधाएं विकसित करना भी आवश्यक किया जाएगा।
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