जरुरी जानकारी | एसएंडपी ने भारत के लिये स्थिर परिदृश्य के साथ ‘बीबीबी-’ रेटिंग की पुष्टि की
Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on Information at LatestLY हिन्दी. साख तय करने वाली एजेंसी एसएंडपी ग्लोबल रेटिंग्स ने बृहस्पतिवार को भारत के लिये स्थिर परिदृश्य के साथ ‘बीबीबी-’ रेटिंग की पुष्टि करते हुए कहा कि तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था और सशक्त बाह्य बहीखाते में इसकी ताकत निहित है।
नयी दिल्ली, 18 मई साख तय करने वाली एजेंसी एसएंडपी ग्लोबल रेटिंग्स ने बृहस्पतिवार को भारत के लिये स्थिर परिदृश्य के साथ ‘बीबीबी-’ रेटिंग की पुष्टि करते हुए कहा कि तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था और सशक्त बाह्य बहीखाते में इसकी ताकत निहित है।
हालांकि, रेटिंग एजेंसी ने राजकोषीय मोर्चे पर कमजोर प्रदर्शन और प्रति व्यक्ति सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) के कम रहने को लेकर चिंता भी जताई है।
अमेरिकी रेटिंग एजेंसी ने बयान में कहा, ‘‘एसएंडपी ग्लोबल रेटिंग्स ने भारत के लिये ‘बीबीबी-’ दीर्घकालीन रेटिंग की पुष्टि की है। साथ ही अल्पकालिक विदेशी और स्थानीय मुद्रा को लेकर ‘ए-3’ रेटिंग की पुष्टि की है। दीर्घकालीन साख को लेकर परिदृश्य स्थिर है।’’
‘बीबीबी-’ निवेश स्तर की निम्नतम रेटिंग है। दीर्घकालीन रेटिंग के साथ स्थिर परिदृश्य यह बताता है कि देश की मजबूत अर्थव्यवस्था और राजस्व में अच्छी वृद्धि इसकी कमजोर राजकोषीय स्थिति को मजबूती देगी।
उसने कहा कि व्यापक वैश्विक मंदी के बीच भारतीय अर्थव्यवस्था की वास्तविक वृद्धि दर वर्ष 2023 में छह प्रतिशत रहने वाली है। निवेश और खपत की रफ्तार अगले तीन-चार वर्षों तक ठोस वृद्धि संभावनाओं को मजबूती देने का काम करेगी।
एसएंडपी दूसरी वैश्विक रेटिंग एजेंसी है जिसने वर्ष 2023 में भारत की रेटिंग एवं स्थिर परिदृश्य को बरकरार रखा है। पिछले हफ्ते फिच रेटिंग्स ने भी मजबूत आर्थिक वृद्धि तथा बाह्य स्तर पर वित्त के मामले में अच्छी स्थिति का हवाला देते हुए भारत के लिये स्थिर परिदृश्य के साथ ‘बीबीबी-’ रेटिंग की पुष्टि की थी।
रेटिंग एजेंसी ने कहा, ‘‘देश की गतिशील एवं तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था, मजबूत बाह्य बहीखाता और लोकतांत्रिक संस्थान नीतिगत अनुमान एवं सामंजस्य को समर्थन से रेटिंग को बल मिलता है। हालांकि, सरकार के कमजोर राजकोषीय प्रदर्शन और बढ़ते कर्ज बोझ के साथ प्रति व्यक्ति निम्न जीडीपी इस मजबूती को चुनौती भी दे रही है।’’
एजेंसी के मुताबिक, वित्त वर्ष 2023-24 में पूंजीगत व्यय बढ़ाने के केंद्र एवं कुछ राज्य सरकारों के कदम से निवेश एवं निर्माण गतिविधियों में तेजी आएगी। इसके अलावा भारत की मजबूत बाह्य स्थिति से भी इसकी साख को समर्थन मिलता है।
एसएंडपी ने अगले कुछ वर्षों में चालू खाते का घाटा (कैड) कम होने की संभावना जताते हुए कहा कि जिंसों के ऊंचे दाम इसके लिए बड़ा जोखिम बने हुए हैं।
एसएंडपी के मुताबिक, लोकसभा में स्पष्ट बहुमत होने से मौजूदा सरकार के आर्थिक सुधार प्रयासों को मजबूती मिलती है। हालांकि, अगले साल होने वाले आम चुनावों को देखते हुए अगले 12 महीनों में किसी बड़े नए सुधार को लागू किए जाने की संभावना बहुत कम है।
(यह सिंडिकेटेड न्यूज़ फीड से अनएडिटेड और ऑटो-जेनरेटेड स्टोरी है, ऐसी संभावना है कि लेटेस्टली स्टाफ द्वारा इसमें कोई बदलाव या एडिट नहीं किया गया है)