देश की खबरें | सेना में भर्ती होकर घाटी से आतंक का खात्मा करना चाहता है शहीद एएसआई का पुत्र

Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. लश्कर-ए-तैयबा के आतंकवादी हमले में रविवार को शहीद हुए जम्मू-कश्मीर पुलिस के सहायक उप निरीक्षक (एएसआई) बाबू राम के पुत्र ने 15 वर्ष की उम्र में ही अपने पिता को खो दिया।

एनडीआरएफ/प्रतीकात्मक तस्वीर (Photo Credits: ANI)

मेंढर, 31 अगस्त लश्कर-ए-तैयबा के आतंकवादी हमले में रविवार को शहीद हुए जम्मू-कश्मीर पुलिस के सहायक उप निरीक्षक (एएसआई) बाबू राम के पुत्र ने 15 वर्ष की उम्र में ही अपने पिता को खो दिया।

आतंकियों की गोली से जान गंवाने वाले बाबू राम का पुत्र माणिक अब सेना में शामिल होकर कश्मीर घाटी से आतंकवाद का खात्मा करने का इरादा रखता है।

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पंथा चौक क्षेत्र में रविवार को हुई मुठभेड़ में बाबू राम शहीद हो गए थे। मुठभेड़ में तीनों आतंकवादी भी मारे गए।

अधिकारियों के मुताबिक, ‘आतंकवादियों से लड़ते हुए शहीद हुए एएसआई बाबू राम ने जम्मू-कश्मीर पुलिस के विशेष अभियान समूह (एसओजी) में 18 साल सेवा दी। इस दौरान वह आतंकवाद रोधी कई अभियानों में अग्रिम मोर्चे पर रहे थे।

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अपने पिता की शहादत पर गर्व करते हुए माणिक ने कहा, '' फिलहाल सेना में भर्ती होने के लिए मैं काफी छोटा हूं लेकिन मैं अभी इसमें शामिल होना चाहता हूं और उनकी शहादत का बदला लेना चाहता हूं। मैं कश्मीर से आतंकवाद खत्म करने के वास्ते की गई सेवा के लिए अपने पिता को सलाम करता हूं। मुझे उन पर गर्व है। वह एक बहादुर अधिकारी थे।''

उसने कहा, '' मैं सेना में भर्ती होऊंगा और अपने पिता के पदचिन्हों पर चलूंगा। मैं कश्मीर से आतंकवाद का सफाया करने के लिए लडूंगा।''

एक पुलिस अधिकारी ने बताया कि पुंछ जिले के मेंढर के रहने वाले राम ने 30 जुलाई, 1999 में कांस्टेबल के तौर पर सेवा शुरू की थी और एसओजी को चुना था। उन्हें प्रशिक्षण के बाद 27 जुलाई, 2002 को एसओजी श्रीनगर में तैनात किया गया था।

पुलिस अधिकारी ने बताया कि बाबू राम कुछ समय पहले लाल चौक में नागरिकों को सुरक्षित रूप से निकालते समय आतंकियों से मुठभेड़ में घायल हो गये थे लेकिन स्वस्थ्य होने के बाद फिर सेवा में आ गये।

अधिकारी के मुताबिक श्रीनगर में विभिन्न आतंकवाद रोधी अभियानों में उनके उत्कृष्ट प्रदर्शन को देखते हुए उन्हें दो बार समय से पहले पदोन्नति दी गई थी।

बाबू राम के भाई गुलशन शर्मा भी पुलिसकर्मी हैं और उन्हें अपने भाई की शहादत पर गर्व है।

वह कहते हैं, ‘‘ मेरे भाई ने एक बार कहा था कि वह आतंकवादियों से लड़ते हुए अपने प्राण देंगे । मैं भी पुलिस में हूं और अपने भाई की तरह शहीद होना चाहता हूं ।’’

15 मई 1972 को मेंढर के धराणा गांव में पैदा हुए राम हमेशा से ही सशस्त्र बलों में भर्ती होना चाहते थे।

रविवार को मेंढर में उनके गृह कस्बे में पूरे सम्मान के साथ उनका अंतिम संस्कार किया गया।

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