देश की खबरें | समाजवाद ने देश को गरीब रखा, प्रधानमंत्री मोदी लाए क्रांतिकारी बदलाव : तमिलनाडु राज्यपाल

अहमदाबाद, चार अगस्त तमिलनाडु के राज्यपाल आर. एन. रवि ने शुक्रवार को कहा कि आजादी के बाद अर्थव्यवस्था के लिए समाजवादी मॉडल अपनाने की वजह से भारत को खामियाजा उठाना पड़ा, लेकिन प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में अब देश 'क्रांतिकारी बदलाव' का अनुभव कर रहा है।

भारतीय पुलिस सेवा के पूर्व अधिकारी यहां भारतीय उद्यमिता विकास संस्थान (ईडीआईआई) के दीक्षांत समारोह को संबोधित कर रहे थे।

रवि ने कहा, ''आप ऐसे वक्त में स्नातक (उत्तीर्ण) हुए हैं, जो ऐतिहासिक है। जब देश व्यापक क्रांतिकारी बदलाव के शिखर पर है। आज जो बदलाव हम देख रहे हैं वे 2014 में औजस्वी और दूरदर्शी नेता हमारे प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के आने के साथ शुरू हुए हैं।'' उन्होंने कहा कि ब्रिटिश शासन के अंतर्गत 200 वर्षों में भारत का उद्योग, कृषि और शिक्षा तंत्र ध्वस्त हो गया था।

रवि ने कहा, ''जब हमारे राष्ट्रीय नेताओं ने इस राष्ट्र के पुनर्निमाण की शुरुआत की तो उन्होंने समाजवादी विकास का रास्ता चुना। हमारे लोगों ने सोचा यह गरीबी को दूर करने का सबसे अच्छा मॉडल है। जब समाजवाद सत्ता में आ जाता है तो इसका मतलब उत्पादन राज्य के नियंत्रण में चला जाता है। निजी उद्योगों, निजी संपत्ति सृजन को शक की निगाहों से देखा जाता है।''

उन्होंने कहा, ''हमने सड़कों, विद्यालयों, कॉलेजों, अस्पतालों और आईआईटी व आईआईएम जैसे संस्थानों का निर्माण किया। हम परमाणु शक्ति बने और अंतरिक्ष क्षेत्र में एक विश्वसनीय देश के रूप में भी उभरे। लेकिन इन सबको हासिल करने पर भी हमारा देश सबसे ज्यादा बीमारों, गरीबों और अनपढ नागरिकों का घर बना रहा। हम एक तरीके से निर्माण करते रहे लेकिन हमने अपनी समस्याओं को हल नहीं किया।''

रवि ने कहा कि समाजवाद ने लोकलुभावनवाद और मुफ्त की रेवड़ियों की राजनीति को जन्म दिया।

उन्होंने कहा, ''समाजवाद और लोकलुभावनवाद के इस मिश्रण ने देश को एक भ्रष्ट चक्र में धकेल दिया। हमने बिना संपत्ति सृजन के संपत्तियों को बिगाड़़ना शुरू कर दिया। और हमने किस चीज को सबसे ज्यादा बिगाड़ा? गरीबी।''

तमिलनाड़ु के राज्यपाल ने कहा कि मोदी के शासनकाल में भारत दुनिया में सबसे तेज उभरती हुई अर्थव्यवस्था बन चुका है, जहां एक लाख से ज्यादा स्टार्ट-अप मौजूद हैं। यह बदलाव इसलिए हुआ क्योंकि लोगों ने सबकुछ सरकार के भरोसे छोड़ने के बजाए खुद की रचनात्मक शक्ति से सोचना शुरू किया।

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