देश की खबरें | दिल्ली के समाज कल्याण मंत्री और डीसीडब्ल्यू अध्यक्ष ने वृद्धाश्रम का औचक निरीक्षण किया
एनडीआरएफ/प्रतीकात्मक तस्वीर (Photo Credits: ANI)

नयी दिल्ली, एक अगस्त दिल्ली के समाज कल्याण मंत्री राजेंद्र पाल गौतम और डीसीडब्ल्यू अध्यक्ष स्वाति मालीवाल ने एक वृद्धाश्रम का औचक निरीक्षण किया और पाया कि वहां एक छोटे कमरे में 20 बुजुर्ग रह रहे थे और एक ही शौचालय का इस्तेमाल कर रहे थे।

शनिवार को जारी विज्ञप्ति के मुताबिक निहाल विहार स्थित वृद्धाश्रम का औचक निरीक्षण शुक्रवार रात को किया गया और पाया कि कुछ बुजुर्ग बिस्तर पर शौच किए थे क्योंकि वहां पर एक ही शौचालय उपलब्ध था, जिससे कमरे में नहीं रहा जा सकता था।

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दिल्ली महिला आयोग (डीसीडब्ल्यू) ने बयान में कहा कि वृद्धाश्रम में बुजुर्गों की देखभाल करने वाला कोई नहीं था और उन्हें खुद परिसर को साफ करना पड़ता था। बयान के मुताबिक मंत्री ने सख्त कार्रवाई के आदेश दिए है।

बयान के मुताबिक डीसीडब्ल्यू के हेल्पलाइन 181 पर शिकायत मिली थी जिसमें कहा गया था कि कुछ बजुर्गों को वृद्धाश्रम में जबरन रखा जा रहा है और उन्हें बांध कर रखा जाता है और घर वापस जाने की मांग करने पर पिटाई की जाती है।

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शिकायत मिलने पर गौतम और मालीवाल ने वृद्धाश्रम का औचक निरीक्षण करने का फैसला किया।

विज्ञप्ति के मुताबिक वहां पहुंचने पर टीम ने पाया कि एक छोटे से कमरे में 20 बजुर्गों को रखा गया है और आने जाने के लिए वहां कोई रास्ता नहीं है। यह भी पाया गया कि कई बुजुर्गों को विशेष देखभाल की जरूरत है।

बयान में कहा गया, ‘‘ पुरुषों और महिलाओं के लिए कोई अलग कमरा नहीं था। कई बुजर्गों को बिस्तर साझा करने पर मजबूर किया गया। कमरे की हालत दयनीय थी और साफ-सफाई और स्वच्छता की भारी कमी थी।

बयान में कहा गया कि कोविड-19 के दौर में जब सामजिक दूरी और स्वच्छता बहुत जरूरी है, यहां देखा गया कि वृद्धाश्रम का परिसर इतना छोटा था कि इन नियमों का अनुपालन असंभव है।

यहां रहने वालों के लिए सेनिटाइजर और मास्क की कोई व्यवस्था नहीं थी।

बयान में बताया गया कि यहां रहने वाले बुजुर्ग अपने अनुभवों को भी साझा करने से डर रहे थे।

एक महिला ने अपने बयान में बताया कि छह महीने पहले उनका बेटा यहां छोड़ गया था और वह अपनी बेटी के पास जाना चाहती थी। उन्होंने इसकी इच्छा जताई लेकिन जब भी वह बेटी के पास भेजने की बात करती तो प्रबंधन द्वारा उनकी पिटाई की जाती थी।

महिला को बाद में सुरक्षित उसकी बेटी के घर पहुंचा दिया गया।

बयान के मुताबिक वृद्धाश्रम के रहवासियों ने बताया कि मालिक बिजली बचाने के लिए रोजाना चार से पांच घंटे बिजली काट देता था।

उन्होंने बताया कि कूलर या वातानुकूलन की कोई व्यवस्था नहीं थी। कई रहवासियों को गंभीर स्वास्थ्य समस्या होने के बावजूद कोई चिकित्सा सुविधा नहीं थी।

बयान के मुताबिक, ‘‘उन्हें खाने में रोजाना केवल दाल-चावल दिया जाता था। सब्जी या फल या दूध नहीं दिया जाता था। वहां के हालात जेल की तरह थे।’’

गौतम ने तत्काल मामले में कार्रवाई करने के आदेश दिया और समाज कल्याण विभाग को रहवासियों के पुनर्वास के निर्देश दिए।

डीसीडब्ल्यू अध्यक्ष ने दिल्ली पुलिस और समाज कल्याण निदेशक को मामले में समन भेज वृद्धाश्रम मालिक के खिलाफ प्राथमिकी और रहवासियों का बचाव सुनिश्चित करने को कहा है।

गौतम ने कहा, ‘‘वृद्धाश्रम के हालात से बहुत परेशान हूं। मैंने समाज कल्याण विभाग को वृद्धाश्रम के प्रत्येक निवासी का पुनर्वास सुनिश्चित करने और मालिक पर सख्त कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं। इस तरह उत्पीड़न को किसी भी परिस्थिति में सहन नहीं किया जा सकता ।’’

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