देश की खबरें | सोशल मीडिया उस तरह से समाज का ध्रुवीकरण नहीं कर रहा जैसा कि जनता सोचती है: अध्ययन

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नयी दिल्ली, 28 जुलाई समाजशास्त्रियों का कहना है कि सोशल मीडिया उपयोगकर्ता के ‘फीड’ (सामग्री) को नियंत्रित करने वाला एल्गोरिदम (काफी हद तक अपारदर्शी तरीके से) बिलकुल उसकी तरह समाज का ध्रुवीकरण नहीं कर सकता जिस तरह लोग सोचते हैं।

समाजशास्त्रियों ने ‘नेचर एंड साइंस’ पत्रिका में वर्ष 2020 में अमेरिकी राष्ट्रपति के चुनाव के दौरान व्यक्तियों के राजनीतिक दृष्टिकोण और व्यवहार पर सोशल मीडिया के प्रभाव की जांच करने वाले अध्ययन प्रकाशित किए हैं।

नव प्रकाशित अध्ययनों में से एक के मुख्य लेखक एंड्रयू एम. गेस और उनके सहयोगियों ने सोशल मीडिया कंपनियों द्वारा उपयोग किए जाने वाले उपयोगकर्ता के लिए अपारदर्शी एल्गोरिदम के बारे में लिखा , ‘‘इस धारणा ने लोगों की चेतना में जड़ जमा ली है कि ऐसे एल्गोरिदम राजनीतिक ‘फिल्टर युक्त बुलबुले’ बनाते हैं, ध्रुवीकरण को बढ़ावा देते हैं, मौजूदा सामाजिक असमानताओं को बढ़ाते हैं और गलत सूचना फैलाने में सक्षम बनाते हैं।’’

‘द नेचर’ के अध्ययन में पाया गया कि एक फेसबुक उपयोगकर्ता को ऐसे स्रोतों की सामग्री से अवगत कराया जाता है जो उसे राजनीतिक रूप से उतना ही प्रेरित करता है जितना कि उन्हें या ‘समान मानसिकता वाले सूत्रों’ को, तो इसने 2020 के अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव के दौरान उपयोगकर्ता की राजनीतिक मान्यताओं या दृष्टिकोण पर कोई महत्वपूर्ण प्रभाव नहीं डाला।

अध्ययन के चार प्रमुख लेखकों में से एक ब्रेंडन नाहन ने कहा, ‘‘इन निष्कर्षों का अर्थ यह नहीं है कि सामान्य रूप से सोशल मीडिया या विशेष रूप से फेसबुक के बारे में चिंतित होने की कोई वजह नहीं है।’’

नाहन ने कहा, ‘‘सोशल मीडिया मंच के जरिये चरमपंथ में योगदान देने के तरीकों के बारे में हमारी कई अन्य चिंताएं हो सकती हैं, लेकिन समान विचारधारा वाले स्रोतों की सामग्री के संपर्क में आना संभवतः उन तरीकों में शामिल नहीं है।’’

उन्होंने कहा, ‘‘हमें अधिक डेटा पारदर्शिता की आवश्यकता है जो हमें इस बात पर शोध करने में सक्षम बनाएगा कि सोशल मीडिया मंच पर क्या हो रहा है और इसके क्या प्रभाव हैं।’’

शोध के दौरान तीन महीने के विश्लेषण के बाद शोधकर्ताओं को उपचार समूह में कोई पता लगाने योग्य परिवर्तन नहीं मिला, जो ‘नियंत्रण समूह’ की तुलना में सोशल मीडिया मंच पर सामग्री के साथ कम जुड़े हुए थे और अधिक वैचारिक रूप से विविध सामग्री के संपर्क में थे तथा जिनके फीड (सामग्री) के साथ छेड़छाड़ नहीं की गई थी।

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