जरुरी जानकारी | एसजेवीएन ने एटालिन परियोजना के लिए जमीन मुआवजे के 270 करोड़ रुपये जारी किये
Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on Information at LatestLY हिन्दी. सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनी एसजेवीएन लि. ने अरुणाचल प्रदेश की दिबांग घाटी में 3,097 मेगावाट की एटालिन जलविद्युत परियोजना के लिए जमीन को लेकर 269.97 करोड़ रुपये का मुआवजा जारी किया है।
नयी दिल्ली, नौ अप्रैल सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनी एसजेवीएन लि. ने अरुणाचल प्रदेश की दिबांग घाटी में 3,097 मेगावाट की एटालिन जलविद्युत परियोजना के लिए जमीन को लेकर 269.97 करोड़ रुपये का मुआवजा जारी किया है।
बिजली उत्पादक कंपनी ने बृहस्पतिवार को एक बयान में कहा कि इस परियोजना का उद्देश्य ड्री नदी और तालो (टैंगोन) नदी पर बने दो बांधों के साथ-साथ एक भूमिगत बिजलीघर परिसर का निर्माण करना है।
बयान के अनुसार, परियोजना को दिसंबर, 2033 में चालू करने का लक्ष्य है।
अरुणाचल प्रदेश में जल विद्युत विकास में तेजी लाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए एसजेवीएन ने कहा कि उसने दिबांग घाटी में 3,097 मेगावाट की एटालिन जलविद्युत परियोजना के लिए जमीन को लेकर मुआवजे के रूप में 269.97 करोड़ रुपये जारी किये हैं।
एसजेवीएन के चेयरमैन एवं प्रबंध निदेशक (अतिरिक्त प्रभार) राज कुमार चौधरी ने अरुणाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री पेमा खांडू की अध्यक्षता में आयोजित समीक्षा बैठक के दौरान बताया कि जमीन मुआवजे की राशि 26 मार्च, 2025 को डीसी (उपायुक्त) और डीएलआरएसओ)(जिला भूमि राजस्व और निपटान अधिकारी), दिबांग घाटी के संयुक्त खाते में जमा कर दी गई है।
खांडू ने सहयोगात्मक प्रयासों की सराहना की और परियोजना के सतत विकास को सुविधाजनक बनाने के लिए आवश्यक मंजूरी में तेजी लाने के लिए राज्य सरकार से पूर्ण समर्थन का भरोसा दिया।
चौधरी ने कहा, ‘‘एसजेवीएन अरुणाचल प्रदेश के समावेशी विकास के लिए प्रतिबद्ध है। मुआवजे की राशि को जारी करना स्थानीय समुदायों के अधिकारों का सम्मान करते हुए राष्ट्र के बुनियादी ढांचे के विकास को सुनिश्चित करने की दिशा में एक बड़ा कदम है।’’
एसजेवीएन और अरुणाचल प्रदेश सरकार के बीच अगस्त, 2023 में इस परियोजना के साथ ही राज्य में चार अन्य जलविद्युत परियोजनाओं लिए के लिए समझौता ज्ञापन (एमओए) पर हस्ताक्षर किये गये थे। इन परियोजनाओं की कुल क्षमता 5,097 मेगावाट है।
ये परियोजनाएं दिबांग घाटी जिले में स्थित हैं और इन पर संयुक्त रूप से लगभग 60,000 करोड़ रुपये का निवेश होगा।
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