देश की खबरें | सपा की 62 सदस्यीय राष्ट्रीय कार्यकारिणी में शिवपाल यादव और स्‍वामी प्रसाद मौर्य को महासचिव बनाया

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लखनऊ, 29 जनवरी समाजवादी पार्टी (सपा) ने रविवार को अपनी राष्ट्रीय कार्यकारिणी की घोषणा की है जिसमें अखिलेश यादव को पार्टी का राष्ट्रीय अध्यक्ष और प्रोफेसर राम गोपाल यादव को प्रमुख महासचिव बनाने के साथ ही मोहम्मद आजम खान, शिवपाल सिंह यादव और स्‍वामी प्रसाद मौर्य को महासचिव बनाया गया है।

स्‍वामी प्रसाद मौर्य को महासचिव बनाये जाने पर सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी समेत राजनीतिक दलों ने कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त की है।

सपा के आधिकारिक ट्विटर हैंडल से पार्टी के 62 सदस्यीय राष्ट्रीय कार्यकारिणी की सूची साझा की गयी है। सूची के अनुसार, अखिलेश यादव को फिर से राष्ट्रीय अध्यक्ष, किरणमय नंदा को राष्ट्रीय उपाध्यक्ष, राम गोपाल यादव को राष्ट्रीय प्रमुख महासचिव बनाया गया है।

इसके अलावा मोहम्मद आजम खान, शिवपाल सिंह यादव, स्वामी प्रसाद मौर्य, रवि प्रकाश वर्मा, बलराम यादव सहित 14 राष्ट्रीय महासचिव होंगे। सुदीप रंजन सेन पार्टी के कोषाध्यक्ष होंगे, जबकि सदस्यों के अलावा 19 राष्ट्रीय सचिव होंगे।

सपा संस्थापक मुलायम सिंह यादव के निधन के बाद शिवपाल सिंह यादव ने पिछले साल के आखिरी महीने में मैनपुरी में हुए लोकसभा चुनाव के दौरान अखिलेश यादव की पत्नी डिंपल यादव के लिए जमकर चुनाव प्रचार किया और चुनाव में सपा की भारी जीत के बाद उन्होंने पार्टी का झंडा थाम लिया। उन्होंने 2018 में अपनी अलग प्रगतिशील समाजवादी पार्टी (लोहिया) का गठन किया और 2019 का लोकसभा चुनाव लड़े।

हालांकि 2022 के विधानसभा चुनाव में अखिलेश यादव से नजदीकी होने के बाद शिवपाल ने सपा के ही निशान पर विधानसभा चुनाव लड़ा, लेकिन जसवंत नगर से विधायक बनने के बाद फिर से अखिलेश यादव से उनकी दूरी हो गयी थी।

मुलायम सिंह के छोटे भाई शिवपाल सिंह यादव और अखिलेश यादव के बीच की दूरी मैनपुरी उपचुनाव में चौथी बार खत्म हुई और तबसे चाचा-भतीजा के रिश्ते मजबूत हुए हैं।

सपा की कार्यकारिणी में रामचरित मानस पर विवादित बयान देने वाले स्‍वामी प्रसाद मौर्य को भी राष्‍ट्रीय महासचिव के रूप में महत्व मिला है।

उल्लेखनीय है कि स्वामी प्रसाद मौर्य ने पिछले रविवार को एक बयान में श्रीरामचरितमानस की एक चौपाई का जिक्र करते हुए इसे महिलाओं तथा पिछड़ों के प्रति अपमानजनक करार दिया था और इस पर पाबंदी लगाने की मांग की थी। उनके इस बयान पर खासा विवाद उत्पन्न हो गया था। संत समाज और हिन्दूवादी संगठनों ने इसका कड़ा विरोध किया था। इस मामले में मौर्य के खिलाफ मुकदमा भी दर्ज हुआ है।

स्‍वामी प्रसाद को सपा में राष्‍ट्रीय महासचिव बनाये जाने के बाद उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने सपा प्रमुख अखिलेश यादव पर तंज कसते हुए रविवार को ट्वीट किया, ''मानसिक रूप से विक्षिप्त हो चुकी है समाजवादी पार्टी ने अपना हिंदू विरोधी चरित्र उजागर कर दिया है। श्रीरामचरितमानस को अपमानित करने वाले को सपा बहादुर अखिलेश यादव ने राष्ट्रीय महासचिव बनाकर खुद सपा के ताबूत में आखिरी कील ठोक दी है। “विनाशक काले विपरीत बुद्धि”।''

भाजपा के प्रदेश सह संपर्क प्रमुख नवीन श्रीवास्तव ने रविवार को अपने ट्वीट में कहा, ''कोई कुछ भी कहे अखिलेश यादव ने डंके की चोट पर स्‍वामी प्रसाद मौर्य को श्रीरामचरितमानस के अपमान का ईनाम राष्ट्रीय महासचिव बनाकर, अपना मंतव्य साफ कर दिया है।''

कांग्रेस नेता ललन कुमार ने कहा, "अखिलेश यादव ने मौर्य को राष्ट्रीय महासचिव का पद दिया है। अब यह दिख रहा है कि मौर्य ने किसके निर्देश पर रामचरितमानस के खिलाफ दुर्भाग्यपूर्ण बयान दिया था।"

सपा में मौर्य के अलावा 2022 के चुनाव से पहले बहुजन समाज पार्टी (बसपा) छोड़कर सपा में शामिल होने वाले पूर्व मंत्री लालजी वर्मा और राम अचल राजभर को भी राष्‍ट्रीय महासचिव बनाया गया है।

सपा में विशंभर प्रसाद निषाद, अवधेश प्रसाद, इंद्रजीत सरोज, रामजीलाल सुमन, जो एंटोनी, हरेंद्र मलिक और नीरज चौधरी को भी राष्‍ट्रीय महासचिव का दायित्व सौंपा गया है।

डॉक्टर मधु गुप्ता, कमाल अख्‍तर, दयाराम पाल, राजेंद्र चौधरी, राजीव राय, राम बख्‍श वर्मा, अभिषेक मिश्रा, जावेद आब्दी, रमेश प्रजापति, पीएन चौहान, आकिल मुर्तजा, अखिलेश कटियार, रामआसरे विश्वकर्मा, तारकेश्वर मिश्रा, हाजी इरफान अंसारी, रामराज पाल, त्रिभुवन दत्त, राममूर्ति वर्मा और वीरपाल यादव को राष्ट्रीय सचिव बनाया गया है।

विशेष रूप से जया बच्‍चन, राम गोविंद चौधरी, अबू आसिम आजमी और लीलावती कुशवाहा जैसे नेताओं को भी कार्यकारिणी में जगह दी गयी। इस 62 सदस्यीय कार्यकारिणी में अल्ताफ अंसारी, किसान सिंह सैंथवार, व्यास जी गौड़ और मौलाना इकबाल कादरी को विशेष आमंत्रित सदस्य बनाया गया है।

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