देश की खबरें | मुखर्जी के निधन पर छत्तीसगढ़ में सात दिन का राजकीय शोक

Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. छत्तीसगढ़ सरकार ने पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी के निधन पर 31 अगस्त से छह सितम्बर तक पूरे राज्य में सात दिन का राजकीय शोक घोषित किया है। वहीं, मुखर्जी के निधन पर मुख्यमंत्री भूपेश बघेल और अन्य नेताओं ने शोक व्यक्त किया है।

एनडीआरएफ/प्रतीकात्मक तस्वीर (Photo Credits: ANI)

रायपुर, 31 अगस्त छत्तीसगढ़ सरकार ने पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी के निधन पर 31 अगस्त से छह सितम्बर तक पूरे राज्य में सात दिन का राजकीय शोक घोषित किया है। वहीं, मुखर्जी के निधन पर मुख्यमंत्री भूपेश बघेल और अन्य नेताओं ने शोक व्यक्त किया है।

राज्य के वरिष्ठ अधिकारियों ने सोमवार को यहां बताया कि पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी के निधन पर छत्तीसगढ़ सरकार ने 31 अगस्त से छह सितम्बर तक पूरे राज्य में सात दिन का राजकीय शोक घोषित किया है। राजकीय शोक की अवधि में राज्य में स्थित सभी शासकीय भवनों और अन्य स्थानों पर 31 अगस्त से छह सितम्बर तक राष्ट्रीय ध्वज आधे झुके रहेंगे।

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राजकीय शोक की अवधि में राज्य में शासकीय स्तर पर कोई मनोरंजन, सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित नहीं किया जाएगा।

मुख्यमंत्री बघेल ने पूर्व राष्ट्रपति मुखर्जी के निधन पर गहरा शोक जताते हुए इसे राष्ट्र के लिए अपूरणीय क्षति बताया और इस दुख की घड़ी में परिवारजनों के प्रति संवेदना प्रकट की है।

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उन्होंने अपने शोक सन्देश में कहा है कि प्रणब मुखर्जी ने अपने लंबे राजनीतिक जीवन में देश की उन्नति और समाज के हर वर्ग के हित के लिए कार्य करते हुए अपना अभूतपूर्व योगदान दिया। उनका निधन राष्ट्रीय क्षति है, इस कमी को कभी पूरा नहीं किया जा सकेगा।

राज्य के मुख्य विपक्षी दल भारतीय जनता पार्टी की प्रदेश इकाई ने भी मुखर्जी के निधन पर शोक व्यक्त किया है।

प्रदेश भाजपा की ओर से श्रद्धांजलि देते हुए अपने शोक संदेश में भाजपा प्रदेश अध्यक्ष विष्णुदेव साय ने कहा है कि पूर्व राष्ट्रपति मुखर्जी ने एक कुशल प्रशासक, योग्य और मुखर राजनेता के तौर पर राजनीतिक जीवन की ऊँचाई को स्पर्श किया। एक संकटमोचक के रूप में उनकी तमाम कोशिशों ने सफलता के प्रतिमान गढ़े और राष्ट्रपति के रूप में उन्होंने देश के स्वाभिमान को विश्व मंच में ऊंचाइयों तक पहुंचाया।

साय ने कहा कि मुखर्जी सच्चे अर्थों में भारत रत्न थे। उनका देहावसान हम सबके लिए हृदयविदारक है।

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