देश की खबरें | सेना जैसे अनुशासित बल में वरिष्ठता का बहुत महत्व है: उच्चतम न्यायालय

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नयी दिल्ली, 28 जुलाई उच्चतम न्यायालय ने वरिष्ठता को लेकर हुए झगड़े के दौरान अपने सहकर्मी की हत्या के दोषी गैर-कमीशन अधिकारी की उम्रकैद की सजा को घटाते हुए कहा कि भारतीय सेना जैसे अनुशासित बल में वरिष्ठता का बहुत महत्व है।

चार दिसंबर 2004 को लांस नायक और उनके सहकर्मी, जो एक ही रैंक के थे, पंजाब के फिरोजपुर छावनी में ड्यूटी पर थे जहां वरिष्ठता को लेकर उनके बीच झगड़ा हो गया। दोषी ने सहकर्मी से राइफल छीन ली और उसे गोली मार दी। सहकर्मी की गोली लगने से मौत हो गई। उन्हें अस्पताल में मृत घोषित कर दिया गया।

दोषी सैन्यकर्मी को कोर्ट मार्शल द्वारा सेना अधिनियम, 1950 की धारा 69 के साथ पठित भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 302 (हत्या) के तहत दंडनीय अपराध के लिए दोषी ठहराया गया था और आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई थी।

सशस्त्र बल न्यायाधिकरण, चंडीगढ़ ने उसकी दोषसिद्धि और सजा की पुष्टि की जिसे पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय ने बरकरार रखा। शीर्ष अदालत ने दोषसिद्धि को संशोधित करते हुए और उस व्यक्ति द्वारा पहले ही काटी जा चुकी सजा को घटाकर नौ साल और तीन महीने कर दिया। शीर्ष अदालत ने कहा कि ऐसा प्रतीत होता है कि अपीलकर्ता ने गुस्से में सहकर्मी के पास मौजूद राइफल छीन ली और गोली चला दी।

शीर्ष अदालत ने कहा कि अगर अपीलकर्ता की पहले से कोई योजना थी या उसका सहकर्मी को मारने का कोई इरादा था तो उसने और गोलियां चलाई होतीं। न्यायमूर्ति अभय एस ओका और न्यायमूर्ति संजय करोल की पीठ ने कहा कि सहकर्मी को मारने का उसका कोई इरादा नहीं था।

पीठ ने कहा, ‘‘अपीलकर्ता और सहकर्मी दोनों ने शराब पी रखी थी। वरिष्ठता के मुद्दे पर उसके और सहकर्मी के बीच झगड़ा हुआ था। वास्तव में, जब अपीलकर्ता ने सहकर्मी से उसके लिए पानी लाने को कहा तो सहकर्मी ने ऐसा करने से इस आधार पर इनकार कर दिया कि वह अपीलकर्ता से वरिष्ठ था।’’

पीठ ने कहा, ‘‘सेना जैसी अनुशासित बल में वरिष्ठता का बहुत महत्व होता है। इसलिए, इस बात की पूरी संभावना है कि वरिष्ठता को लेकर हुए विवाद के कारण अपीलकर्ता ने आवेश में आकर यह कृत्य किया।’’

शीर्ष अदालत ने कहा कि दोषी लांस नायक ने नौ साल और लगभग तीन महीने जेल में गुजारे हैं। पीठ ने कहा, ‘‘रिकॉर्ड पर मौजूद साक्ष्यों को समग्र रूप से देखते हुए अपीलकर्ता द्वारा पहले ही भुगती गई सजा मामले के तथ्यों के अनुसार उचित सजा होगी।’’

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