जरुरी जानकारी | सेबी ने तरजीही निर्गम मामले में मूल्य निर्धारण नियमों में ढील देते हुये नया विकल्प उपलब्ध कराया

Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on Information at LatestLY हिन्दी. बाजार नियामक सेबी ने बृहस्पतिवार को तरजीही आधार पर शेयरों के आबंटन के लिये मूल्य निर्धारण संबंधी नियमों में अस्थाई रूप से ढील देने का फैसला किया। कोरोना वायरस महामारी के बीच कंपनियों के लिये कोष जुटाने के लिये नियमों को उदार बनाने के प्रयास के तहत यह कदम उठाया गया है।

नयी दिल्ली, 25 जून बाजार नियामक सेबी ने बृहस्पतिवार को तरजीही आधार पर शेयरों के आबंटन के लिये मूल्य निर्धारण संबंधी नियमों में अस्थाई रूप से ढील देने का फैसला किया। कोरोना वायरस महामारी के बीच कंपनियों के लिये कोष जुटाने के लिये नियमों को उदार बनाने के प्रयास के तहत यह कदम उठाया गया है।

सेबी के निदेशक मंडल की बैठक के बाद जारी विज्ञप्ति के अनुसार नियामक तरजीही निर्गमों के लिये मौजूदा मूल्य व्यवस्था के साथ ही अतिरिक्त विकल्प उपलब्ध कराएगा।

यह भी पढ़े | दुनियाभर में कोरोना वायरस का कहर, कोविड-19 के मामले 94 लाख के पार.

कोविड-19 संकट के कारण कंपनियों के समक्ष गंभीर चुनातियों को देखते हुए भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) को विभिन्न पक्षों से प्रतिभूति बाजार से धन जुटाने को लेकर नियमों में अस्थायी तौर पर ढील दिये जाने को लेकर ज्ञापन मिले हैं।

जिन कंपनियों के शेयरों में कारोबार करने में कोई दिक्कत नहीं हाती है उनमें तरजीही आधार पर आबंटित होने वाले इक्विटी शेयर की कीमत उनके मात्रा आधारित भारांश औसत मूल्य के साप्ताहिक उच्च और निम्न भाव के औसत से कम नहीं होनी चाहिए। इसमें भाव संबंधित तारीख से 12 सप्ताह पीछे तक का देखा जाएगा।

यह भी पढ़े | PAN-Aadhaar Linking Deadline: पैन-आधार लिंक करने की आखिरी तारीख अब 31 मार्च 2021, टैक्सपेयर्स को भी मिली राहत.

पुन: कंपनियां तरजीही निर्गम के लिये कीमत दिशानिर्देश के लिये संबंधित तारीख से दो सप्ताह पहले के दौरान मान्यता प्राप्त शेयर बाजार में उल्लेखित संबंधित इक्विटी शेयर के मात्रा आधारित भारांश औसत मूल्य के साप्ताहिक उच्च और निम्न भाव के औसत पर विचार कर सकती हैं।

सेबी के अनुसार कारोबार के लिहाज से बेहतर शेयरों के मामले में आईसीडीआर (इश्यू ऑफ कैपिटल एंड डिस्क्लोजर रिक्वायरमेंट) के तहत शेयरों के लिये तरजीही निर्गम के मूल्य को लेकर मौजूदा दिशानिर्देश भी बने रहेंगे और उन्हें नये फार्मूले का विकल्प भी उपलब्ध होगा। वह मूल्य निर्धारण के लिये किसी एक को चुन सकते हैं।

नये कीमत फार्मूले के तहत तरजीही आधार पर आबंटित प्रतिभूति को तीन साल रखना अनिवार्य होगा। यानी इसके लिये ‘लॉक इन’ अवधि तीन साल होगी।

विज्ञप्ति के अनुसार, ‘‘तरजीही कीमत का यह विकल्प एक जुलाई 2020 या नियमन में संशोधन से संबद्ध अधिसूचना की तारीख, जो भी बाद में हो, से लेकर 31 दिसंबर 2020 होगी।’’

इसके अलावा नियामक ने कहा कि खुली पेशकश के दौरान थोक सौदों के जरिये शेयर बाजार निपटान प्रक्रिया के माध्यम से शेयरों के अधिग्रहण की मंजूरी होगी।

(यह सिंडिकेटेड न्यूज़ फीड से अनएडिटेड और ऑटो-जेनरेटेड स्टोरी है, ऐसी संभावना है कि लेटेस्टली स्टाफ द्वारा इसमें कोई बदलाव या एडिट नहीं किया गया है)

Share Now

\