नयी दिल्ली, 25 जून भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (सेबी) ने वैश्विक डिपॉजिटरी रिसीट (जीडीआर) जारी करने में हेरा-फेरी करने के मामले में आईकेएफ टेक्नोलॉजीस, इसके दो अधिकारी और क्लिफोर्ड कैपिटल पार्टनर्स पर कुल 15.1 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया है। सेबी ने 24 जून को इस संबंध में आदेश जारी किया।
सेबी ने अपनी जांच में पाया कि आईकेएफ ने 30 मार्च 2007 को 1.1 करोड़ डॉलर और 15 मई 2009 को 1.09 करोड़ डॉलर के जीडीआर निर्गम जारी किए। इसके प्रबंधन की मुख्य तौर पर जिम्मेदारी पैन एशिया एडवाइजर्स की रही। अरुण पंछारिया पैन एशिया के संस्थापक और निदेशक और शत प्रतिशत शेयरधारक हैं।
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आईकेएफ के दोनों जीडीआर निर्गम की तैयारी और रुपरेखा पंछारिया ने आईकेएफ के साथ मिलीभगत कर भारतीय निवेशकों को नुकसान पहुंचाने के लिए बनायी। इसमें आईकेएफ के जीडीआर खरीदने के लिए दोनों मौकों पर ऋण उपलब्ध कराया गया। पहली बार में ऋण क्लिफोर्ड कैपिटल ने और दूसरी बार में विंटेज एफजेडई ने उपलब्ध कराया।
पंछारिया विंटेज के प्रबंध निदेशक भी हैं और उनके पास उसकी 100 प्रतिशत हिस्सेदारी भी है।
इस तरह आईकेएफ और उसके निदेशकों ने पंछारिया एवं क्लिफोर्ड कैपिटल पार्टनर्स (सीसीपी) के साथ मिलीभगत करके जीडीआर का फर्जी निर्गम निकाला।
इसके चलते सेबी ने अपने 24 जून के आदेश में बाजार नियमों का उल्लंघन करने के लिए आईकेएफ टैक्नालॉजीज पर 12.1 करोड़ रुपये, वहीं दो अधिकारियों और क्लिफोर्ड कैपिटल पर भी एक- एक करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया है।
इसी तरह के एक और मामले में सेबी ने बृहस्पतिवार को अलग से एक आदेश में बेकंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड पर कुल 10.25 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया। यह मामला भी जीडीआर जारी करने में साठगांठ से जुड़ा है। सेबी ने इस मामले में कहा है कि बेकंस ने जीडीआर जारी करने में धोखाधड़ी वाला तरीका अपनाया। इसके बारे में एक्सचजें को भी सूचित नहीं किया गया और भ्रामक जानकारी उपलब्ध कराई गई।
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