देश की खबरें | किसी भी कीमत पर तट के पास समुद्र में खनन की अनुमति नहीं दी जाएगी: केरल सरकार
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तिरुवनंतपुरम, 11 फरवरी केरल की वाम सरकार ने मंगलवार को स्पष्ट किया कि राज्य के तटवर्ती इलाकों के समीप गहरे समुद्र में खनन शुरू करने के केंद्र के कदम को किसी भी कीमत पर अनुमति नहीं दी जाएगी और इस संबंध में राज्य के मछुआरा समुदाय की चिंता से केंद्र सरकार को पहले ही अवगत करा दिया गया है।
राज्य सरकार ने कहा है कि अपतटीय क्षेत्र खनिज (विकास एवं विनियमन) अधिनियम, 2002 के मानदंड तथा पिछले वर्ष इसमें किए गए संशोधन, दोनों ही राज्यों के हितों के अनुरूप नहीं हैं।
राज्य के मत्स्य पालन मंत्री साजी चेरियन ने राज्य विधानसभा को बताया कि ‘लेफ्ट डेमोक्रेटिक फ्रंट’ (एलडीएफ) सरकार इस मामले में मछुआरा समुदाय के साथ मजबूती से खड़ी है और विपक्षी कांग्रेस नीत ‘यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट’ (यूडीएफ) से आग्रह करती है कि वे अपने राजनीतिक मतभेदों को भुलाकर समुद्र में खनन के खिलाफ आंदोलन में शामिल हों।
चेरियन ने प्रश्नकाल के दौरान कहा, ‘‘केंद्र समुद्री खनन क्षेत्र को पूरी तरह से निजी क्षेत्र के लिए खोल रहा है। इससे मछुआरों के जीवन और आजीविका को बड़ा खतरा पैदा होगा। हमारे समुद्री संसाधन और मछलियों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा।’’
उन्होंने कहा, ‘‘हम किसी भी कीमत पर कोल्लम तट पर केंद्र द्वारा घोषित समुद्र में खनन योजना की अनुमति नहीं दे सकते।’’
समुद्र में खनन के कारण होने वाले विभिन्न परिणामों का विवरण देते हुए मंत्री ने कहा कि इससे तटीय क्षेत्र में कटाव की घटनाएं होंगी और रोजी रोटी के संकट के साथ मछुआरों की नौकाओं के लिए बाधा उत्पन्न होगी।
उन्होंने कहा कि समुद्र में खनन के लिए लाए जाने वाले बड़े जहाज और पोत स्थानीय मछुआरों की छोटी नौकाओं के लिए खतरा बनेंगे और राज्य के तटों पर दुर्घटनाओं में भी वृद्धि की आशंका है। उन्होंने कहा कि मछलियों की उपलब्धता में कमी से मछुआरों के आय में कमी होगी और अंततः उनकी रोजी रोटी खत्म हो जाएगी।
एक प्रश्न का उत्तर देते हुए मंत्री ने यह भी कहा कि राज्य सरकार समुद्र में खनन की प्रतिकूलताओं के बारे में अध्ययन नहीं करा सकती, क्योंकि यह 16-30 समुद्री मील के बीच होना है, जो उसके अधिकार क्षेत्र से बाहर है।
उन्होंने कहा, ‘‘राज्य का अधिकार क्षेत्र 12 समुद्री मील तक है। समुद्री खनन 16 से 30 समुद्री मील के बीच होना प्रस्तावित है। इसलिए, हम अपने अधिकार क्षेत्र से बाहर के क्षेत्र में अध्ययन नहीं करा सकते।’’
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