एसईए ने रिफाइंड पामतेल के आयात पर प्रतिबंध लगाये जाने की मांग की
एसईए ने खाद्य सचिव सुधांशु पांडे के साथ वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से हुई एक बैठक में इन मुद्दों को सामने रखा।
नयी दिल्ली, 11 मई खाद्य तेल व्यापारियों के संगठन भारतीय सॉल्वेंट एक्सट्रैक्टर्स संघ (एसईए) ने सोमवार को सरकार से स्थानीय प्रसंस्करण उद्योग की सुरक्षा के लिए रिफाइंड पाम ऑयल के आयात पर प्रतिबंध लगाने का आग्रह किया। साथ ही सूरजमुखी के तेल पर शुल्क मूल्य तय करने और नेपाल, बांग्लादेश और श्रीलंका के रास्ते अवैध आयात की निगरानी करने के लिए भी कहा।
एसईए ने खाद्य सचिव सुधांशु पांडे के साथ वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से हुई एक बैठक में इन मुद्दों को सामने रखा।
एसईए ने एक बयान में कहा कि उसने सरकार को मलेशिया और इंडोनेशिया से रिफाइंड पामतेल के आयात पर प्रतिबंध लगाने की आवश्यकता के बारे में बताया, जबकि घरेलू तेलशोधन क्षमता का उपयोग नहीं हो पा रहा है। उन्होंने कहा कि ऐसा करना प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘मेक इन इंडिया’ के आह्वान के खिलाफ है।
एसईए ने एक बयान में कहा, ‘‘यह एक रहस्य बना हुआ है कि 'मेक इन इंडिया' की अवधारणा का मजाक उड़ाते हुए कुछ खास कंपनियों को आयात लाइसेंस कैसे जारी किए गये हैं।’’
उसने कहा, ‘‘कोरोनोवायरस की वजह से रोजगार जाने की संभावनाएं बनी हुई हैं। इसलिए यह जरूरी है कि आगे रिफाइंड तेल के आयात पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगा दिया जाए।’’
एसईए ने सूरजमुखी तेल के आयात पर अंकुश लगाने के लिए मासिक शुल्क मूल्य को तय किये जाने की आवश्यकता पर भी जोर दिया, जैसा कि पामतेल और सोया तेल के मामले में है।
अवैध आयात को रोकने के लिए, एसईए ने सरकार से नेपाल, बांग्लादेश और श्रीलंका से होने वाले आयात की सख्ती से निगरानी करने और उत्पाद के स्रोत स्थल की जांच करने का आग्रह किया।
खाद्य तेलों के घरेलू उत्पादन को प्रोत्साहित करने के लिए, एसईए ने सुझाव दिया कि सरकार खाद्य तेलों के लिए लंबे समय से विलंबित राष्ट्रीय मिशन शुरू करें, तथा चावल की भूसी, बिनौला आदि जैसे तिलहन के गैर-पारंपरिक स्रोतों पर पूरा ध्यान दें।
इसने पंजाब और हरियाणा में उपयुक्त प्रोत्साहन देकर फसल के उत्पादन को प्रोत्साहित करने के लिए एक सरसों मिशन शुरू करने का भी सुझाव दिया।
खाद्य तेलों की भारत की मांग का लगभग 70 प्रतिशत हिस्से को आयात के जरिए पूरा किया जाता है।
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