देश की खबरें | वैज्ञानिकों ने भारत में आर्सेनिक युक्त भूमिगत जल के नये संभावित हॉटस्पॉट की पहचान की
Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. राष्ट्रीय जलविज्ञान संस्थान (एनआईएच) के वैज्ञानिकों ने भारत के कई हिस्सों में कुएं के जल में आर्सेनिक की मात्रा बढ़ने की संभावना पर चिंता जताई है। इन स्थानों पर पहले आर्सेनिक से कोई बड़ा खतरा नहीं था।
नयी दिल्ली, 15 अक्टूबर राष्ट्रीय जलविज्ञान संस्थान (एनआईएच) के वैज्ञानिकों ने भारत के कई हिस्सों में कुएं के जल में आर्सेनिक की मात्रा बढ़ने की संभावना पर चिंता जताई है। इन स्थानों पर पहले आर्सेनिक से कोई बड़ा खतरा नहीं था।
वैज्ञानिकों ने कहा है कि कुएं से निकाले गये पेयजल में आर्सेनिक होने पर स्वास्थ्य संबंधी कई समस्याएं पेश आती हैं। दुनिया के कई हिस्सों में और खासतौर पर भारतीय उपमहाद्वीप में इससे होने वाले कैंसर एवं हृदय संबंधी रोग की वजह से लोगों की असमय मौत हो जाती है।
ग्रामीण एवं शहरी इलाकों के लिये भूजल के घरेलू उपयोग की हालिया दर के आधार पर वैज्ञानिकों ने यह अनुमान लगाया है कि भारत में करीब 1.8 करोड़ से तीन करोड़ लोग पेयजल आपूर्ति के जरिये आर्सेनिक की चपेट में आने के खतरे का सामना कर रहे हैं।
बिहार में एनआईएच के वरिष्ठ वैज्ञानिक विश्वजीत चक्रवर्ती ने एक अनुमान प्रारूप तैयार किया है, जो पूरी तरह से भारत पर केंद्रित है।
यह नया प्रारूप इंटरनेशनल जर्नल फॉर इनवायरॅनमेंटल रिसर्च एंड पब्लिक हेल्थ में प्रकाशित हुआ है।
इसका उपयोग भूजल की गुणवत्ता की जांच और पर्यावरण जन स्वास्थ्य से जुड़े कार्यक्रमों को प्राथमिकता देने में किया जा सकता है।
उनके प्रारूप में यह पुष्टि की गई है कि उत्तर भारत में गंगा और ब्रह्मपुत्र नदी के बेसिन में कुएं में आर्सेनिक की मात्रा ज्यादा होने की अधिक संभावना है।
इसमें देश के उन हिस्सों में भी कुएं के जल में आर्सेनिक की मात्रा बढ़ने की संभावना जताई गई है, जहां अब तक ऐसा नहीं था। इन क्षेत्रों में दक्षिण पश्चिम क्षेत्र का हिस्सा और मध्य भारत शामिल है।
(यह सिंडिकेटेड न्यूज़ फीड से अनएडिटेड और ऑटो-जेनरेटेड स्टोरी है, ऐसी संभावना है कि लेटेस्टली स्टाफ द्वारा इसमें कोई बदलाव या एडिट नहीं किया गया है)