देश की खबरें | सुंदरता और दमदार अभिनय के दम पर नायकों की पसंदीदा रहीं सरोजा देवी
Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. महज 17 साल की उम्र में बी सरोजा देवी ने जब कन्नड़ फिल्म 'महाकवि कालिदास' (1955) से अपने अभिनय के सफर की शुरुआत की, तो पर्दे पर उनकी आकर्षक उपस्थिति ने तुरंत लोगों के दिलों में जगह बना ली।
बेंगलुरु, 14 जुलाई महज 17 साल की उम्र में बी सरोजा देवी ने जब कन्नड़ फिल्म 'महाकवि कालिदास' (1955) से अपने अभिनय के सफर की शुरुआत की, तो पर्दे पर उनकी आकर्षक उपस्थिति ने तुरंत लोगों के दिलों में जगह बना ली।
वह न केवल कन्नड़, बल्कि तमिल, तेलुगु और हिंदी सिनेमा में भी मशूहर हुईं।
सरोजा देवी सफलता ऐसी थी कि फिल्म ‘महाकवि कालिदास’ में उनके सह-कलाकार रहे अभिनेता-फिल्म निर्माता होन्नप्पा भगवतार ने अपनी उपलब्धियों में इस बात को भी शामिल किया है कि उन्होंने ‘‘सरोजा देवी को सिनेमा में पदार्पण कराया’’।
अभिनेता एवं फिल्मकार होन्नप्पा भगवतार को कन्नड़ सिनेमा के प्रारंभिक स्तंभों में गिना जाता है।
बेंगलुरु में जन्मी सरोजा देवी को अंततः कन्नड़ सिनेमा की पहली महिला सुपरस्टार का खिताब दिया गया।
तमिल फिल्मों के दिग्गज और तमिलनाडु के पूर्व मुख्यमंत्री एम.जी. रामचंद्रन उर्फ एमजीआर ने सरोजा देवी के साथ 48 फिल्मों में अभिनय किया हुआ है। वह उन्हें भाग्यशाली मानते थे।
फिल्मों में सरोजा देवी और एमजीआर की जोड़ी को लोगों को बहुत पसंद किया है। उनकी कुछ फिल्मों जैसे कि ‘अनबे वा’ (1966) को सबसे ज्यादा प्रसिद्धि मिली।
उनकी पहली फिल्म 'नादोडी मन्नान' (1958) ने सरोजा देवी को रातोंरात सुपरस्टार बना दिया।
सरोजा देवी ने दक्षिण भारत की लगभग सभी ओं के साथ-साथ हिंदी फिल्मों में भी काम किया — उन्हें 'चतुर् तारे' की उपाधि भी मिली — लेकिन तमिल सिनेमा में उनका सितारा सबसे अधिक दमकता रहा।
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