देश की खबरें | आरएसएस स्वतंत्रता संग्राम के इतिहास को दक्षिणपंथी नजरिए से पेश करने की कोशिश कर रहा है : कांग्रेस

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मुंबई, 14 जून कांग्रेस ने मुंबई में क्रांतिकारियों की गैलरी में मुख्यधारा के स्वतंत्रता संग्राम को प्रतिबिंबित नहीं करने का आरोप लगाते हुए मंगलवार को कहा कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) स्वतंत्रता संग्राम के इतिहास को दक्षिणपंथी नजरिए से पेश करने की कोशिश कर रहा है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को मुंबई स्थित राजभवन में क्रांतिकारियों की गैलरी का उद्घाटन किया।

कांग्रेस की महाराष्ट्र इकाई के प्रवक्ता सचिन सावंत ने यह भी कहा कि गैलरी में अज़ीमुल्लाह खान, बाबू जेनू और वामपंथी नेता श्रीपद डांगे जैसे स्वतंत्रता सेनानियों के नाम का उल्लेख नहीं है।

उन्होंने कहा कि हिंदू और मुसलमान दोनों ने ही देश के स्वतंत्रता संग्राम में योगदान दिया था।

सावंत ने गैलरी में हिंदुत्व विचारक एवं स्वतंत्रता सेनानी वी डी सावरकर के नाम के उल्लेख का परोक्ष रूप से जिक्र करते हुए कहा कि इस गैलरी में उन क्रांतिकारियों का नाम भी शामिल किया जाना चाहिए जिन्हें अंडमान की जेलों में सजा सुनाई गई और उन क्रांतिकारियों ने अंग्रेजों से माफी नहीं मांगी।

महाराष्ट्र के कई क्रांतिकारियों को कालापानी की सजा दी गई थी।

सावंत ने 1857 के विद्रोह को हिंदुओं और मुसलमानों का संयुक्त संघर्ष करार देते हुए संग्रहालय में 1857 के विद्रोह के अजीमुल्ला खान समेत तमाम क्रांतिकारियों के नाम शामिल करने की मांग की।

उन्होंने कहा कि किसानों और मजदूरों के संघर्ष और वर्ली विद्रोह को भी संग्रहालय में जगह मिलनी चाहिए।

सावंत ने आरोप लगाते हुए कहा कि आरएसएस पिछले कई वर्षों से महात्मा गांधी के नेतृत्व में चलाए गए अहिंसक स्वतंत्रता संग्राम के महत्व को कम करने और स्वतंत्रता आंदोलन के इतिहास को दक्षिणपंथी चश्मे के माध्यम से दिखाने की कोशिश कर रहा है।

सावंत ने ट्वीट कर कहा, “मुख्यधारा के स्वतंत्रता संग्राम को इस संग्रहालय में कोई स्थान नहीं मिला है। 1942 के भारत छोड़ो आंदोलन में कई लोग शहीद हुए थे। दुर्भाग्य से बाबू जेनू का नाम राजभवन प्रेस नोट में नहीं है। श्रीपद डांगे और अन्य वामपंथी स्वतंत्रता सेनानी भी जेल गए थे।”

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