जरुरी जानकारी | भारत में मुद्रास्फीति-जनित मंदी का जोखिम कम: आरबीआई अध्ययन

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मुंबई, 20 दिसंबर भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के स्टाफ सदस्यों ने बुधवार को प्रकाशित एक अध्ययन रिपोर्ट में कहा कि भारत के मुद्रास्फीति-जनित मंदी यानी स्टैगफ्लेशन में फंसने की आशंका कम है।

जब आर्थिक वृद्धि दर में सुस्ती के बीच मुद्रास्फीति तेजी से बढ़ती है तो उस स्थिति को स्टैगफ्लेशन कहते हैं।

देव प्रसाद रथ, सिलु मुदुली और हिमानी शेखर के एक अध्ययन में कहा गया कि भारत में ''मुद्रास्फीति-जनित मंदी का जोखिम'' सिर्फ एक प्रतिशत है। इसमें कहा गया कि इस बार जिंस कीमतों के झटके अधिक गंभीर नहीं हैं।

इस अध्ययन के मुताबिक, पिछले तीन दशकों में एशियाई संकट (1997-98), वैश्विक वित्तीय संकट (2008-09) और कोविड-19 महामारी जैसे प्रकरणों ने मुद्रास्फीति-जनित मंदी के जोखिम को बढ़ा दिया है।

हालांकि यह अध्ययन आरबीआई के आधिकारिक विचारों का प्रतिनिधित्व नहीं करता है।

इसके मुताबिक, कोविड-19 महामारी के समय जिंस कीमतों में तेजी और अमेरिकी डॉलर के मजबूत होने से मुद्रास्फीति-जनित मंदी का जोखिम बढ़ा था। लेकिन वित्तीय स्थिति काबू में आने, रुपये की गिरावट थमने और घरेलू स्तर पर पेट्रोल-डीजल की कीमतें स्थिर होने से यह जोखिम घटा है।

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