जरुरी जानकारी | रिजर्व बैंक ने मुद्रा विनिमय करने वाली इकाइयों के लिए नई श्रेणी का प्रस्ताव किया
Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on Information at LatestLY हिन्दी. भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने मंगलवार को ‘मनी चेंजर’ यानी दूसरे देश की मुद्रा का विनिमय करने वाली इकाइयों/संगठनों की नई श्रेणी का प्रस्ताव किया। इसके तहत वे अधिकृत डीलर के विदेशी मुद्रा विनिमय प्रतिनिधि (एफएक्ससी) बनकर एजेंसी मॉडल के माध्यम से कारोबार कर सकते हैं।
मुंबई, 26 दिसंबर भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने मंगलवार को ‘मनी चेंजर’ यानी दूसरे देश की मुद्रा का विनिमय करने वाली इकाइयों/संगठनों की नई श्रेणी का प्रस्ताव किया। इसके तहत वे अधिकृत डीलर के विदेशी मुद्रा विनिमय प्रतिनिधि (एफएक्ससी) बनकर एजेंसी मॉडल के माध्यम से कारोबार कर सकते हैं।
रिजर्व बैंक वर्तमान में अधिकृत डीलरों - विदेशी मुद्रा में लेनदेन के लिए अधिकृत बैंकों - और पूर्ण रूप से मुद्रा विनिमय कार्य में लगी इकाइयों को लाइसेंस जारी करता है। वित्तीय और अन्य संस्थानों को उनके कारोबार से संबंधित विशिष्ट विदेशी मुद्रा लेनदेन के लिए भी लाइसेंस दिये जाते हैं।
विदेशी मुद्रा प्रबंधन कानून (फेमा), 1999 के तहत अधिकृत व्यक्तियों को लाइसेंस देने की रूपरेखा की अंतिम समीक्षा मार्च, 2006 में की गई थी।
आरबीआई ने कहा कि पिछले दो दशक में फेमा के तहत उदारीकरण, वैश्विक अर्थव्यवस्था के साथ भारतीय अर्थव्यवस्था के बढ़ते जुड़ाव, भुगतान प्रणालियों के डिजिटलीकरण, विकसित संस्थागत ढांचे को ध्यान में रखते हुए अधिकृत व्यक्तियों के लिए लाइसेंसिंग ढांचे को तर्कसंगत तथा सरल बनाने का निर्णय किया गया है।
केंद्रीय बैंक ने फेमा के तहत अधिकृत व्यक्तियों के लिए लाइसेंस रूपरेखा का मसौदा जारी करते हुए कहा कि समीक्षा का उद्देश्य तेजी से बढ़ती भारतीय अर्थव्यवस्था की उभरती जरूरतों को पूरा करना और उचित जांच तथा संतुलन बनाए रखते हुए आम लोगों, पर्यटकों और कंपनियों के लिए विदेशी मुद्रा विनिमय सुविधाओं के लिए परिचालन दक्षता हासिल करना है।
मसौदे में कहा गया है, ‘‘कारोबार सुगमता बढ़ाने के लिए ‘मनी चेंजर’ की एक नई श्रेणी शुरू करने का प्रस्ताव है। इसके तहत आने वाली इकाइयां श्रेणी-एक और श्रेणी-दो के अधिकृत डीलरों के विदेशी मुद्रा विनिमय प्रतिनिधि (एफएक्ससी) बनकर एजेंसी मॉडल के माध्यम से मुद्रा विनिमय का कारोबार कर सकते हैं। ऐसे संस्थाओं को रिजर्व बैंक से स्वीकृति लेने की जरूरत नहीं होगी।’’
केंद्रीय बैंक ने संबंधित पक्षों से 31 जनवरी, 2024 तक अपनी प्रतिक्रिया देने को कहा है।
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