देश की खबरें | रेरा, गौतम बुद्ध नगर के आदेश को चुनौती देने वाली याचिका खारिज

Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने रीयल एस्टेट नियामकीय प्राधिकरण (रेरा), गौतम बुद्ध नगर के आदेश को चुनौती देने वाली एक याचिका खारिज कर दी। इस मामले में पैरामाउंट गोल्फ फारेस्ट परियोजना के प्रवर्तक ने रेरा के आदेश को चुनौती दी थी।

एनडीआरएफ/प्रतीकात्मक तस्वीर (Photo Credits: ANI)

प्रयागराज, 18 नवंबर इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने रीयल एस्टेट नियामकीय प्राधिकरण (रेरा), गौतम बुद्ध नगर के आदेश को चुनौती देने वाली एक याचिका खारिज कर दी। इस मामले में पैरामाउंट गोल्फ फारेस्ट परियोजना के प्रवर्तक ने रेरा के आदेश को चुनौती दी थी।

अदालत ने व्यवस्था दी है कि एक ऐसी परियोजना जहां सभी विकास कार्य पूरे नहीं किए गए हैं, समापन प्रमाण पत्र जारी करने के लिए सक्षम अधिकारी के पास महज आवेदन करने से यह चालू परियोजना के दायरे से बाहर नहीं आ जाएगी जैसा रेरा कानून के नियम 2 (एच) के तहत परिभाषित है।

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न्यायमूर्ति एसपी केसरवानी और न्यायमूर्ति डाक्टर वाईके श्रीवास्तव की पीठ ने पैरामाउंट लिमिटेड की ओर से अनिल कुमार गुप्ता द्वारा दायर रिट याचिका पर यह व्यवस्था दी।

याचिकाकर्ता पैरामाउंट गोल्फ फारेस्ट परियोजना की प्रवर्तक है। प्राधिकरण ने आदेश जारी कर याचिकाकर्ता को 60 दिनों के भीतर ग्राहकों को अपार्टमेंट का कब्जा देने और परियोजना पूरा करने में विलंब पर ब्याज का भुगतान करने को कहा है।

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याचिकाकर्ता ने इस आदेश को चुनौती दी थी।

इस मामले में प्रतिवादियों (ग्राहकों) ने याचिकाकर्ता से अपार्टमेंट बुक किए थे और याचिकाकर्ता ने 10 अगस्त, 2011 को उन्हें आबंटन पत्र जारी किए। हालांकि याचिकाकर्ता तय समय सीमा के भीतर परियोजना पूरी नहीं कर सका और अपार्टमेंट का कब्जा नहीं दे सका।

इसके परिणाम स्वरूप, ग्राहकों ने रेरा, गौतम बुद्ध नगर के पास इसकी शिकायत की और आरोप लगाया कि परियोजना पूरी करने में चार साल से अधिक की देरी की गई है और इन्होंने अपार्टमेंट के कब्जे और ब्याज पर अपना दावा पेश किया।

याचिकाकर्ता ने प्राधिकरण के समक्ष आपत्ति करते हुए कहा कि यह परियोजना “चालू परियोजना” की परि के दायरे में नहीं आती है जैसा कि उप्र रेरा, 2016 के नियम 2 के तहत परिभाषित है।

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