देश की खबरें | गणतंत्र दिवस: कर्तव्य पथ पर भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विविधता, सैन्य शक्ति का प्रदर्शन

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नयी दिल्ली, 26 जनवरी कर्तव्य पथ पर रविवार को 76वें गणतंत्र दिवस समारोह में भारत की नयी सामरिक मिसाइल ‘‘प्रलय’’, टी-90 टैंक और युद्ध के मैदान में तीनों सेनाओं के बीच तालमेल तथा समृद्ध सांस्कृतिक विविधता, सैन्य शक्ति, आर्थिक प्रगति और विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी जैसे क्षेत्रों में की गई प्रगति को प्रदर्शित किया गया।

हर साल की तरह, सैन्य साजोसामान 90 मिनट की रंगारंग परेड का मुख्य आकर्षण रहा, जो पूर्वाह्न 10.30 बजे शुरू हुई।

वीवीआईपी मंच पर, राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के साथ इंडोनेशिया के राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो भी उपस्थित थे, जो इस साल के समारोह के लिए मुख्य अतिथि थे।

उनके देश (इंडोनेशिया) के सैन्य बैंड की एक टुकड़ी ने परेड का नेतृत्व किया।

मुर्मू और सुबियांतो, पारंपरिक बग्घी में सवार होकर कर्तव्य पथ पर पहुंचे। यह परंपरा 40 साल के अंतराल के बाद 2024 में फिर से शुरू की गई थी। वे भारतीय सेना की सबसे सीनियर रेजिमेंट, राष्ट्रपति के अंगरक्षक दल के सुरक्षा घेरे में थे।

इस अवसर पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, केंद्रीय मंत्री, देश के शीर्ष सैन्य अधिकारी, विदेशी राजनयिक, वरिष्ठ अधिकारी और देश-विदेश के कई गणमान्य व्यक्ति भी उपस्थित थे। परेड और हेलीकॉप्टर एवं लड़ाकू विमानों की फ्लाई पास्ट देखने के लिए सुबह ही हजारों की संख्या में लोग पहुंच चुके थे।

सी-130जे सुपर हरक्यूलिस, सी-295, सी-17 ग्लोबमास्टर, डोर्नियर, एएन-32, राफेल, जगुआर और सुखोई-30 सहित अन्य विमानों ने फ्लाईपास्ट में भाग लिया।

सुबियांतो गणतंत्र दिवस समारोह में शरीक होने वाले इंडोनेशिया के चौथे राष्ट्रपति हैं। इंडोनेशिया के पहले राष्ट्रपति सुकर्णो 1950 में, भारत के पहले गणतंत्र दिवस समारोह में मुख्य अतिथि थे।

अपनी तरह के पहले प्रदर्शन में 5,000 से अधिक लोक एवं आदिवासी कलाकारों ने देश के विभिन्न हिस्सों की 45 नृत्य शैलियों का प्रदर्शन किया। ‘‘जयति जय मम भारतम’’ शीर्षक वाली 11 मिनट की सांस्कृतिक प्रस्तुति को संगीत नाटक अकादमी ने तैयार किया था।

लकड़ी के खिलौनों से लेकर महाकुंभ तक -- राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की 16 झांकियां और केंद्रीय मंत्रालयों, विभागों और संगठनों की 15 झांकियों में देश की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत एवं विविध परंपराओं की झलक देखने को मिली।

इसके अलावा, ब्रह्मोस, पिनाका और आकाश सहित कुछ अत्याधुनिक रक्षा प्रणालियों का भी प्रदर्शन किया गया। साथ ही सेना की युद्ध निगरानी प्रणाली ‘‘संजय’’ और रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) की सतह से सतह पर मार करने वाली सामरिक मिसाइल ‘‘प्रलय’’ ने पहली बार परेड में अपनी उपस्थिति दर्ज कराई।

टी-90 ‘‘भीष्म’’ टैंक, सारथ (पैदल सेना को एक जगह से दूसरी जगह ले जाने वाला वाहन बीएमपी-2), ‘शॉर्ट-स्पैन ब्रिजिंग सिस्टम’ 10 मीटर, नाग मिसाइल प्रणाली, मल्टी-बैरल रॉकेट-लॉन्चर सिस्टम ‘‘अग्निबाण’’ और ‘‘बजरंग’’ (हल्के विशिष्ट वाहन) को भी परेड में गौरवपूर्ण स्थान मिला।

देश ने संविधान लागू होने के 75 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में ‘‘स्वर्णिम भारत : विरासत और विकास’’ की थीम पर आधारित ‘‘विरासत’’ और ‘‘विकास’’ का प्रतीकात्मक संगम भी प्रदर्शित किया।

इससे पहले, प्रधानमंत्री मोदी ने राष्ट्रीय समर स्मारक पर पुष्पचक्र अर्पित कर देश के शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित की।

प्रधानमंत्री ने इस अवसर पर सफेद कुर्ते-पायजामे के साथ गहरे भूरे रंग का बंद गले का कोट और लाल-पीले रंग का साफा पहना हुआ था तथा विशिष्ट अवसरों पर चमकीला व रंग-बिरंगा साफा पहनने की अपनी परंपरा को जारी रखा।

देश की विविधता प्रदर्शित करते हुए रंग-बिरंगे परिधान पहने 300 सांस्कृतिक कलाकारों ने कर्तव्य पथ पर ‘सारे जहां से अच्छा’ की धुन पर मार्च करते हुए 76वें गणतंत्र दिवस परेड की शुरुआत की।

ये कलाकार देश के विभिन्न हिस्सों के लोकसंगीत से जुड़े वाद्ययंत्र बजा रहे थे।

इस अवसर पर, दिल्ली क्षेत्र के जनरल ऑफिसर कमांडिंग लेफ्टिनेंट जनरल भवनीश कुमार परेड कमांडर थे, जबकि दिल्ली क्षेत्र के चीफ ऑफ स्टाफ मेजर जनरल सुमित मेहता सेकेंड-इन-कमांड थे।

पहली बार, गणतंत्र दिवस परेड के दौरान कर्तव्य पथ पर सेना के तीनों अंगों (थलसेना, वायुसेना और नौसेना) के बीच तालमेल बढ़ाने पर भारत के ध्यान केंद्रित करने का चित्रण करने वाली झांकी निकाली गई।

झांकी में स्वदेशी अर्जुन युद्ध टैंक, तेजस लड़ाकू विमान और अत्याधुनिक हल्के हेलीकॉप्टर, विध्वंसक आईएनएस विशाखापत्तनम के साथ सैन्य अभियान का प्रदर्शन करते हुए युद्धक्षेत्र के परिदृश्य को प्रदर्शित किया गया।

गणतंत्र दिवस समारोह में राष्ट्र ने अपनी सैन्य शक्ति का प्रदर्शन किया। इसमें विशिष्ट मार्चिंग टुकड़ियां, मिसाइलें और विभिन्न स्वदेशी हथियार शामिल थे।

घुड़सवार दस्ते का नेतृत्व लेफ्टिनेंट अहान कुमार ने किया। वर्ष 1953 में स्थापित 61 कैवलरी दुनिया में एकमात्र सेवारत सक्रिय घुड़सवार रेजिमेंट है। इसके बाद नौ टुकड़ियों और नौ मार्चिंग टुकड़ियों ने परेड की।

टैंक टी-90 भीष्म, एनएजी मिसाइल प्रणाली, ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल, पिनाका मल्टी-लॉन्चर रॉकेट प्रणाली, अग्निबाण मल्टी-बैरल रॉकेट लॉन्चर, आकाश हथियार प्रणाली, एकीकृत युद्धक्षेत्र निगरानी प्रणाली और ‘ऑल-टेरेन व्हीकल’ (चेतक) परेड का हिस्सा थे।

हल्के विशेष वाहन ‘बजरंग’, पर लगे पैदल सेना मोर्टार सिस्टम ‘ऐरावत’, त्वरित प्रतिक्रिया बल वाहन नंदीघोष और त्रिपुरांतक तथा ‘शॉर्ट-स्पैन ब्रिजिंग सिस्टम’ को भी प्रदर्शित किया गया।

सेना की मार्चिंग टुकड़ियों में ‘ब्रिगेड ऑफ द गार्ड्स’, जाट रेजिमेंट, गढ़वाल राइफल्स, महार रेजिमेंट, जम्मू-कश्मीर राइफल्स रेजिमेंट और सिग्नल कोर शामिल थे।

भारतीय नौसेना की टुकड़ी में 144 कर्मी शामिल थे, जिनका नेतृत्व लेफ्टिनेंट कमांडर साहिल अहलूवालिया और पलटन कमांडर के रूप में लेफ्टिनेंट कमांडर इंद्रेश चौधरी, लेफ्टिनेंट कमांडर काजल अनिल भरानी और लेफ्टिनेंट देवेंद्र ने किया।

भारतीय वायुसेना की टुकड़ी में स्क्वाड्रन लीडर महेंद्र सिंह गराती के नेतृत्व में चार अधिकारी और 144 कर्मी शामिल थे। इसके बाद ‘‘बाज फॉर्मेशन’’ में तीन मिग-29 विमानों द्वारा ‘फ्लाई-पास्ट’ किया गया।

दो परमवीर चक्र पुरस्कार विजेता -- सूबेदार मेजर एवं मानद कैप्टन योगेंद्र सिंह यादव (सेवानिवृत्त) और सूबेदार मेजर संजय कुमार (सेवानिवृत्त), दोनों कारगिल युद्ध के नायक -- और अशोक चक्र पुरस्कार विजेता लेफ्टिनेंट कर्नल जस राम सिंह (सेवानिवृत्त) भी परेड का हिस्सा थे।

परेड का समापन कैप्टन आशीष राणा ने किया, जिन्होंने सिग्नल कोर से ‘‘द डेयर डेविल्स’’ की टुकड़ी का नेतृत्व किया, जिसमें कैप्टन डिंपल सिंह भाटी उनके ठीक पीछे थीं।

टुकड़ी में शामिल सैन्य कर्मियों ने कई मोटरसाइकिल पर हैरतअंगेज करतब दिखाए। कैप्टन भाटी ने चलती मोटरसाइकिल पर 12 फुट ऊंची सीढ़ी के सहारे खड़े होकर राष्ट्रपति मुर्मू को सलामी दी, ऐसा करने वाली वह सेना की पहली महिला अधिकारी हैं।

कर्तव्य पथ पर भारत की सैन्य शक्ति के साथ ही सांस्कृतिक समृद्धि की भी झलक देखने को मिली और कई राज्यों तथा केंद्र सरकार के विभागों की झांकियों में यह देखने को मिली।

उत्तर प्रदेश, बिहार, पश्चिम बंगाल, पंजाब, गुजरात, झारखंड, उत्तराखंड और कुछ अन्य राज्यों की झांकियों में उन प्रदेशों की संस्कृति एवं विरासत के साथ विकास के नये आयाम को दर्शाया गया।

गणतंत्र दिवस परेड में उत्तर प्रदेश की झांकी में ‘समुद्र मंथन’, ‘अमृत कलश’ और संगम तट पर डुबकी लगाते साधु-संतों के प्रदर्शन के साथ प्रयागराज में जारी महाकुंभ को प्रदर्शित किया गया। उत्तर प्रदेश की झांकी में ‘विकास’ और ‘विरासत’ का अद्धभुत ‘संगम’ भी प्रदर्शित किया गया।

पश्चिम बंगाल की झांकी में महिलाओं को मासिक आय की गारंटी प्रदान करने वाली राज्य की ‘‘लक्ष्मी भंडार’’ योजना और लोक कलाकारों को बढ़ावा देने वाली “लोक प्रसार प्रकल्प” पहल को दर्शाया गया।

गणतंत्र दिवस परेड का हिस्सा रही केंद्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्रालय की एक झांकी के माध्यम से सरकार की प्रमुख योजनाओं की सफलता को प्रदर्शित किया गया।

सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय की झांकी में भारत के संविधान के प्रति सम्मान व्यक्त करने के साथ इसे देश की विरासत, विकास और भविष्य के लिए मार्गदर्शन की आधारशिला के रूप में चित्रित किया गया।

जनजातीय कार्य मंत्रालय ने अपनी झांकी के माध्यम से कर्तव्य पथ पर आदिवासी नेता भगवान बिरसा मुंडा की 150वीं जयंती के उपलक्ष्य पर मनाए जा रहे जनजाति गौरव वर्ष की झलक पेश की।

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