ताजा खबरें | जननीय प्रौद्योगिकी (विनियमन) विधेयक व सरोगेसी (विनियमन) विधेयक को रास की मंजूरी
Get latest articles and stories on Latest News at LatestLY. राज्यसभा ने बुधवार को सहायक प्रजनन प्रौद्योगिकी से संबंधित विभिन्न क्लीनिक के नियमन और इस प्रक्रिया के व्यावसायिक दुरूपयोग पर काबू के लिए कानूनी प्रावधान के उद्देश्य से लाए गए जननीय प्रौद्योगिकी (विनियमन) विधेयक और सरोगेसी (विनियमन) विधेयक को ध्वनिमत से मंजूरी प्रदान कर दी।
नयी दिल्ली, आठ दिसंबर राज्यसभा ने बुधवार को सहायक प्रजनन प्रौद्योगिकी से संबंधित विभिन्न क्लीनिक के नियमन और इस प्रक्रिया के व्यावसायिक दुरूपयोग पर काबू के लिए कानूनी प्रावधान के उद्देश्य से लाए गए जननीय प्रौद्योगिकी (विनियमन) विधेयक और सरोगेसी (विनियमन) विधेयक को ध्वनिमत से मंजूरी प्रदान कर दी।
स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री मनसुख मांडविया ने दोनों विधेयकों पर साथ-साथ हुई चर्चा का जवाब देते हुए कहा कि देश में ऐसे कई क्लीनिक ऐसे चल रहे हैं जो कृत्रिम गर्भाधान (आईवीएफ) सहित सहायक प्रजनन तकनीक का उपयोग कर रहे हैं और इनके लिये कोई नियमन नहीं है और अगर इसका नियमन नहीं किया गया तब यह उद्योग का रूप ले सकता है।
मांडविया ने कहा ‘‘दुनिया के अलग अलग हिस्सों से लोग आ कर देश में सरोगेसी तथा ‘एआरटी’ का लाभ उठाते थे। यह देश में लंबे समय से चल रहा था लेकिन दुरूपयोग रोकने के लिए इसका नियमन जरूरी था। दोनों विधेयक महिलाओं के सम्मान, उनकी गरिमा तथा उनकी सुरक्षा के लिये महत्वपूर्ण हैं।’’
उन्होंने कहा ‘‘आंध्र प्रदेश में 74 साल की महिला ने जुड़वां बच्चों को जन्म दिया था। अधिक उम्र में मां बनने के बाद महिला अपने बच्चों की देखभाल कैसे कर पाएगी? देश में आईवीएफ केंद्र हैं लेकिन नियमन नहीं होने से अन्य घटनाक्रम जैसे ‘गेमिट्स की मिक्सिंग’ आदि हो जाती थी जो सभ्य समाज के लिए उचित नहीं है।’’
उन्होंने कहा कि सरोगेसी के जरिये मां बन कर महिला दूसरे को संतान सुख देती है लेकिन बच्चे में कोई विकार होने पर बच्चे को छोड़ दिये जाने की भी घटनाएं सामने आईं।
मंडाविया ने कहा ‘‘प्रवर समिति ने कहा था कि एआरटी विधेयक के बिना सरोगेसी विधेयक का कोई मतलब नहीं है। इसके बाद जननीय प्रौद्योगिकी (विनियमन) विधेयक भी लाया गया। स्थायी समितियों की सिफारिशें भी स्वीकार की गईं।
उन्होंने कहा ‘‘विवाहित महिलाएं, विधवाएं सरोगेसी का लाभ ले सकती हैं । तलाकशुदा महिलाएं एआरटी और परिस्थितियों के अनुसार, सरोगेसी का भी लाभ ले सकती हैं। विदेशी दंपतियों को सरोगेसी के लिए हमारे देश के कानून का पालन करना होगा। बच्चे में कोई विकार होने पर अब उसे छोड़ा नहीं जा सकेगा।’’
मंत्री ने कहा कि 23 से 50 साल तक की उम्र की महिलाएं सरोगेसी का रास्ता चुन सकती हैं। ‘‘विधेयक में प्रावधान हैं कि सरोगेट मां बनने के लिए महिला को विवाहित होना चाहिए। यह प्रक्रिया मातृत्व धारण करने से संबंधित है अत: इसका वाणिज्यीकरण नहीं होना चाहिए। इसलिए प्रावधान किया गया है कि महिला एक बार ही सरोगेट मां बन सकती है। ऐसे में उसका शोषण होने की आशंका भी नहीं होगी। स्पर्म और अंडे दान देने वालों के लिए भी उम्र तय की गई है।’’
उन्होंने कहा कि सरोगेट मां का स्वास्थ्य भी अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने बताया ‘‘एक घटना में, 23 साल की एक युवती की अंडाशय उद्वीपन (ओवरी स्टीम्यूलेशन) के दौरान मौत हो गई थी। तमाम जोखिमों को देखते हुए दोनों विधयेकों में महिला के लिए बीमा का प्रावधान किया गया है। सरोगेट मां का बीमा 36 माह का होगा ताकि उसके स्वास्थ्य की समुचित देखभाल हो।’’
स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री ने कहा कि कोई भी अगर अनैतिक काम करता है तब उसे बख्शा नहीं जा सकता और इस संबंध में सजा का प्रावधान होना ही चाहिए। उन्होंने कहा कि नियमों के उल्लंघन पर सजाओं का प्रावधान भी इन विधेयकों में है।
उन्होंने सदस्यों से अनुरोध किया कि वे सर्वसम्मति से इन विधेयकों को पारित करें। उनके जवाब के बाद सदन ने ध्वनिमत से दोनों विधेयकों को मंजूरी दे दी।
मनीषा ब्रजेन्द्र
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