देश की खबरें | पूर्व सैनिक के साथ पुलिस उत्पीड़न के मामले में डीजीपी से जवाब तलब

Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने उत्तर प्रदेश के पुलिस महानिदेशक को एक पूर्व सैनिक द्वारा दायर याचिका पर जवाब देने का बृहस्पतिवार को निर्देश दिया। इस याचिका में आरोप है कि प्रदेश की पुलिस ने पूर्व सैनिक को बुरी तरह से पीटा और उसका उत्पीड़न किया।

प्रयागराज, नौ जुलाई इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने उत्तर प्रदेश के पुलिस महानिदेशक को एक पूर्व सैनिक द्वारा दायर याचिका पर जवाब देने का बृहस्पतिवार को निर्देश दिया। इस याचिका में आरोप है कि प्रदेश की पुलिस ने पूर्व सैनिक को बुरी तरह से पीटा और उसका उत्पीड़न किया।

चोट की रिपोर्ट और पूर्व सैनिक द्वारा दर्ज कराई गई प्राथमिकी देखने के बाद अदालत ने कहा, ‘‘प्रथम दृष्टया यह बहुत दुखद स्थिति दर्शाती है। प्रथम दृष्टया यह संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत याचिकाकर्ता को मिले मौलिक अधिकारों का आरोपी पुलिस अधिकारियों और पुलिस कर्मियों द्वारा हनन को दर्शाता है।”

इस मामले को गंभीर मानते हुए और इस पर गंभीरता से विचार की जरुरत बताते हुए न्यायमूर्ति सूर्य प्रकाश केसरवानी और न्यायमूर्ति गौतम चौधरी की पीठ ने पुलिस महानिदेशक को अपना निजी हलफनामा दाखिल कर इस मामले में की गई कार्रवाई बताने को कहा।

पूर्व सैनिक रेशम सिंह द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए अदालत ने महाधिवक्ता को इस मामले में अदालत का सहयोग करने का अनुरोध किया और 12 जुलाई, 2021 को इस मामले की अगली सुनवाई नए सिरे से करने का निर्देश दिया।

उक्त घटना का वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हुआ है।

तथ्यों के मुताबिक, 2 मई, 2021 को रेशम सिंह अपनी मां और दो बहनों के साथ पीलीभीत से लखीमपुर खीरी जा रहे थे और सुबह करीब नौ बजे पुलिस अधिकारियों ने उन्हें रोक लिया और कार के कागजात दिखाने को कहा।

कागजात निकालने में देरी होने पर पुलिस अधिकारियों ने रेशम सिंह और उसके परिजनों को गाली देना शुरू कर दिया। गाली देने से मना करने पर पुलिस अधिकारी आक्रोश में आ गए और रेशम सिंह एवं उनके परिजनों को जिंदगी भर का सबक सिखाने की धमकी देते हुए उन्हें मारना पीटना शुरू कर दिया और पुलिस थाने ले गए।

याचिका के अनुसार पुलिस अधिकारियों ने रेशम सिंह को खाट से बांधा और लगातार दो घंटे तक डंडों से बुरी तरह से पीटा। इससे उसकी पीठ और कमर में गंभीर चोटें आईं। इसके बाद पूर्व सैनिक ने उन पुलिस अधिकारियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराई और सेना के अस्पताल में अपना इलाज कराया।

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