जमीन पर नहीं उतर रहे सरकार के राहत के दावे : अखिलेश

अखिलेश ने यहां एक बयान में कहा कि कोरोना वायरस के कारण जारी लॉकडाउन से जनजीवन बुरी तरह अस्त- व्यस्त है। केन्द्र और राज्य सरकार के राहत के तमाम वादे धरातल पर उतरते नहीं दिखाई दे रहे हैं। ऐसी स्थिति में सरकार से कुछ सवाल अवश्य पूछे जाएंगे।

जमात

लखनऊ, 24 अप्रैल समाजवादी पार्टी (सपा) के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने शुक्रवार को आरोप लगाया कि लॉकडाउन के कारण बदहाल लोगों को राहत पहुंचाने के केंद्र और उत्तर प्रदेश सरकार के दावे जमीन पर उतरते नहीं दिख रहे हैं।

अखिलेश ने यहां एक बयान में कहा कि कोरोना वायरस के कारण जारी लॉकडाउन से जनजीवन बुरी तरह अस्त- व्यस्त है। केन्द्र और राज्य सरकार के राहत के तमाम वादे धरातल पर उतरते नहीं दिखाई दे रहे हैं। ऐसी स्थिति में सरकार से कुछ सवाल अवश्य पूछे जाएंगे।

उन्होंने कहा कि हालात पर पर्दा डालने की शुतुरमुर्गी चाल से संकट कम होने के बजाय और बढ़ेगा।

उन्होंने कहा कि लॉकडाउन के फलस्वरूप अन्य राज्यों से बड़ी संख्या में लोग पलायन कर उत्तरप्रदेश में आ गए हैं, उनमें काफी लोग बीमार हो गए हैं। उनके उपचार की व्यवस्था नहीं है। उनकी जांच भी नहीं हो रही है।

उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि रोजी-रोटी की विषम समस्या से जूझ रहे श्रमिकों को मनरेगा में काम देने का एलान तो है, लेकिन उन्हें काम नहीं मिल रहा है। रोज कमाकर गुजारा करने वाले दिहाड़ी मजदूरों के परिवारों का जीना मुहाल है। अभी तक उनको मदद नहीं मिल पाई है। राशन कम या खराब मिलने की शिकायतें तो आम हैं।

उन्होंने कहा कि गेहूं के क्रय केन्द्र कागजों में खुले हैं। किसान को बेमौसम बरसात और ओलावृष्टि से हुई फसल की क्षति का भी मुआवजा नहीं मिल रहा है। तकनीकी बहानों से उसकी आर्थिक मदद रोकी जा रही है।

अखिलेश ने कहा कि देश में सिर्फ कोरोना वायरस के ही संक्रमण का खतरा नहीं है बल्कि काफी संख्या में लोगों को दिल, किडनी, कैंसर, लिवर की गम्भीर बीमारियां है। अस्पतालों में ओपीडी बंद है, आपरेशन स्थगित हैं। केवल सर्दी, जुकाम-खांसी और तेज ज्वर के मरीज ही देखे जा रहे हैं।

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