विदेश की खबरें | बार-बार संक्रमण की चपेट में आना कुछ लोगों के लिए अधिक जोखिम भरा साबित हो सकता है
Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on world at LatestLY हिन्दी. कैम्ब्रिज, 30 जून (द कन्वरसेशन) कोविड-19 महामारी का सामना करते हुए दो साल से अधिक समय गुजर चुका है और इस दौरान सार्स-कोव-2 (वह वायरस जिसके कारण कोविड-19 बीमारी होती है) के स्वरूप में धीरे-धीरे बदलाव हुए हैं, जिसके चलते वायरस ने प्रतिरोधक क्षमता को इस कदर प्रभावित किया कि लोग कई बार संक्रमण की चपेट में आये।
कैम्ब्रिज, 30 जून (द कन्वरसेशन) कोविड-19 महामारी का सामना करते हुए दो साल से अधिक समय गुजर चुका है और इस दौरान सार्स-कोव-2 (वह वायरस जिसके कारण कोविड-19 बीमारी होती है) के स्वरूप में धीरे-धीरे बदलाव हुए हैं, जिसके चलते वायरस ने प्रतिरोधक क्षमता को इस कदर प्रभावित किया कि लोग कई बार संक्रमण की चपेट में आये।
हममें से कई लोग कोरोना वायरस संक्रमण की चपेट में आए हैं, और इसमें भी कोई आश्चर्य की बात नहीं है कि कई लोगों को वायरस ने दो या तीन बार अपनी चपेट में ले लिया। ब्रिटेन में खासतौर पर यह सामने आया कि 2021 में वायरस के ओमीक्रोन स्वरूप के प्रकोप के बाद लोग दो या तीन बार संक्रमित हुए।
हालांकि, कई लोग यह जानने को उत्सुक होंगे कि संक्रमित होने के बाद एक मरीज पहली बार संक्रमण की चपेट में आने की तुलना में कम दिक्कतें महसूस करता है या उसे और अधिक परेशानियों का सामना करना पड़ता है? यह सवाल सार्वजनिक स्वास्थ्य के संदर्भ में भी काफी अहम है।
अगर कोई एक बार से अधिक संक्रमित हुआ है और संक्रमण के लक्षण अधिक गंभीर हैं तो आशंका जताई जा सकती है कि महामारी गंभीर रूप लेगी क्योंकि लोग बार-बार बीमार पड़ रहे हैं। गंभीर रूप से बीमार करने वाली महामारी की लहर को रोकने का एकमात्र तरीका ‘‘शून्य-कोविड’’ रणनीति को अपनाना है।
वहीं, अगर कोई व्यक्ति बार-बार संक्रमण की चपेट में आता है और हर बार संक्रमण का प्रभाव कम होता जाता है, तो संभावना है कि बिना किसी उपाय के महामारी खुद ही कमजोर पड़ रही है।
ऐसे में साक्ष्य क्या कहते हैं?
हालिया प्रकाशित एक अध्ययन में पाया गया है कि बार-बार संक्रमण की चपेट में आने के दौरान लक्षण शुरुआती संक्रमण के मुकाबले अधिक गंभीर रहे। हालांकि, अध्ययनकर्ताओं ने लक्षणों की गंभीरता को खास तवज्जो नहीं दी और उन्होंने संक्रमित होने के बाद मौत की आशंका, अस्पताल में भर्ती होने की जरूरत और छह महीने के भीतर अन्य स्वास्थ्य संबंधी दिक्कतों पर ध्यान केंद्रित किया। अध्ययनकर्ताओं ने निष्कर्ष निकाला कि बार-बार संक्रमण की चपेट में आने से उक्त दिक्कतें और अधिक गंभीर रूप लेती गईं।
इस अध्ययन का उच्च स्तरीय विश्लेषण नहीं किया गया है लेकिन फिर भी यह एक अच्छी खबर नहीं है। इस अध्ययन में अमेरिकी सेना के 2,90,000 से अधिक पूर्व कर्मियों के इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड के आंकड़ों की पड़ताल की गई जिनमें से प्रत्येक कर्मी कम से कम एक बार संक्रमित हुआ था।
पहले चरण में जिस समूह को लेकर अध्ययन किया गया, वह पहले से ही उच्च जोखिम वाली श्रेणी में था क्योंकि उनकी औसत आयु 60 वर्ष थी, लगभग 20 फीसदी धूम्रपान करते थे और संक्रमण की चपेट में आने वाले 80 फीसदी का टीकाकरण नहीं हुआ था। इसलिए, इस निष्कर्ष को आम लोगों पर लागू नहीं किया जा सकता।
दूसरे चरण वाले समूह में दोबारा संक्रमण की चपेट में आने के तुरंत बाद वाली स्थिति का अध्ययन किया गया जबकि शुरुआती संक्रमण वाले समूह के लोगों का संक्रिमत होने के 30 दिन तक अध्ययन नहीं किया गया था।
ऐसे में यह अध्ययन क्या दर्शाता है? यह प्रदर्शित करता है कि दोबारा संक्रमण की चपेट में आना आपकी स्वास्थ्य समस्याओं से जुड़े जोखिम को और बढ़ा सकता है। हालांकि, यहां यह भी ध्यान रखना होगा कि जिस समूह पर अध्ययन किया गया, वह पहले से ही जोखिम वाली श्रेणी में शुमार था।
(यह सिंडिकेटेड न्यूज़ फीड से अनएडिटेड और ऑटो-जेनरेटेड स्टोरी है, ऐसी संभावना है कि लेटेस्टली स्टाफ द्वारा इसमें कोई बदलाव या एडिट नहीं किया गया है)