रिकॉर्ड तोड़ हीटवेव से फ्रांस में हुईं  1,000 अतिरिक्त मौतें
प्रतीकात्मक तस्वीर (Photo Credit: Image File)

हीटवेव की मार झेल रहे यूरोप में गर्मी के कारण लोगों की जानें भी जा रही हैं. फ्रांस की एक स्वास्थ्य एजेंसी ने जानकारी दी है कि इस हीटवेव के कारण वहां कई बुजुर्गों की मौत हुई है.फ्रांस की पब्लिक हेल्थ एजेंसी ने रविवार को कहा कि पूरे यूरोप में चल रही हीटवेव के दौरान फ्रांस में 1,000 अतिरिक्त मौतें दर्ज की गई हैं. साथ ही एजेंसी की ओर से चेतावनी दी गई है कि वास्तविक आंकड़ा इससे अधिक होने की संभावना है. अतिरिक्त मौतों पर ब्यौरा साझा करते हुए एजेंसी ने कहा कि हीटवेव से जिनकी मौत हुई उनमें ज्यादातर बुजुर्ग लोग शामिल थे.

एजेंसी को आशंका है कि इस भीषण गर्मी में घरों में होने वाली मौतों के बारे में अधिक जानकारी सामने आने पर पर मरनेवालों की संख्या और बढ़ सकती है. एजेंसी के मुताबिक अधिकांश मौतें 65 वर्ष और उससे अधिक आयु के लोगों की हुईं लेकिन अत्यधिक गर्मी का स्वास्थ्य पर प्रभाव आबादी के सभी वर्गों पर पड़ा है. आंकड़े यह भी बताते हैं कि फ्रांस में घर पर मरने वाले लोगों की संख्या में 40 प्रतिशत की बढ़त दर्ज की गई है.

हालांकि, फ्रांस की मौसम एजेंसी ने कहा कि देश के अधिकांश हिस्सों में अत्यधिक गर्मी कम हो गई है, लेकिन पूर्वोत्तर के कुछ इलाके अभी भी हीटवेव की चेतावनी के दायरे में हैं. स्वास्थ्य मंत्री स्टेफनी रिस्ट ने ला ट्रिब्यून अखबार को बताया कि मौसम के सामान्य होने के बाद भी लू का प्रभाव 10 दिनों तक बना रह सकता है. उन्होंने फ्रांसीसी ब्रॉडकास्टर बीएफएम से कहा, "हीटवेव दौर अभी खत्म नहीं हुआ है."

यूरोप के अधिकांश देश इस वक्त भीषण गर्मी की स्थिति का सामना कर रहे हैं. इस गर्मी में दर्जनों लोगों की मौत हो चुकी हैं. साथ ही इसने तापमान के सारे रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं, बिजली उत्पादन को बाधित किया है और बुनियादी ढांचे को भी नुकसान पहुंचाया है. वैज्ञानिकों ने कहा है कि 20 जून से शुरू हुई यह हीटवेव यूरोप में दर्ज की गई अब तक की सबसे खराब हीटवेव थी.

जर्मनी में अब तक की सबसे गर्म रात

मौसम विभाग के अनुमानों के अनुसार, यूरोप में रविवार को करीब 20 करोड़ लोग कम से कम 35 डिग्री सेल्सियस तापमान का सामना कर रहे हैं. यह गर्मी जर्मनी, चेक रिपब्लिक, हंगरी और पोलैंड में खासतौर से बेहद आक्रमक रूप में है. वहीं, जर्मनी के मौसम विभाग ने बताया है कि 27 जून की रात जर्मनी में अब तक की सबसे गर्म रात के तौर पर दर्ज की गई है, जिसमें तापमान 29.4 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया. विभाग के अनुसार यह लगभग 150 साल पहले रिकॉर्ड शुरू होने के बाद से अब तक की सबसे गर्म रात थी.

पूरे यूरोप को प्रभावित करने वाले हीटवेव के दौरान जर्मनी ने हाल के दिनों में गर्मी के कई रिकॉर्ड तोड़े हैं. देश पिछले कई दिनों से लू की चपेट में है, जहां तापमान 40 डिग्री के आसपास बना हुआ है और रात में भी कोई राहत नहीं मिल रही है. सोमवार को मौसम थोड़ा ठंडा होने की उम्मीद है, जब अधिकतम तापमान केवल 29 से 32 डिग्री तक पहुंचने का अनुमान है. मौसम विभाग का कहना है कि जलवायु परिवर्तन के नतीजे के रूप में जर्मनी में लंबे समय तक चलने वाली लू जैसी चरम मौसम की घटनाएं अधिक होने लगी हैं. साथ ही आंकड़े बताते हैं कि 30 डिग्री से ऊपर के दिनों की औसत संख्या में भी बढ़ोतरी दर्ज की गई है.

हीटवेव के जिम्मेदार खुद इंसान?

वैज्ञानिकों ने कहा है कि यूरोप की जानलेवा और बार-बार आने वाली हीटवेव इंसानों के जीवाश्म ईंधन जलाने से होने वाली ग्लोबल वॉर्मिंग का एक स्पष्ट संकेत है. उन्होंने चेतावनी दी है कि हीटवेव अब और अधिक बार, लंबे समय तक और अधिक तीव्र होने वाली हैं. अंतरराष्ट्रीय संस्था वर्ल्ड वेदर ऐट्रिब्यूशन के वैज्ञानिकों ने एक रिपोर्ट जारी कर ये बात कही है. वैज्ञानिकों के मुताबिक यूरोप के करीब 45 फीसदी शहर या तो गर्मी का रिकॉर्ड तोड़ने वाले हैं या पहले ही तोड़ चुके हैं. साथ ही इस बार के हीटवेव अब तक रिकॉर्ड किए गए सबसे भीषण हीटवेव माने जा रहे हैं.

दूसरी प्राकृतिक आपदाओं के मुकाबले हीटवेव के कारण यूरोप में ज्यादा मौतें होती हैं. 2022 की गर्मियों ने यूरोप में 60,000 लोगों की जान ली थी. पश्चिमी यूरोप में जून का महीना खासतौर पर हर साल के साथ और अधिक गर्म होता जा रहा है. वैज्ञानिकों ने चेतावनी जारी की है कि इस बार गर्मी ने यह दिखा दिया है कि तापमान अब इंसानों के सहन करने की क्षमता से अधिक होता जा रहा है. उनके विश्लेषण में यह भी कहा गया है कि मौजूदा पीढ़ी के सामने ही अत्यधिक गर्मी तेजी से बढ़ रही है. ऐसी घटनाएं 2003 के बाद से दस से सैकड़ों गुना अधिक संभावित हो गई हैं और महज 50 साल पहले तो ऐसी गर्मी लगभग नामुमकिन थी.