देश की खबरें | प्राप्तकर्ता को आश्वस्त किया जाना चाहिए कि चढ़ाया जा रहा रक्त साफ है: न्यायालय

नयी दिल्ली, छह सितंबर ट्रांसजेंडर, पुरुषों के साथ यौन संबंध रखने वाले पुरुषों और महिला यौनकर्मियों को रक्तदाताओं से बाहर रखने वाले 2017 के दिशानिर्देशों को चुनौती देने वाली एक याचिका पर सुनवाई करते हुए उच्चतम न्यायालय ने बुधवार को कहा कि रक्त के प्राप्तकर्ता को आश्वस्त किया जाना चाहिए कि जो रक्त चढ़ाया जा रहा है वह साफ है।

न्यायमूर्ति संजय किशन कौल और न्यायमूर्ति सुधांशु धूलिया की पीठ ने कहा कि वह याचिका पर नोटिस जारी नहीं कर रही है और इसे इस मुद्दे को उठाने वाली एक अन्य लंबित याचिका के साथ नत्थी कर दिया।

शीर्ष अदालत ने मार्च 2021 में रक्त दाता चयन और रक्त दाता रेफरल के लिए 2017 के दिशानिर्देशों को चुनौती देने वाली एक अलग याचिका पर केंद्र और अन्य से जवाब मांगा था, जिसमें तीन श्रेणियों के लोगों को रक्त दाता से बाहर रखा गया था।

बुधवार को याचिका पर सुनवाई के दौरान महाराष्ट्र निवासी याचिकाकर्ता के वकील ने शीर्ष अदालत को बताया कि कुछ श्रेणियों के लोगों को रक्तदान से बाहर करने के दिशानिर्देशों ने उन पर प्रतिकूल प्रभाव डाला है।

पीठ ने कहा, ‘‘रक्त प्राप्तकर्ता को आश्वस्त किया जाना चाहिए कि जो रक्त चढ़ाया जा रहा है वह साफ रक्त है।’’

पीठ ने दिशानिर्देशों में रक्त दाता चयन मानदंड में उल्लिखित ‘‘जोखिम व्यवहार’’ का उल्लेख किया है जो कहता है कि दाता एचआईवी, हेपेटाइटिस बी या सी संक्रमण के लिए ‘‘जोखिम में’’ माना जाने वाला व्यक्ति नहीं होगा।

याचिकाकर्ता के वकील ने कहा कि भेदभावपूर्ण खंड में से एक यह है कि किसी व्यक्ति को रक्तदान करने के लिए अपनी यौन पहचान और रूझान का खुलासा करना होगा।

वकील ने उन दिशानिर्देशों के खिलाफ दलील दी जो ट्रांसजेंडर, पुरुषों के साथ यौन संबंध बनाने वाले पुरुषों और महिला यौनकर्मियों को रक्तदान करने से रोकते हैं।

मार्च 2021 में पिछली याचिका पर सुनवाई करते हुए, न्यायालय ने केंद्र, राष्ट्रीय रक्त संचरण परिषद (एनबीटीसी) और राष्ट्रीय एड्स नियंत्रण संगठन (एनएसीओ) को नोटिस जारी कर मणिपुर के एक ट्रांसजेंडर कार्यकर्ता द्वारा दायर याचिका पर जवाब मांगा था।

याचिका में रक्त दाता चयन और रक्त दाता रेफरल, 2017 के दिशानिर्देशों के खंड को हटाने का अनुरोध करते हुए कहा गया कि यह स्थायी रूप से ट्रांसजेंडर, पुरुषों के साथ यौन संबंध रखने वाले पुरुषों और महिला यौनकर्मियों को दाता बनने से रोकता है क्योंकि उन्हें एचआईवी होने का खतरा था।

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