देश की खबरें | बागी विधायक मामला : उच्च न्यायालय के आदेश के खिलाफ राजस्थान कांग्रेस के मुख्य सचेतक न्यायालय पहुंचे

Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. राजस्थान कांग्रेस के मुख्य सचेतक महेश जोशी ने बर्खास्त उपमुख्यमंत्री सचिन पायलट सहित 19 बागी विधायकों की अयोग्यता की कार्यवाही में उच्च न्यायालय के 24 जुलाई के आदेश को चुनौती देते हुये शुक्रवार को उच्चतम न्यायालय में याचिका दायर की। उच्च न्यायालय ने इन विधायकों के खिलाफ अयोग्यता की कार्यवाही स्थगित रखने का विधानसभा अध्यक्ष को आदेश दिया था।

एनडीआरएफ/प्रतीकात्मक तस्वीर (Photo Credits: ANI)

नयी दिल्ली,31 जुलाई राजस्थान कांग्रेस के मुख्य सचेतक महेश जोशी ने बर्खास्त उपमुख्यमंत्री सचिन पायलट सहित 19 बागी विधायकों की अयोग्यता की कार्यवाही में उच्च न्यायालय के 24 जुलाई के आदेश को चुनौती देते हुये शुक्रवार को उच्चतम न्यायालय में याचिका दायर की। उच्च न्यायालय ने इन विधायकों के खिलाफ अयोग्यता की कार्यवाही स्थगित रखने का विधानसभा अध्यक्ष को आदेश दिया था।

राजस्थान कांग्रेस के मुख्य सचेतक महेश जोशी ने अपील में कहा है कि ये बागी विधायक राज्य में अशोक गहलोत सरकार को गिराने के नापाक प्रयासों में गंभीरतम दलबदल में संलिप्त थे।

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राजस्थान विधानसभा अध्यक्ष सी पी जोशी द्वारा शीर्ष अदालत में अपील दायर करने के दो दिन बाद मुख्य सचेतक महेश जोशी ने अपनी याचिका में अयोग्यता की कार्यवाही के मामले में उच्च न्यायालय के न्यायिक हस्तक्षेप की तीखी आलोचना की और कहा कि यह 10वीं अनुसूची में प्रदत्त अध्यक्ष के अधिकार क्षेत्र का अतिक्रमण है।

अधिवक्ता वरूण चोपड़ा के माध्यम से दायर इस याचिका में महेश जोशी ने कहा है कि कि ‘किहोतो होलोहान प्रकरण’ में 1992 में शीर्ष अदालत के फैसले के आलोक में उच्च न्यायालय का आदेश पहली नजर में ही असंवैधानिक और गैरकानूनी है। वरिष्ठ अधिवक्ता देवदत्त कामत ने इस अपील को अंतिम रूप दिया है।

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अपील में कहा गया है, ‘‘उच्च न्यायालय का (बागी विधायकों की अयोग्यता की कार्यवाही में) यथास्थिति बनाये रखने संबंधी निर्देश का असर संविधान की 10वीं अनुसूची के प्रावधान को प्रभावहीन करने वाला है।’’

महेश जोशी ने अपनी अपील में उच्च न्यायालय के 24 जुलाई के आदेश और सचिन पायलट तथा अन्य की उच्च न्यायालय में लंबित याचिका पर आगे कार्यवाही पर एकपक्षीय रोक लगाने का अनुरोध किया है।

अध्यक्ष के समक्ष अयोग्यता की कार्यवाही की याचिका दायर करने को न्यायोचित बताते हुये मुख्य सचेतक ने अपनी अपील में कह है, ‘‘प्रतिवादियों ने भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस को तोड़ने तथा विधिवत चुनी हुयी कांग्रेस की राजस्थान सरकार को गिराने का गंभीर नापाक प्रयास किया था।’’

अपील में कहा गया है, ‘‘प्रतिवादी (पायलट और अन्य विधायक) नोटिस दिये जाने के बावजूद जानबूझकर कांग्रेस विधायक दल की 13 और 14 जुलाई की बैठकों से अनुपस्थित रहे और मीडिया में प्रतिवादियों द्वारा शक्तिपरीक्षण की मांग सुर्खियों में रहीं। प्रतिवादियों ने यहां तक आरोप लगाया कि कांग्रेस सरकार ने राजस्थान की जनता के साथ छल किया है।’’

अपील में 1992 में किहोतो होलाहान प्रकरण में शीर्ष अदालत की व्यवस्था का विस्तार से जिक्र किया गया है। इस मामले में शीर्ष अदालत ने कहा था कि अयोग्यता की कार्यवाही पर फैसला करने का अधिकार अध्यक्ष का है और इस प्रक्रिया में न्यायिक हस्तक्षेप की इजाजत नहीं है।

राजस्थान विधानसभा अध्यक्ष सी पी जोशी ने 29 जुलाई को उच्च न्यायालय के 24 जुलाई के आदेश के खिलाफ उच्चतम न्यायालय में अपील दायर की थी। उच्च न्यायालय ने कांग्रेस के इन बागी विधायकों को जारी अयोग्यता नोटिस के मामले में यथास्थिति बनाये रखने का निर्देश दिया था।

अध्यक्ष ने अपनी अपील में राजस्थान उच्च न्यायालय के आदेश पर रोक लगाने का अनुरोध करते हुये कहा था कि यह असंवैधानिक है ओर संविधान की 10वीं अनुसूची के तहत अध्यक्ष के अधिकार क्षेत्र में प्रत्यक्ष अतिक्रमण है।

विधानसभा अध्यक्ष ने अधिवक्ता सुनील फर्नाण्डीज के माध्यम से दायर अपनी अपील में दावा किया है कि उच्च न्यायालय का आदेश 10वीं अनुसूची के तहत, सदन की कार्यवाही में सीधा हस्तक्षेप है जिसकी संविधान का अनुच्छेद 212 अनुमति नहीं देता है। अपील में यह भी कहा गया है कि उच्च न्यायालय का आदेश इन बागी विधायकों के मामले में यथा स्थिति बनाये रखने की किसी वजह को उजागर नहीं करता है।

विधानसभा अध्यक्ष ने कांग्रेस की शिकायत पर इन बागी विधायकों को 14 जुलाई को कारण बताओ नोटिस दिया था। कांग्रेस का कहना था कि इन विधायकों ने पार्टी व्हिप का उल्लंघन किया और विधायक दल की दो बैठकों में हिस्सा नहीं लिया है।

सचिन पायलट और अन्य बागी विधायकों ने उन्हें विधानसभा अध्यक्ष से मिले अयोग्यता के नोटिस को उच्च न्यायालय में चुनौती दी थी।

इससे पहले, अध्यक्ष सी पी जोशी ने उच्च न्यायालय के 21 जुलाई के उस आदेश के खिलाफ दायर अपनी याचिका 27 जुलाई को वापस ले ली थी जिसमें उपमुख्यमंत्री पद से बर्खास्त किए जा चुके सचिन पायलट और कांग्रेस के 18 बागी विधायकों को अयोग्य ठहराए जाने की कार्यवाही 24 जुलाई तक स्थगित करने के लिए कहा गया था।

अनूप

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