देश की खबरें | घर खरीदारों से धोखाधड़ी मामले में रामप्रस्थ समूह की 681 करोड़ की संपत्ति कुर्क : ईडी

Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. दिल्ली से सटे हरियाणा के गुरुग्राम से संचालित रामप्रस्थ रियल एस्टेट समूह की 1,900 एकड़ से अधिक भूमि पर फैली 680 करोड़ रुपये से अधिक कीमत की कॉलोनियों और भूखंडों को घर खरीदारों के साथ कथित धोखाधड़ी से जुड़े एक मामले में कुर्क किया गया है। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने शनिवार को यह जानकारी दी।

नयी दिल्ली, 12 जुलाई दिल्ली से सटे हरियाणा के गुरुग्राम से संचालित रामप्रस्थ रियल एस्टेट समूह की 1,900 एकड़ से अधिक भूमि पर फैली 680 करोड़ रुपये से अधिक कीमत की कॉलोनियों और भूखंडों को घर खरीदारों के साथ कथित धोखाधड़ी से जुड़े एक मामले में कुर्क किया गया है। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने शनिवार को यह जानकारी दी।

संघीय एजेंसी ने एक बयान में कहा कि रामप्रस्थ प्रमोटर्स एंड डेवलपर्स प्राइवेट लिमिटेड (आरडीडीपीएल) और समूह की अन्य कंपनियों के खिलाफ एक मामले में धन शोधन निवारण (पीएमएलए) के तहत अनंतिम आदेश जारी किया गया है।

ईडी ने बताया कि कुर्क की गई संपत्तियों में गुरुग्राम के सेक्टर 37डी, सेक्टर 92 और 95 में 226 एकड़ की रामप्रस्थ सिटी की भूखंड आवंटन के आधार पर बसाई कॉलोनियों और गुरुग्राम के बसई, गडोली कलां, हयातपुर और वजीपुर में 1,700 एकड़ के भूखंड शामिल हैं।

एजेंसी ने बताया कि इन संपत्तियों का कुल मूल्य 681.54 करोड़ रुपये है।

ईडी की कार्रवाई के बारे में प्रतिक्रिया के लिए न तो कंपनी और न ही उसके निदेशकों से संपर्क किया जा सका।

ईडी ने बताया कि धन शोधन का यह मामला दिल्ली और हरियाणा पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा (ईओडब्ल्यू) द्वारा दर्ज की गई कई प्राथमिकियों पर आधारित है।

एजेंसी ने बताया कि पुलिस ने कई घर खरीदारों द्वारा आरपीडीपीएल और उसके प्रवर्तकों जैसे अरविंद वालिया, बलवंत चौधरी और संदीप यादव के खिलाफ की गई शिकायतों के अधार पर प्राथमिकी दर्ज की गई थी। इन प्रवर्तकों पर वादा किए गए समय सीमा के भीतर फ्लैट और भूखंड देने में ‘विफल’ रहने का आरोप लगाया गया है।

ईडी ने बताया कि जांच में खुलासा हुआ कि आरपीडीपीएल की विभिन्न परियोजनाएं जैसे प्रोजेक्ट एज, प्रोजेक्ट स्काईज, प्रोजेक्ट राइज और रामप्रस्थ सिटी (गुरुग्राम के विभिन्न सेक्टरों में) 2008-2011 के दौरान शुरू की गईं और 14-17 साल से अधिक समय बीत जाने के बाद भी खरीदारों को फ्लैट/भूखंड पर कब्जा नहीं दिया गया।

एजेंसी के मुताबिक कंपनी ने उक्त परियोजनाओं के लिए 2,000 से अधिक घर खरीदारों से लगभग 1,100 करोड़ रुपये एकत्र किए, लेकिन कंपनी के प्रवर्तकों और निदेशकों ने वादा किए गए घरों का निर्माण पूरा करने के लिए जमा की गई राशि का उपयोग करने के बजाय, भूखंड आदि की खरीद के लिए अग्रिम के रूप में राशि अपने समूह की कंपनियों को भेज दिया।

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