ताजा खबरें | राज्यसभा ने मध्यस्थता विधेयक स्थायी समिति को भेजा
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नयी दिल्ली, 20 दिसंबर राज्यसभा ने वाणिज्यिक या उससे भिन्न विवादों के समाधान के लिए सरकार द्वारा लाए गए एक विधेयक को सोमवार को संसद की स्थायी समिति के पास भेज दिया।
एक बार के स्थगन के बाद दोपहर दो बजे उच्च सदन की बैठक शुरू होने पर विधि एवं कानून राज्य मंत्री एस पी सिंह बघेल ने मध्यकता विधेयक, 2021 सदन में पेश किया। इसके बाद कांग्रेस नीत विपक्ष ने विधेयक को स्थायी समिति में भेजे जाने की मांग की।
इस मांग को स्वीकार करते हुए बघेल ने विधेयक को विधि एवं कानून मंत्रालय की स्थायी संसदीय समिति को भेजने का प्रस्ताव किया जिसे सदन ने स्वीकार कर लिया।
यह विधेयक वाणिज्यिक या उससे अलग विवादों के समाधान के लिए, संस्थागत मध्यस्थता को बढ़ावा देने के साथ ही मध्यस्था के लिए किए गए समझौतों को लागू करने के लिए लाया गया है। इसके साथ ही विधेयक में मध्यस्थों के रजिस्ट्रेशन के लिए एक निकाय का उपबंध करने और सामुदायिक मध्यस्थता को बढ़ावा देने पर जोर दिया गया है। इसके अलावा ऑनलाइन मध्यस्थता को स्वीकार किए जाने का भी विधेयक में प्रावधान किया गया है।
विधेयक में कहा गया है कि एक प्रभावी विवाद समाधान प्रक्रिया का देश की अर्थव्यवस्था और देश में व्यापार करने में अहम प्रभाव होता है तथा इससे नागरिकों के लिए जीवनयापन में सरलता, न्याय तक पहुंच और कानून के शासन का संवर्धन होता है।
विधेयक के उद्देश्यों एवं कारण में आगे कहा गया है कि तेजी से बदल रहे समाज और विभिन्न क्षेत्रों में हो रही प्रगति, आर्थिक, औद्योगिक या वित्तीय क्षेत्रों तक ही सीमित नहीं है, ये पक्षकारों के बीच विवाद के समाधान की उसी के अनुरूप तेजी से हल की मांग करती हैं जो मौजूदा समय में काफी समय लेना वाला है। इसके अनुसार इस प्रक्रिया में लगने वाले समय के मद्देनजर वैकल्पिक विवाद समाधान को, अन्य बातों के अलावा सांस्थानिक मध्यस्थता द्वारा औरसंवर्धित करने की जरूरत है।
विधेयक में भारतीय मध्यस्थता परिषद की स्थापना का प्रस्ताव किया गया है जिसका मकसद अन्य बातों के अलावा मध्यस्थता का संवर्धन करना और भारत को घरेलू व अंतरराष्ट्रीय मध्यस्थता के एक प्रमुख केंद्र के रूप में विकसित करना, मध्यस्थों के रजिस्ट्रेशन के लिए विनियम बनाना, मध्यस्थता संस्थानों और मध्यस्थता सेवा प्रदाताओं की मान्यता के लिए मानदंड तय करना आदि हैं।
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