ताजा खबरें | राज्यसभा ने प्रेस एवं नियत कालिक पत्रिका रजिस्ट्रीकरण विधेयक को दी मंजूरी

Get latest articles and stories on Latest News at LatestLY. राज्यसभा ने बृहस्पतिवार को प्रेस एवं नियत कालिक पत्रिका रजिस्ट्रीकरण विधेयक 2023 को ध्वनिमत से पारित कर दिया जिसमें प्रकाशकों के लिए प्रक्रियागत अड़चनों को दूर करने तथा पत्र-पत्रिकाओं के पंजीकरण की प्रक्रिया को आनलाइन बनाने सहित कई महत्वपूर्ण प्रावधान किए गए हैं।

नयी दिल्ली, तीन अगस्त राज्यसभा ने बृहस्पतिवार को प्रेस एवं नियत कालिक पत्रिका रजिस्ट्रीकरण विधेयक 2023 को ध्वनिमत से पारित कर दिया जिसमें प्रकाशकों के लिए प्रक्रियागत अड़चनों को दूर करने तथा पत्र-पत्रिकाओं के पंजीकरण की प्रक्रिया को आनलाइन बनाने सहित कई महत्वपूर्ण प्रावधान किए गए हैं।

उच्च सदन में सूचना एवं प्रसारण मंत्री अनुराग ठाकुर द्वारा रखे गये इस विधेयक को संक्षिप्त चर्चा के बाद ध्वनिमत से पारित कर दिया। विधेयक पर चर्चा और इसे पारित किए जाने के दौरान विपक्षी सदस्य सदन में मौजूद नहीं थे क्योंकि उन्होंने मणिपुर के मुद्दे पर प्रधानमंत्री के बयान की मांग को लेकर सदन से पहले ही बहिर्गमन कर दिया था।

भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के अलावा चर्चा में शामिल तेलुगू देशम पार्टी (तेदेपा), बीजू जनता दल (बीजद) और वाईएसआर कांग्रेस के सदस्यों ने विधेयक का समर्थन किया और कहा कि इस विधेयक से अखबारों या पत्रिकाओं के पंजीकरण की प्रक्रिया ना सिर्फ आसान होगी बल्कि उद्यमियों के लिए व्यवसाय की सुगमता भी उपलब्ध होगी।

चर्चा का जवाब देते हुए सूचना प्रसारण मंत्री ठाकुर ने कहा कि यह बहुत महत्वपूर्ण विधेयक है और ऐसे समय में लाया गया है जब देश आजादी की 75वीं वर्षगांठ से 100वीं वर्षगांठ की ओर बढ़ रहा है।

उन्होंने कहा, ‘‘इस स्वर्णिम काल में हम यह सुनिश्चित कर रहे हैं कि गुलामी की मानसिकता से मुक्ति मिले। क्योंकि यह विधेयक 1867 में अंग्रेजों के बनाए कानून की जगह लेगा। अंग्रेज शासक प्रेस पर नियंत्रण के लिए यह कानून लाये थे।’’

उन्होंने कहा कि पुराने कानून में छोटी-मोटी गलतियों को एक अपराध मान कर जेल में डालने या अन्य दंड का प्रावधान था लेकिन नए विधेयक में इसे खत्म करने के लिए उचित कदम उठाए गए हैं।

उन्होंने कहा कि नए विधेयक में पंजीकरण की प्रकिया में आने वाली बाधाओं को समाप्त किया गया है और इसका सरलीकरण किया गया है।

उन्होंने कहा कि पहले आठ चरणों में पंजीकरण की प्रक्रिया पूरी होती थी और इसमें दो से तीन साल तक लग जाते थे लेकिन नए विधेयक के कानून बन जाने के बाद एक आसान ऑनलाइन प्रक्रिया के माध्यम से पंजीकरण कराया जा सकेगा और यह दो से तीन महीने के भीतर पूरी कर ली जाएगी।

ठाकुर ने कहा कि सरकार ने प्रक्रिया को आसान बनाने के लिए कदम भी उठाने शुरु कर दिए हैं। उन्होंने कहा कि पंजीकरण के लिए पोर्टल बनाने का काम शुरू हो गया और इसी साल अगस्त महीने में इसको लांच कर दिया जाएगा।

केंद्रीय मंत्री ने कहा कि कांग्रेस ने 2011 में पुराने कानून की जगह एक कानून लाने का प्रयास किया था लेकिन उसमें कोई खासा बदलाव नहीं किया गया था।

उन्होंने कहा कि उस विधेयक में और भी कड़े प्रावधान किए गए थे।

आपातकाल के दौरान पत्रकारों को जेल में डाले जाने का उल्लेख करते हुए ठाकुर ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नौ साल के शासन में ऐसा कुछ भी नहीं किया जिससे प्रेस की स्वतंत्रता पर आंच आए।

उन्होंने कहा, ‘‘हमने इसे और मजबूत करने का काम किया है। यह विधायक लाकर हमने दिखाया है कि हम सिर्फ कहते ही नहीं है, जो कहते हैं उस पर अमल भी करते हैं।’’

उन्होंने मीडिया के बदलते स्वरूप का जिक्र करते हुए उम्मीद जताई कि इस विधेयक के पारित होने के बाद हजारों नहीं बल्कि लाखों लोग आने वाले वर्षों में पत्र और पत्रिकाएं शुरू कर सकेंगे।

इससे पहले विधेयक पर चर्चा की शुरुआत करते हुए बीजद की सुलता देव ने आश्चर्य जताया कि आजादी के इतने सालों बाद भी यह कानून देश में था और इसकी वजह से मीडिया से जुड़े लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ा। उन्होंने वेब चैनलों और सोशल मीडिया पर फर्जी खबरों का उल्लेख किया और इस पर लगाम की मांग की।

भाजपा के पवित्र मार्गरिटा, नरेश बंसल सीमा द्विवेदी, जी वी एल नरसिम्हा राव और राकेश सिन्हा ने विधेयक का समर्थन करते हुए इसे प्रेस की स्वतंत्रता को मजबूत करने की दिशा में उठाया गए एतिहासिक कदम बताया।

वाईएसआर कांग्रेस के एस निरंजन रेड्डी और विजय साई रेड्डी ने विधेयक का समर्थन करते हुए कुछ सुझाव भी दिए।

तेदेपा के कनकमेदला रविंद्र कुमार ने भी विधेयक का समर्थन किया लेकिन साथ ही सरकार की आलोचना करने वाले पत्रकारों को प्रताड़ित किए जाने का भी मुद्दा उठाया। उन्होंने अपने गृह राज्य आंध्र प्रदेश की कुछ घटनाओं का भी उल्लेख किया लेकिन पीठासीन उपाध्यक्ष ने उन्हें ऐसा करने से मना किया।

विधेयक के कारणों एवं उद्देश्यों के अनुसार इसके जरिये 1867 में लाये गये मूल कानून में संशोधन किया जाएगा। इसमें कहा गया है कि सरकार प्रेस की आजादी को मान्यता देते हुए इसके कामकाज को सरल एवं बाधा रहित बनाना चाहती है।

इसमें पत्र-पत्रिकाओं के नाम एवं पंजीकरण की प्रक्रिया को आनलाइन बनाने का प्रावधान है। इसके तहत अब मुद्रकों को जिलाधिकारी या स्थानीय अधिकारियों के समक्ष घोषणापत्र देने की अनिवार्यता को समाप्त करने का प्रावधान है।

विधेयक में औपनिवेशिक युग के कुछ नियम उल्लंघनों को अपराध की श्रेणी से हटाते हुए उनके स्थान पर अर्थदंड तथा भारतीय प्रेस परिषद के प्रमुख की अध्यक्षता में विश्वस्त अपील तंत्र कायम करने का प्रावधान है।

इसमें विदेशी पत्र-पत्रिकाओं के भारत में प्रतिकृति संस्करण के लिए सरकार से पूर्वानुमति लेने को अनिवार्य बनाने का भी प्रावधान किया गया है।

ब्रजेन्द्र

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