जरुरी जानकारी | राही ओडिशा में बाजरा मूल्य श्रृंखला निर्मित करने के लिए पांच एफपीओ को समर्थन दे रहा है
Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on Information at LatestLY हिन्दी. एक गैर सरकारी संगठन ‘राइज अगेन्स्ट हंगर इंडिया’ (राही) ने सोमवार को कहा कि उसने ओडिशा के बारगढ़ जिले में बाजरा किसानों के लिए संपूर्ण मूल्य श्रृंखला बनाने के लिए एक परियोजना शुरू की है और वह पांच किसान उत्पादक संगठनों (एफपीओ) का समर्थन कर रहा है।
नयी दिल्ली, 31 अगस्त एक गैर सरकारी संगठन ‘राइज अगेन्स्ट हंगर इंडिया’ (राही) ने सोमवार को कहा कि उसने ओडिशा के बारगढ़ जिले में बाजरा किसानों के लिए संपूर्ण मूल्य श्रृंखला बनाने के लिए एक परियोजना शुरू की है और वह पांच किसान उत्पादक संगठनों (एफपीओ) का समर्थन कर रहा है।
इस गैर सरकारी संगठन (एनजीओ) ने कहा है कि बेंगलुरु स्थित आरएएचआई (राही) इन पांच एफपीओ के तहत 800 किसानों को कृषि-उपकरणों एवं मशीनों तथा अन्य लागतों के माध्यम से उपज में सुधार करने में मदद कर रहा है।
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इसने कहा कि इस तरह की ग्रामीण परियोजनाएं उन ग्रामीण किसानों की जिजीविषा को बढ़ायेगा जिनके पास शहर की ओर पलायन करने के अलावा अब कोई विकल्प नहीं बचा है।
एनजीओ ने एक बयान में कहा, ‘‘संस्था ने कोविड-19 से पैदा हालात को ध्यान में रख कर ओडिशा के बारगढ़ में बाजरा के लिए पूरी की पूरी मूल्य श्रृंखला बनाने पर केंद्रित परियोजना को शुरु किया गया है।’’
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राही ने कहा कि एफपीओ संसाधनों और आदानों को साझा करने का एक मंच बन गया है।
इसने कहा है कि किसानों को, उत्पादन में 80-100 प्रतिशत वृद्धि और प्रति एकड़ अपनी आय में 100 प्रतिशत की वृद्धि होने की उम्मीद है। एक सुनिश्चित आय के साथ, किसानों को प्रवासी आय पर कम निर्भरता रहेगी और वे प्रतिकूल् स्थितियों का अच्छे से सामना करने लायक बनेंगे।
इससे पहले, राही ने मेघालय के री-भोई जिले में कार्यक्रम चलाया ताकि अनानास और केला किसानों के फायदे के लिए सम्पूर्ण मूल्य श्रृंखला बनाया जा सके।
मौजूदा समय में, राही मध्य प्रदेश के धार क्षेत्र में भील जनजातियों के चार आदिवासी गांवों में बकरी किसानों के लिए एक सम्पूर्ण मूल्य श्रृंखला बनाने के लिए काम कर रहा है।
राही के कार्यकारी निदेशक डोला महापात्र ने कहा, ‘‘ हम गांवों में कमजोर लोगों को सक्षम और आत्मनिर्भर बनाने की कोशिश कर रहे हैं। गांवों में पर्याप्त आय उपलब्ध होने से पलायन को रोका जा सकता है और गरीबी के चक्र को उल्टा जा सकता है।’’
इस तरह की ग्रामीण परियोजनाओं का तात्कालिक अल्पकालिक लक्ष्य शहरों और कस्बों के प्रवासी मजदूरों को वापस अपनी जमीन की ओर ले जाकर खेती के लिए प्रेरित करना है, लेकिन व्यापक उद्देश्य किसानों को गांवों में पर्याप्त आय सर्जक बनाने के लिए उन्हें सक्षम बनाना है, ताकि मुश्किलों की वजह से होने वाले प्रवास को कमतर किया जा सके।
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