देश की खबरें | पंजाब: राज्यपाल ने विधानसभा सत्र की वैधता पर सवाल उठाये, विधेयकों को मंजूरी नहीं
Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. पंजाब के राज्यपाल बनवारीलाल पुरोहित ने सोमवार को मुख्यमंत्री भगवंत मान को पत्र लिखकर कहा कि उनका (पुरोहित का) मानना है कि पिछले माह आयोजित विधानसभा का दो-दिवसीय सत्र ‘कानून एवं प्रक्रिया का उल्लंघन’ था। उन्होंने इस बात के भी संकेत दिये कि सत्र के दौरान पारित विधेयकों पर वह जल्दी हस्ताक्षर नहीं करेंगे।
चंडीगढ़, 17 जुलाई पंजाब के राज्यपाल बनवारीलाल पुरोहित ने सोमवार को मुख्यमंत्री भगवंत मान को पत्र लिखकर कहा कि उनका (पुरोहित का) मानना है कि पिछले माह आयोजित विधानसभा का दो-दिवसीय सत्र ‘कानून एवं प्रक्रिया का उल्लंघन’ था। उन्होंने इस बात के भी संकेत दिये कि सत्र के दौरान पारित विधेयकों पर वह जल्दी हस्ताक्षर नहीं करेंगे।
पुरोहित ने अपने पत्र में कहा है कि वह उक्त सत्र के दौरान पारित चार विधेयकों की वैधता को लेकर अटॉर्नी जनरल की सलाह लेने या राष्ट्रपति के पास भेजने की संभावनाओं पर विचार कर रहे हैं। इस पत्र के साथ ही राज्य की आम आदमी पार्टी (आप) सरकार और राजभवन के बीच गतिरोध बढ़ने के आसार हैं।
आप ने कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए दावा किया कि पुरोहित की कार्रवाई न केवल राज्य विधानसभा के अधिकार को कमतर करती हैं, बल्कि लोगों की आवाज दबाने के एक ‘भयावह एजेंडा’ को भी उजागर करती हैं।
पुरोहित का यह जवाब मान की उस अपील के दो दिन बाद आया है, जिसमें मुख्यमंत्री ने सिख गुरुद्वारा (संशोधन) विधेयक, 2023 पर हस्ताक्षर करने का राज्यपाल से अनुरोध किया था।
यह विधेयक उन चार विधेयकों में शामिल है, जिन्हें 19 और 20 जून को आयोजित विशेष सत्र में पारित किया गया था।
पुरोहित ने मान के पत्र के जवाब में लिखा है कि वह पिछले महीने आयोजित सत्र की वैधता की जांच के बाद विधेयकों पर कार्रवाई करेंगे। उन्होंने कहा, ‘‘राज्यपाल के रूप में, उन्हें भारत के संविधान द्वारा यह सुनिश्चित करने का आदेश दिया गया है कि विधेयक कानून के अनुसार पारित हों।’’
पुरोहित ने पत्र में कहा है, ‘‘अपने कर्तव्यों का निष्ठापूर्वक निर्वहन करने के लिए, मैंने कानूनी सलाह प्राप्त की है, जिससे मुझे आभास हो रहा है कि आपका 19 और 20 जून को विधानसभा सत्र आहूत करना कानून और प्रक्रिया का उल्लंघन था, ऐसे में इस दौरान पारित किए गए चार विधेयकों की वैधता को लेकर संदेह पैदा हो गया है।’’
राज्यपाल ने कहा है, “प्राप्त कानूनी सलाह की पृष्ठभूमि में, मैं इस बात पर गंभीरता से विचार कर रहा हूं कि क्या भारत के अटॉर्नी जनरल से इस बारे में कानूनी राय प्राप्त की जाए या संविधान के अनुसार, इन विधेयकों को राष्ट्रपति के विचारार्थ और सहमति के लिए रखा जाए।”
आप की पंजाब इकाई के प्रवक्ता मलविंदर सिंह कांग ने पत्र को लेकर पुरोहित की आलोचना की।
उन्होंने कहा, “विधेयकों को असंवैधानिक रूप से राष्ट्रपति के पास भेजने की बात करके राज्यपाल पुरोहित ने केंद्र के एजेंट के रूप में अपना असली रंग दिखा दिया है। उनकी कार्रवाई न केवल राज्य विधानसभा के अधिकार को कमतर करती हैं, बल्कि लोगों की आवाज को दबाने के एक भयावह एजेंडे को भी उजागर करती हैं।”
कांग ने आरोप लगाया कि उचित प्रक्रिया के प्रति राज्यपाल पुरोहित की ''घोर उपेक्षा'' और निर्वाचित प्रतिनिधियों की इच्छा को नष्ट करने का उनका प्रयास लोकतंत्र के चेहरे पर एक तमाचा है।
इस बीच, शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक समिति (एसजीपीसी) के प्रमुख हरजिंदर सिंह धामी ने राज्य सरकार को दिये गये पुरोहित के जवाब पर संतोष व्यक्त किया।
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